सवाल उठता है कि आखिर ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार क्यों बदल रहे हैं? तो इसकी वजह जानने के लिए पिछले 10 वर्षों के पन्ने पलटने होंगे और उस व्यवस्था को समझना होगा जो ब्रिटेन के लोकतंत्र का अंग है। दरअसल, ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करती। मतदाता संसद के निचले सदन, यानी हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी को बहुमत मिलता है, उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है।
यदि किसी पार्टी के सांसद अपने नेता पर विश्वास खो देते हैं, तो पार्टी आंतरिक चुनाव के जरिए उसे हटा सकती है। ऐसे में प्रधानमंत्री को भी पद छोड़ना पड़ता है, भले ही आम चुनाव न हुए हों।
राजनीतिक अस्थिरता की शुरुआत ‘ब्रेक्जिट रेफरेंडम’ से शुरू होती है। 2016 में तत्कालीन पीएम डेविड कैमरून ने खुद को यूरोपीय संघ में बनाए रखने के लिए जनमत संग्रह कराया। लेकिन हुआ उनकी सोच के उलट, लोगों ने ब्रिटेन के एग्जिट, यानी ब्रेक्जिट, की राह आसान कर दी। नतीजा आने के बाद कैमरून ने इस्तीफा दे दिया।




