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Bamboo Farming: मध्य प्रदेश के किसान कमलाशंकर ने सरकारी नौकरी छोड़कर बांस की खेती शुरू की और फिर अपने खेत को खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट में बदल दिया. अब लोग यहां घूमने, फोटो खिंचवाने और प्री वेडिंग शूट कराने पहुंचते हैं. जानिए कैसे खेती के साथ उन्होंने कमाई का नया मॉडल तैयार किया.
Bamboo Farming: अक्सर लोग मानते हैं कि अच्छी कमाई सिर्फ नौकरी से ही हो सकती है, लेकिन मध्य प्रदेश के नीमच जिले के किसान कमलाशंकर ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में सलाहकार की नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौटकर खेती शुरू की. उन्होंने सिर्फ बांस की खेती ही नहीं की, बल्कि अपनी सोच और मेहनत के दम पर खेत को एक ऐसे खूबसूरत स्थान में बदल दिया, जहां आज लोग घूमने, फोटो खिंचवाने और प्री वेडिंग शूट कराने के लिए पहुंच रहे हैं. उनकी यह सफलता बताती है कि अगर खेती में नए प्रयोग किए जाएं तो इससे भी शानदार कमाई की जा सकती है.

ऐसे शुरू हुई बांस की खेती: कोरोना काल के दौरान कमलाशंकर ने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया और गांव लौट आए. यहां उन्होंने करीब एक हेक्टेयर जमीन पर बांस के पौधे लगाए. उन्होंने पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी ताकि खाली जगह का भी सही इस्तेमाल हो सके. शुरुआती दो साल तक उन्होंने बांस के साथ अश्वगंधा और बाद में शतावरी जैसी औषधीय फसलें भी उगाईं. इससे उन्हें खेती से अच्छी आय मिलने लगी और जमीन का पूरा उपयोग भी हुआ.

खेत को बना दिया खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट: जब बांस के पौधे बड़े हुए तो पूरा खेत प्राकृतिक सुंदरता से भर गया. कमलाशंकर ने इस खूबसूरत माहौल को देखते हुए इसे लोगों के लिए खोलने का फैसला किया. धीरे-धीरे आसपास के लोग यहां घूमने आने लगे. आज यहां आने वाले हर व्यक्ति से 50 रुपये का प्रवेश शुल्क लिया जाता है. हरियाली, लंबे बांस के पेड़ और प्राकृतिक वातावरण लोगों को बेहद पसंद आता है.
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प्री वेडिंग शूट से बढ़ी कमाई: कमलाशंकर ने सिर्फ घूमने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने अपने खेत को फोटो और वीडियो शूट के लिए भी उपलब्ध कराया. आज कई कपल यहां प्री वेडिंग शूट, मैटरनिटी शूट और फैमिली फोटोशूट कराने आते हैं. इसके लिए 2100 रुपये का शुल्क लिया जाता है. खेत के बाहर इसकी जानकारी वाला बोर्ड भी लगाया गया है. इस तरह खेती के साथ उन्होंने एक नई कमाई का जरिया भी तैयार कर लिया.

खेती के साथ तीन तरफ से हो रही आमदनी: कमलाशंकर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय कई स्रोतों से कमाई का मॉडल बनाया. उन्हें बांस की खेती से आय होती है, औषधीय फसलों से अलग कमाई होती है और टूरिस्ट स्पॉट व फोटोशूट से अतिरिक्त आमदनी होती है. उनकी मानें तो इस पूरे मॉडल से उन्हें हर साल करीब 7 से 8 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है.

प्रकृति संरक्षण पर भी दे रहे हैं ध्यान: कमलाशंकर ने अपने खेत को सिर्फ कमाई का जरिया नहीं बनाया बल्कि प्रकृति संरक्षण का भी केंद्र बना दिया है. यहां करीब 30 से 40 तरह के औषधीय पौधों का संरक्षण किया जा रहा है. इसके अलावा कई प्रकार की तितलियां और 25 से 30 प्रजातियों के पक्षी भी यहां देखे जा सकते हैं. यही वजह है कि यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई है.

नवाचार के लिए मिले कई सम्मान: खेती और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उनके काम की सराहना कई संस्थाओं ने की है. उन्हें कृषि वानिकी और पर्यावरण पर्यटन के क्षेत्र में नवाचार के लिए कृषक फैलो सम्मान से सम्मानित किया गया. इसके अलावा पुनर्योजी खेती के लिए प्रो. रतनलाल अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन रिजनरेटिव एग्रीकल्चर और अनसंग एवरीडे हीरोज अवॉर्ड जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं. यह दिखाता है कि उनकी मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है.

किसानों के लिए बन सकते हैं प्रेरणा: कमलाशंकर की कहानी उन किसानों के लिए बड़ी प्रेरणा है जो खेती में नई संभावनाएं तलाश रहे हैं. उन्होंने यह साबित किया कि खेती सिर्फ फसल बेचने तक सीमित नहीं है. अगर खेती को पर्यटन, प्रकृति और नए अनुभवों से जोड़ा जाए तो इससे कई गुना ज्यादा कमाई की जा सकती है. सही योजना, मेहनत और नई सोच के साथ खेती भी शानदार कारोबार बन सकती है.




