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China Fujian Aircraft Carrier: ईरान जंग के चलते पैदा हुआ होर्मुज स्ट्रेट क्राइसिस ने पूरी दुनिया को एक बार फिर से बता दिया कि समंदर की बादशाहत ही असली ताकत है. मैरीटाइम सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए चीन ब्लू वॉटर नेवी डेवलप करने में जुटा है, ताकि पूरी दुनिया में उसका वर्चस्व स्थापित हो सके. चीन ने इस दिशा में बड़ा कारनामा किया है.
चीन ने अपने नए फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर में ऐसा वेपन सिस्टम इंटीग्रेट किया है जो अमेरिकी सबमरीन अटैक की धार को कुंद करने में सक्षम है. (Eurasia Naval Insight के X अकाउंट से साभार)
China Fujian Aircraft Carrier: समंदर का राजा अभी भी अमेरिका ही है, पर चीन से उसे कड़ी चुनौती मिल रही है. चीन ब्लू वॉटर नेवी के सपने को साकार करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है. कुछ महीने पहले चीन की ओर से फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्च किया गया था. इसमें कई अटैक और डिफेंस सिस्टम इंटीग्रेट किए गए हैं, जो किसी भी तरह के सबमरीन अटैक को नाकाम करने में सक्षम है. फुजियान विमानवाहक पोत में लगे वेपन सिस्टम अमेरिकी पनडुब्बी के हमले को भी नाकाम कर सकता है. इस तरह चीन समंदर में अमेरिकी दादागिरी को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच गया है. फुजियान में लगा एंटी टॉरपीडो टॉरपीडो (ATT) भविष्य में अमेरिका के लिए बड़ा चैलेंज साबित हो सकता है.
चीन अपनी नौसैनिक ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में उसका सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत ‘फुजियान’ (Fujian) ऐसी एक्टिव टॉरपीडो-रोधी प्रणाली (Active Anti-Torpedo Torpedo-ATT) से लैस हो सकता है, जो दुश्मन के टॉरपीडो को समुद्र के भीतर ही नष्ट करने में सक्षम होगी. यदि ऐसा होता है तो फुजियान दुनिया का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर बन जाएगा, जिस पर इस तरह की ‘हार्ड-किल’ अंडरवॉटर डिफेंस सिस्टम तैनात होगा. यह कदम चीन की बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ अमेरिकी नेवी की अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बियों से पैदा होने वाले खतरे का सीधा जवाब है. चीन का मानना है कि आधुनिक भारी टॉरपीडो बड़े युद्धपोतों के लिए एंटी-शिप मिसाइलों से भी अधिक घातक साबित हो सकते हैं.
फुजियान पर क्या है खास?
‘एशिया टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, फुजियान चीन का तीसरा और पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसमें पारंपरिक 12 ट्यूब डेप्थ चार्ज लॉन्चर की जगह 6 ट्यूब वाला 324 mm का हल्का टॉरपीडो लॉन्चर लगाया गया है. माना जा रहा है कि यही लॉन्चर सक्रिय एंटी टॉरपीडो वेपन सिस्टम का हिस्सा होगा. यह सिस्टम ब्रॉडबैंड सोनार की मदद से टॉरपीडो और डिकॉय में अंतर कर सकती है. इसके बाद उच्च क्षमता वाले पंप जेट थ्रस्टर के जरिए इंटरसेप्टर टॉरपीडो महज तीन सेकंड में 50 से 60 नॉट की रफ्तार पकड़ लेता है और दुश्मन के टॉरपीडो का पीछा करता है. टारगेट को नष्ट करने के लिए इसमें गाइडेड एक्सप्लोसिव और शक्तिशाली शॉकवेव तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. भविष्य में इसमें सुपरकैविटेशन तकनीक जुड़ने पर इसकी गति 200 नॉट तक पहुंच सकती है.
फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर में लगा एंटी टॉरपीडो टॉरपीडो समंदर में अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है. (फाइल फोटो/Reuters)
अमेरिकी पनडुब्बियां क्यों हैं सबसे बड़ा खतरा?
विश्लेषकों के अनुसार चीन की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी नौसेना की अत्याधुनिक सीवुल्फ (Seawolf), वर्जीनिया (Virginia) और भविष्य की SSN(X) कैटेगरी की न्यूक्लियर अटैक सबमरीन है. ये अत्यंत शांत (स्टील्थ) तकनीक से लैस हैं और Mk-48 जैसे हेवी वायर-गाइडेड टॉरपीडो तथा मैरीटाइम स्ट्राइक टॉमहॉक मिसाइलों से बड़े युद्धपोतों को गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं. चीन का पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) भले ही जहाजों की संख्या के मामले में अमेरिकी नौसेना के बराबर या उससे आगे निकलती दिखाई दे, लेकिन पानी के भीतर युद्ध यानी एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) में उसकी कमजोरियां अब भी स्पष्ट हैं.
चीन की एंटी-सबमरीन क्षमता में चुनौतियां
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की विमानवाहक पोत रणनीति अब तक मुख्य रूप से अपने तटों के नजदीक ऑपरेशन पर आधारित रही है, जहां उन्हें जमीन पर मौजूद मिसाइल सिस्टम्स और वायुसेना का संरक्षण मिलता है. इसके विपरीत अमेरिकी विमानवाहक पोत दुनिया भर में लंबी दूरी तक स्वतंत्र रूप से संचालन करने में सक्षम हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की हवाई एंटी-सबमरीन क्षमता अभी भी सीमित है. उसके पास पर्याप्त समुद्री गश्ती विमान नहीं हैं और चालक दल के प्रशिक्षण, सेंसर डेटा प्रोसेसिंग तथा संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता में भी सुधार की जरूरत बनी हुई है. इसके अलावा मौसम और समुद्री परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी (मेटेरोलॉजी और ओशनोग्राफी), समुद्र में तैनात सेंसर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और वास्तविक समय में सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसी क्षमताओं में भी चीन अमेरिका से पीछे माना जाता है. यही वजह है कि वह अपने विमानवाहक पोतों की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों पर तेजी से निवेश कर रहा है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें




