US Tariff News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया के साथ व्यापारिक टकराव बढ़ाने वाला फैसला लिया है. ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया समेत 60 व्यापारिक साझेदारों से आने वाले सामान पर 10% और 12.5% तक का नया टैरिफ लागू कर दिया है. अमेरिका ने अपने सबसे खास दोस्त इजरायल पर भी टैरिफ ठोका है. अमेरिका का कहना है कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है, जहां जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होती.
क्या है नया टैरिफ?
यह नया टैरिफ अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 के Section 301 के तहत लगाया गया है. इससे पहले ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल कानून के तहत लगाए गए अपने पुराने ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लागू किए थे, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में उन्हें रद्द कर दिया था. अब ट्रंप प्रशासन ने नया कानूनी रास्ता अपनाकर लगभग सभी आयातित सामान पर न्यूनतम टैरिफ बनाए रखने की कोशिश की है. हालांकि, कच्चा तेल, गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य पदार्थ, विमान के पुर्जे और कुछ अन्य जरूरी उत्पादों को इस टैरिफ से बाहर रखा गया है.
किन देशों पर कितना असर?
अमेरिका ने भारत, कनाडा, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन, मलेशिया, मैक्सिको और कई अन्य देशों के सामान पर 10% टैरिफ लगाया है. वहीं यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्विट्जरलैंड पर पहले से लागू शुल्क को मिलाकर कुल प्रभावी टैरिफ 10% से 12.5% तक रहेगा. चीन समेत 38 अन्य देशों पर 12.5% की दर लागू की गई है.
ट्रंप सरकार ने क्या वजह बताई?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका लगभग 100 साल से जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का कानून लागू कर रहा है. उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि दूसरे देश भी ऐसे ही सख्त कदम उठाएं. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि जिन देशों में ऐसे उत्पादों पर सख्ती नहीं होती, वहां के उत्पाद अमेरिकी कंपनियों के मुकाबले अनुचित व्यापारिक फायदा हासिल कर लेते हैं.
टैरिफ से कौन-कौन हुआ नाराज?
ट्रंप के इस फैसले से उनके दोस्त नाराज दिख रहे है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि अमेरिका का तर्क समझ से परे है. उन्होंने कहा कि यूरोप में कर्मचारियों के लिए छुट्टियां, श्रम सुरक्षा और कामकाजी नियम अमेरिका से भी ज्यादा मजबूत हैं, इसलिए जबरन मजदूरी का आरोप उचित नहीं है. ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील ने इन टैरिफ को अनुचित बताया और कहा कि वे इन्हें हटाने की कोशिश करेंगे.
नॉर्वे ने कहा कि इन टैरिफ का कोई आधार नहीं है. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्स ने इसे बेहद निराशाजनक करार दिया. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिकी जांच में जबरन मजदूरी के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं दिए गए. उनके मुताबिक, टैरिफ से कारोबार महंगा होता है और अनिश्चितता बढ़ती है.
वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत में अपने मजदूरों, किसानों, कारोबारियों और परिवारों के हितों की रक्षा करेगी. उन्होंने कहा कि कनाडा अब पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है और अमेरिकी दबाव का जवाब अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर देगा.




