डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ पर तगड़ा झटका, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका केस, भारत समेत 60 देशों का मसला


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Donald Trump Tariff: अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है. 25 राज्यों ने 60 देशों से आयात होने वाले सामान पर लगाए गए 10% और 12.5% टैरिफ को चुनौती दी है. उनका आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने पर्याप्त कानूनी आधार के बिना यह फैसला लिया. साथ ही ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 301 का गलत इस्तेमाल किया. नए टैरिफ का असर चीन, भारत और यूरोपीय संघ समेत कई बड़े व्यापारिक साझेदारों पर पड़ा है.

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60 देशों पर नए टैरिफ लगाने के फैसले के खिलाफ डेमोक्रेटिक-शासित 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन पर मुक़दमा किया.

Trump Tariff News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खूब टैरिफ-टैरिफ करते हैं. अब उनके टैरिफ वाले वॉर पर घर में ही बवाल हो गया है. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. एक साथ 25 राज्यों ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार के खिलाफ केस ठोक दिया है. ये 25 राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले हैं. इन्होंने ही ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. इन 25 राज्यों ने 60 देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए नए टैरिफ के फैसले को चुनौती दी है. इनका आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अपनी अधिकार-सीमा से बाहर जाकर काम किया है.

यह याचिका सोमवार को यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर की गई. अपनी शिकायत में राज्यों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है. इतना ही नहीं, इसके लिए पर्याप्त वजह भी नहीं बताई गई. याचिका में कहा गया है कि प्रभावित 60 देशों से आने वाले ज्यादातर सामान पर 10% या 12.5% टैरिफ लगाया गया है. इन देशों का अमेरिका के कुल आयात में करीब 99.4% हिस्सा है.

राज्यों ने क्या तर्क दिया

इस मुकदमे में राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को दुनिया भर की सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी (Forced Labour) रोकने के नाम पर लगाया, लेकिन दोनों के बीच कोई साफ संबंध नहीं है. याचिका में कहा गया है कि जबरन मजदूरी की समस्या और सभी देशों पर एक जैसा टैरिफ लगाने के बीच कोई तर्कसंगत संबंध नहीं दिखता.

राज्यों का आरोप- ट्रंप ने व्यापार नियमों को नजरअंदाज किया

राज्यों का आरोप है कि यूएटीआर यानी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने 60 देशों की जांच बहुत जल्दबाजी में की. हर देश के साथ जरूरी अलग-अलग बातचीत नहीं की गई. साथ ही यह भी नहीं बताया गया कि अलग-अलग व्यापार नीतियों और श्रम कानून वाले देशों पर लगभग एक जैसी टैरिफ दरें क्यों लागू की गईं.

क्यों अहम है ट्रंप प्रशासन के लिए यह चुनौती

यह कानूनी चुनौती तब आई है, जब ट्रंप प्रशासन ने अदालत में पहले मिली हार के बाद अपनी टैरिफ नीति को फिर से शुरू करने के लिए एक अलग व्यापार कानून का इस्तेमाल किया. राज्यों का तर्क है कि प्रशासन 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 का गलत इस्तेमाल करके उन शुल्कों को वापस ला रहा है जिनका कानूनी रूप से विरोध हुआ था.

24 जुलाई से नए टैरिफ लागू

ये नए टैरिफ 24 जुलाई से लागू हुए. इन टैरिफ ने ट्रंप द्वारा शुरू किए गए पहले के ग्लोबल टैरिफ प्रोग्राम की जगह ली. इन टैरिफ उपयाों से चीन, भारत और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार प्रभावित हुए हैं और कई देशों ने इसकी आलोचना की है. बीते दिनों ही अमेरिका ने भारत-चीन समेत 60 देशों पर टैरिफ लगाया था.

अमेरिका ने किया बचाव

हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस फैसले का बचाव किया है. उनका कहना है कि अमेरिका लंबे समय से जबरन मजदूरी से जुड़े सामान के आयात पर रोक लगाता रहा है. उन्होंने अन्य देशों से भी ऐसी ही नीतियां अपनाने की अपील की.

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Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…

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