Tourist Spot: लद्दाख जाने की जरूरत नहीं, हैदराबाद से 3 घंटे की दूरी पर छिपा है ‘तेलंगाना का पैंगोंग’


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Telangana Tourist Destination: अगर आप लद्दाख जैसी खूबसूरती देखना चाहते हैं, लेकिन लंबी यात्रा नहीं करना चाहते, तो हैदराबाद के पास स्थित विशाखापत्तनम कॉलोनी बेहतरीन विकल्प है. दक्कन के पठार पर बसा यह छोटा-सा गांव नागार्जुन सागर बांध के बैकवॉटर के किनारे स्थित है और अपने शांत नीले पानी व बंजर चट्टानी पहाड़ियों के कारण ‘तेलंगाना का लद्दाख’ कहलाता है. इस गांव का नाम विशाखापत्तनम से आए मछुआरा परिवारों की याद में रखा गया था. यहां येल्लेश्वरगट्टू द्वीप तक नाव की सैर, प्राकृतिक नजारे और रात में कैंपिंग का आनंद लिया जा सकता है. कम भीड़भाड़, शांत वातावरण और बजट फ्रेंडली खर्च के कारण यह जगह वीकेंड ट्रिप के लिए तेजी से पर्यटकों की पसंद बनती जा रही है.

अक्सर लोग नीले पानी और खूबसूरत बंजर पहाड़ियों का नजारा देखने के लिए लद्दाख जाने का सपना देखते हैं. लेकिन ऐसा ही एक अद्भुत नजारा हैदराबाद से महज तीन घंटे की दूरी पर भी मौजूद है. दक्कन के पठार के बीचों-बीच स्थित इस जगह को इसके अनोखे भूगोल के कारण ‘तेलंगाना का लद्दाख’ कहा जाने लगा है. यहां का शांत और गहरा नीला पानी, आसपास फैली सूखी बंजर जमीन और चट्टानी पहाड़ियां लद्दाख की प्रसिद्ध पैंगोंग झील की याद दिलाती हैं. यही वजह है कि यह जगह प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

लद्दाख जैसी दिखने वाली यह खूबसूरत जगह असल में तेलंगाना के नलगोंडा जिले के चंदमपेट मंडल में स्थित एक छोटा-सा गांव है, जिसका नाम विशाखापत्तनम कॉलोनी है. हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 170 किलोमीटर है. यह गांव नागार्जुन सागर बांध के विशाल और शांत बैकवॉटर के किनारे बसा हुआ है. शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने और मनमोहक प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने के लिए यह एक बेहतरीन पर्यटन स्थल माना जाता है.

तेलंगाना के भीतरी इलाके में स्थित इस गांव का नाम आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम पर क्यों पड़ा, इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. 1950 और 1960 के दशक में, जब नागार्जुन सागर बांध का निर्माण हो रहा था, तब विशाखापत्तनम से करीब 24 मछुआरा परिवार यहां काम के सिलसिले में आए थे. बांध बनने के बाद ये परिवार यहीं के उपजाऊ बैकवॉटर क्षेत्र के पास बस गए. अपने पैतृक शहर की याद और सम्मान में उन्होंने इस बस्ती का नाम ‘विशाखापत्तनम कॉलोनी’ रख दिया. आज यह गांव अपनी अनोखी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ इस दिलचस्प इतिहास के कारण भी पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

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यह शांत बस्ती येल्लेश्वरगट्टू द्वीप की यात्रा का शुरुआती पड़ाव भी है, जो बैकवॉटर के बीच स्थित एक छोटा और हरा-भरा द्वीप है. यहां से द्वीप तक पहुंचने में करीब 20 मिनट का समय लगता है. स्थानीय नाविकों की मदद से पर्यटक शांत जलराशि के बीच नाव की सैर का आनंद ले सकते हैं. इस खूबसूरत सफर के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 200 रुपये का किराया लिया जाता है, जो बजट में घूमने के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है.

अगर आप सिर्फ घूमकर वापस नहीं लौटना चाहते और प्रकृति के और करीब समय बिताना चाहते हैं, तो यहां नाइट कैंपिंग की सुविधा भी उपलब्ध है. रोमांच पसंद पर्यटकों के लिए स्थानीय मछुआरे रातभर ठहरने का विशेष इंतजाम करते हैं. लगभग 1,500 रुपये के खर्च में आप खुले आसमान के नीचे तारों की छांव में रात बिता सकते हैं और प्रकृति की शांत वादियों का अनोखा अनुभव ले सकते हैं. यह जगह एडवेंचर और सुकून, दोनों का बेहतरीन संगम मानी जाती है.

यदि आप वीकेंड पर हैदराबाद के आसपास किसी नई, शांत और कम भीड़भाड़ वाली जगह की तलाश कर रहे हैं, तो विशाखापत्तनम कॉलोनी आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है. सुबह और शाम के समय यहां का मौसम, शांत बैकवॉटर और प्राकृतिक नजारे बेहद सुकून देने वाले होते हैं. एक दिन की यात्रा के लिए यह जगह न केवल बजट के अनुकूल है, बल्कि आपको प्रकृति के बीच एक अलग और यादगार अनुभव भी देती है. यही वजह है कि यह स्थान धीरे-धीरे पर्यटकों की पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है.

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