1,450 से ज्यादा मौतें और 68 हजार लोग लापता, वेनेजुएला में भूकंप के बाद वहां के ताजा हालात क्या हैं?


अपने ही हाथों से मलबा हटा रहे लोग: रेस्क्यू टीमों की कमी और भारी तबाही के कारण लोग अब खुद फावड़े, रस्सियां और अपने नंगे हाथों से अपनों को पत्थरों के नीचे ढूंढ रहे हैं. ला गुएरा के तटीय इलाकों में हालात इतने बेकाबू हैं कि सरकार ने वहां बाहरी लोगों की एंट्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया है, ताकि राहत के काम में कोई रुकावट न आए.

सड़कों पर चल रहे अस्पताल: बिजली, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हैं. पीने के पानी की बूंद-बूंद के लिए हाहाकार मचा है. अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं, डॉक्टरों की टीमें अस्पतालों के बाहर सड़कों पर टेंट लगाकर लोगों का इलाज कर रही हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, देश की करीब 67 लाख से अधिक आबादी इस आपदा की मार झेल रही है.

2. कितने मारे गए, कितने लापता?

जैसे-जैसे कंक्रीट की बड़ी-बड़ी दीवारें हटाई जा रही हैं, मरने वालों और घायलों की संख्या आसमान छू रही है. आपदा के पांचवें दिन तक के डराने वाले आंकड़े इस प्रकार हैं.

मारे गए लोग: 1,450 से ज्यादा लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि

घायल: 3,150 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल, जिनका इलाज चल रहा

लापता: लगभग 50,000 से 68,000 लोग अब भी लापता, ये वो लोग हैं जो ढह चुकी इमारतों के नीचे दबे हुए हैं.

विदेशी नागरिकों की मौत: इस तबाही में सिर्फ वेनेजुएला के लोग नहीं मरे. मरने वालों में स्पेन, कोलंबिया, चीन, इटली और ब्राजील के दर्जनों विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जो वहां रह रहे थे.

3. मलबे से निकली ‘जिंदगी’: 80 घंटे बाद चमत्कार

इस खौफनाक मंजर और मायूसी के बीच ला गुएरा राज्य के ‘कातिया ला मार’ इलाके से एक ऐसी कहानी आई, जिसने रोते हुए चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी. यहां एक पांच मंजिला रिहायशी अपार्टमेंट ताश के पत्तों की तरह ढह गया था. इस मलबे के नीचे एक छह साल की मासूम बच्ची पिछले 80 घंटों से दबी हुई थी. हर बीतते मिनट के साथ उसके बचने की उम्मीद खत्म हो रही थी. लेकिन रेस्क्यू टीम के खोजी कुत्तों ने मलबे के एक संकरे हिस्से में कुछ सूंघा और हलचल महसूस की.

राहतकर्मियों ने तुरंत बड़ी मशीनों को रोका. कंक्रीट के छोटे से छेद से जब कैमरा अंदर डाला गया, तो देखा कि बच्ची दो भारी-भरकम बीम के बीच बने एक छोटे से खाली त्रिकोण में सुरक्षित फंसी हुई थी. कंक्रीट की उन भारी बीमों ने ढाल बनकर बच्ची पर मलबा नहीं गिरने दिया था. राहतकर्मियों ने लगातार 7 घंटे तक बिना थमे कंक्रीट को धीरे-धीरे काटा और आखिरकार बच्ची को जिंदा बाहर निकाल लिया. मलबे से बाहर आते ही जब बच्ची ने पानी मांगा, तो वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखों में आंसू आ गए.

वेनेजुएला में भूकंप (रॉयटर्स)

4. बुनियादी ढांचे को कितना नुकसान हुआ?

ये वेनेजुएला के पिछले 125 सालों के इतिहास का सबसे भीषण भूकंप है, जिसने देश के एक बड़े हिस्से का भूगोल बदल दिया है. अकेले काराकास और ला गुएरा में 200 से ज्यादा बड़ी बहुमंजिला इमारतें और अपार्टमेंट पूरी तरह मिट्टी में मिल गए. करीब 300 से ज्यादा इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है, जो कभी भी गिर सकती हैं.

