शांति समझौते के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री की धमकी- ‘ईरान तय शर्तों से डिगा तो दोबारा हमला तय’


हेगसेथ ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर अगर ईरान अपने वादों को पूरा नहीं करता, तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान नियमों का पालन नहीं करता, तो हम फिर से एक सख्त और पूरी तरह लागू होने वाली नाकेबंदी लगाने में भी सक्षम हैं।

शांति समझौते के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री की धमकी- 'ईरान तय शर्तों से डिगा तो दोबारा हमला तय'

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अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर की चर्चा पूरी दुनिया में है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को समझौते की तय शर्तों से नहीं डिगने की चेतावनी दी है। गुरुवार को नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक में उन्होंने अमेरिका का रुख स्पष्ट किया। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर की ओर से साझा की गई क्लिप में हेगसेथ ने कहा, “अगर ईरान अपने समझौते के तहत तय शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है और नाकेबंदी भी दोबारा लागू कर सकता है।”

रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा के भीतर अगर ईरान अपने वादों को पूरा नहीं करता, तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने यह भी कहा, “अगर ईरान नियमों का पालन नहीं करता, तो हम फिर से एक सख्त और पूरी तरह लागू होने वाली नाकेबंदी लगाने में भी सक्षम हैं।”

अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरान संघर्ष के दौरान नाटो के अमेरिका से दूरी बनाने के निर्णय को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दशकों से यूरोप की रक्षा की है, लेकिन हाल के हालात में सहयोगी देशों का रवैया निराशाजनक रहा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया था कि अमेरिकी लड़ाकू विमान यूरोप के ठिकानों से उड़ान भरकर या अमेरिकी जहाज बंदरगाहों से निकलकर मध्य पूर्व में उन ईरानी ठिकानों पर हमला करेंगे, जो यूरोपीय हितों के लिए भी खतरा हैं।

हेगसेथ ने कहा, “कई सहयोगी देशों ने या तो इस पर सहमति नहीं दी, या फिर इसे जटिल कानूनी बहसों में उलझा दिया, या सार्वजनिक रूप से अमेरिका की आलोचना की जबकि वे खुद ऐसा करने में सक्षम या तैयार नहीं हैं। यह रवैया शर्मनाक है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ऐसे देशों के कारण अमेरिकी सैनिकों (हमारे बेटों और बेटियों) को जोखिम में डाला जाता है, क्योंकि वे जरूरी हवाई मार्ग और पहुंच देने से इनकार करते हैं, जबकि यह प्रक्रिया पहले से ही सहज होनी चाहिए थी।

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