पाकिस्तान में गरीबी सात प्रतिशत बढ़ी, गरीबों की संख्या बढ़कर सात करोड़ हुई
पाकिस्तान में पिछले छह वर्षों में गरीबी सात प्रतिशत बढ़ गई है जिससे लगभग 2.7 करोड़ लोग गरीबी के दायरे में आ गए हैं और इसके साथ ही देश में कुल गरीबों की संख्या बढ़कर सात करोड़ हो गई है। देश के राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।
पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, को बृहस्पतिवार को वार्षिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया। यह प्रक्रिया संघीय बजट पेश किए जाने से पहले आर्थिक संकेतकों को साझा करने के लिए की जाती है।
इस सर्वेक्षण में सामने आया है कि वर्ष 2018-19 में गरीबी का स्तर 21.9 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गया।
सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत हो गई जबकि शहरी गरीबी 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई।
प्रांतीय स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि सभी क्षेत्रों में गरीबी में वृद्धि दर्ज की गई है।
पंजाब प्रांत में यह 16.5 प्रतिशत से बढ़कर 23.3 प्रतिशत हो गई, सिंध में 24.5 प्रतिशत से बढ़कर 32.6 प्रतिशत, खैबर पख्तूनख्वा में 28.7 प्रतिशत से बढ़कर 35.3 प्रतिशत और बलूचिस्तान में 41.8 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गई।
बलूचिस्तान में गरीबी दर सबसे अधिक दर्ज की गई, जबकि चारों प्रांतों में पंजाब में गरीबी दर सबसे कम रही।
पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण को सरकार द्वारा हर वर्ष बजट से पहले उपलब्ध कराए जाने वाले आंकड़ों का एक विश्वसनीय स्रोत माना जाता है।




