US Iran Deal Effect: Petrol Prices Drop | अमेरिका-ईरान डील के बाद आई खुशखबरी, पेट्रोल के दामों में सीधे 11% की भारी गिरावट, इस देश में पहले गिरे रेट


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अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार एक अंतरिम शांति समझौत फाइनल हो गया है, जिसका सीधा और बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला है. इस समझौते के लागू होते ही इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल से नीचे गिर गई हैं, जिससे अमेरिका में पेट्रोल के दाम धड़ाम से नीचे गिर चुके हैं. पिछले कई महीनों से रिकॉर्ड तोड़ महंगाई की मार झेल रही जनता को पेट्रोल की कीमतों में सीधे 11 परसेंट की भारी राहत मिली है.

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अमेरिका में गिरे पेट्रोल के दाम

वॉशिंगटन: अमेरिका-ईरान की पीस डील फाइनल होते ही दुनिया के एक कोने से राहत भरी खबर आई है. समझौते का सीधा और जोरदार असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर देखने को मिला है और सबसे पहले अमेरिका में पेट्रोल के दाम धड़ाम से नीचे गिर गए हैं. पिछले कई महीनों से रिकॉर्ड तोड़ महंगाई की मार झेल रही वहां की जनता को सीधे 11 परसेंट की राहत मिल गई है. फरवरी में शुरू हुई जंग के बाद एक-एक करके दुनिया के लगभग सभी देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर पहुंच गए थे. हालांकि, अब मार्केट एक्सपर्ट्स का दावा है कि होर्मुज खुलते ही आने वाले दिनों में दुनिया के कई और देशों से भी ऐसी खबरें आ सकती हैं.

कितना सस्ता हुआ पेट्रोल?

ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में मची भारी उथल-पुथल के बाद महीनों से आसमान छू रही तेल की कीमतों से अब जाकर लोगों को थोड़ी सांस लेने की फुर्सत मिली है. अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के ताजा और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूरे अमेरिका में अब रेगुलर अनलेडेड गैसोलीन यानी पेट्रोल की औसत कीमत गिरकर $3.999 प्रति गैलन पर आ चुकी है. मार्च के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका में पेट्रोल के दाम $4 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसके हैं.

ये राहत अमेरिकी जनता के लिए इसलिए भी बहुत बड़ी है क्योंकि इसी साल मई के महीने में महंगाई ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे. उस समय अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत $4.50 प्रति गैलन के भी पार पहुंच गई थी, जिससे हाहाकार मच गया था. अब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल से नीचे गिर चुकी हैं, जिसके चलते पेट्रोल पंपों पर सीधे 11 परसेंट तक दाम कम हो गए हैं और जनता ने राहत की सांस ली है.

कच्चा तेल सस्ता होने के 3 बड़े कारण

  1. अमेरिकी एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड तोड़ तेजी: इस समय अमेरिका बेहद आक्रामक तरीके से रिकॉर्ड स्तर पर अपनी एनर्जी एक्सपोर्ट को बढ़ा रहा है, जिससे बाजार में तेल की किल्लत दूर हो रही है.
  2. चीन की सुस्त डिमांड: दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देश चीन से इस बार बाजार की उम्मीद के मुताबिक कच्चे तेल की मांग नहीं आई है, जिससे इंटरनेशनल मार्केट पर से दबाव काफी कम हुआ है.
  3. होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना: अमेरिका और ईरान के बीच जैसे ही तनाव कम करने का समझौता हुआ, वैसे ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल के विशाल टैंकर अब बिना किसी डर, हमले या रुकावट के आसानी से आ-जा रहे हैं.

हालांकि, बाजार के बड़े विश्लेषकों ने एक गंभीर चेतावनी भी जारी की है. उनका साफ कहना है कि भले ही कीमतों में अभी 11 परसेंट की बड़ी कटौती दिख रही हो, लेकिन ये अभी भी युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले काफी ज्यादा महंगी है. तेल की कीमतें पूरी तरह से पुराने सामान्य स्तर पर अगले साल से पहले नहीं लौटने वाली हैं.

ट्रंप को मिली संजीवनी

अमेरिका में करोड़ों लोग रोजाना दफ्तर जाने और अपने रोजमर्रा के कामों के लिए पूरी तरह से निजी वाहनों पर ही निर्भर रहते हैं. ऐसे में पेट्रोल के दाम अचानक बढ़ने से उनके घरेलू बजट का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया था. पेट्रोल के दाम बढ़ने से देश में चौतरफा महंगाई बढ़ा दी थी. इसका सीधा और घातक असर पूरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ रहा था.

अब ऐन वक्त पर कीमतों में आई इस 11 परसेंट की गिरावट के बहुत बड़े राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. इससे व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बहुत बड़ी राजनीतिक संजीवनी मिल गई है. राष्ट्रपति ट्रंप लगातार विपक्ष के सामने ये दावा कर रहे थे कि जैसे ही दोनों देशों के बीच दुश्मनी और तनाव खत्म होगा, तेल के दाम अपने आप घुटनों पर आ जाएंगे. चूंकि अमेरिका में मिडटर्म चुनाव बेहद नजदीक हैं, ऐसे में विपक्षी डेमोक्रेट्स इस पेट्रोल की महंगाई को ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ एक बड़ा और अचूक चुनावी हथियार बना रहे थे, जिस पर इस डील ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है.

अमेरिका में अभी भी तेल की कमी

तेल की इन बढ़ती कीमतों को किसी भी तरह काबू में रखने के लिए ट्रंप प्रशासन ने अपने तरकश के कई बड़े तीर चलाए थे. इसमें ‘जोन्स एक्ट’ के कड़े नियमों में अस्थाई रूप से छूट देना और अमेरिकी बाजार में तेल की भारी सप्लाई बढ़ाने के लिए अपने सबसे सुरक्षित ‘स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ से सरकारी तेल को धड़ाधड़ जारी करना शामिल था.

अब पूरी दुनिया के बड़े ट्रेडर्स और बाजार के सटोरियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका का खाली हो रहा तेल भंडार कितनी जल्दी दोबारा भरा जाता है. दरअसल, अमेरिका में इस सीजन का गैसोलीन स्टॉक पिछले 10 सालों के सबसे निचले स्तर पर चल रहा है. अगर इस सरकारी स्टॉक को जल्दी नहीं भरा गया तो आने वाले समय में पेट्रोल की कीमतों में एक बार फिर भयंकर उतार-चढ़ाव का खेल देखने को मिल सकता है.

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Utkarsha Srivastava

If world leaders are arguing, borders are shifting, or a geopolitical storm is brewing somewhere on the planet, chances are Utkarsha Srivastava is already reading and writing about it.

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