अस्पतालों पर संकट: देश के 91 इमरजेंसी अस्पताल इस भूकंप के सबसे खतरनाक झटके वाले दायरे में थे. इनमें से 20 मुख्य अस्पतालों की इमारतों में दरारें आ गई हैं, जिससे वहां डॉक्टरों को गंभीर मरीजों का इलाज करने में डर लग रहा है. पहाड़ी रास्तों पर बड़े-बड़े पहाड़ टूटकर गिरने के कारण मुख्य हाईवे बंद हैं, जिससे राहत सामग्री से लदे ट्रक प्रभावित शहरों तक नहीं पहुंच पा रहे.

5. भारत का ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ और अमेरिका का बड़ा एक्शन

इस महा-संकट को देखते हुए दुनिया भर के देशों ने अपनी राजनीतिक दुश्मनी और दूरियां भुलाकर वेनेजुएला की तरफ मदद के हाथ बढ़ाए हैं. दुनिया के कम से कम 17 देशों की स्पेशल रेस्क्यू टीमें इस समय जमीन पर काम कर रही हैं.

भारत का ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’: भारत ने इस संकट में वेनेजुएला की मदद के लिए तुरंत ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ लॉन्च किया. स्पेनिश भाषा में ‘अमिस्ताद’ का मतलब होता है ‘दोस्ती’. भारत सरकार ने वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए भारी मात्रा में जीवन रक्षक दवाएं, मलबे को हटाने वाले आधुनिक कटर, टेंट, साफ पानी बनाने वाली मशीनें और रेडी-टू-ईट फूड पैकेट्स वेनेजुएला भेजे हैं. भारतीय डॉक्टरों की एक टीम भी वहां पहुंच रही.

अमेरिका का राहत अभियान: वेनेजुएला और अमेरिका के कूटनीतिक रिश्ते हमेशा खराब रहे हैं, लेकिन इस त्रासदी को देखते हुए अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. अमेरिका ने 250 से ज्यादा आपदा विशेषज्ञों की एक विशाल टीम भेजी है, जो अपने साथ अत्याधुनिक थर्मल इमेजिंग कैमरे और खोजी कुत्ते लेकर आए हैं. अमेरिकी वायुसेना के विशाल C-17 विमान लगातार एयरपोर्ट पर राहत सामग्री उतार रहे हैं. इतना ही नहीं, अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा मेडिकल जहाज भी वेनेजुएला के समंदर में लंगर डाल चुका है, जहां घायलों के बड़े ऑपरेशन किए जा रहे हैं. बाकी देश यूरोपीय संघ, रूस, चीन, ब्राजील और कोलंबिया ने भी अपनी टीमें और वित्तीय मदद वेनेजुएला भेजी है.

6. प्रकृति का हमला कब हुआ था?

अब बात करते हैं कि इस भयानक तबाही की शुरुआत कब हुई. यह कोई आम भूकंप नहीं था, बल्कि यह प्रकृति का एक ‘Doublet’ जुड़वां झटका था, जिसने लोगों को संभलने का एक सेकंड का मौका भी नहीं दिया. 24 जून 2026 की शाम को जब लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तभी उत्तरी वेनेजुएला के याराकुई राज्य के सैन फेलिप इलाके में जमीन के नीचे अचानक भयानक हलचल हुई.

39 सेकंड में दो विनाशकारी झटके: स्थानीय समयानुसार शाम 06:04 बजे पहला बड़ा झटका आया, जिसकी तीव्रता 7.2 मापी गई. लोग अभी इस झटके के डर से चिल्लाते हुए घरों से बाहर भाग ही रहे थे कि ठीक 39 सेकंड बाद वहीं पर दूसरा और भी भयानक झटका आया, जिसकी तीव्रता 7.5 थी.

तबाही की असली वजह: भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे दो टेक्टोनिक प्लेट्स, कैरेबियन और साउथ अमेरिकन प्लेट्स आपस में टकराई थीं. पहले झटके ने जमीन के नीचे की ऊर्जा को मुक्त किया, जिससे बगल की फॉल्ट लाइन पर दबाव इतना बढ़ गया कि तुरंत दूसरा झटका आ गया. दो लगातार आए इन शक्तिशाली भूकंपों की वजह से विनाश का असर तीन गुना ज्यादा खतरनाक हो गया और मजबूत इमारतें भी ताश के पत्तों की तरह ढह गईं.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img