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Airtel ने अपने विवादित प्रायोरिटी पोस्टपेड सर्विस का नाम बदलकर फास्ट लेन (Fast Lane) कर दिया है. महंगे प्लान वालों को भीड़ में भी मिलेगी सुपरफास्ट 5G स्पीड, जिससे नेट न्यूट्रलिटी पर बवाल मच गया है.
एयरटेल ने ने अपनी ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सर्विस को अब ‘फास्ट लेन’ का नया नाम दे दिया है.
क्या आम, क्या खास… इंटरनेट तो सबके लिए एक बराबर होना चाहिए न? इसी तो नेट न्यूट्रलिटी कहा जाता है न! लेकिन एयरटेल के नए प्लान को देखकर तो लग रहा है कि ‘नेट न्यूट्रलिटी’ जाए तेल लेने! जी हां, कंपनी ने प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान लॉन्च किया है, जिसे अब फास्ट लेन (Fast Lane) के नाम से रीब्रांड किया जा रहा है. इस प्लान को यदि दो लाइनों में समझाएं तो
इसका मतलब इतना ही है कि ज्यादा जेब ढीली करो, महंगा प्लान लो और भीड़भाड़ वाले इलाके में भी सुपरफास्ट इंटरनेट एंजॉय करो. उस जगह पर भी इंटरनेट चलता रहेगा, जहां आम तौर पर नेटवर्क नहीं मिलता.
नेट न्यूट्रलिटी पर छिड़ी बहस
बता दें कि दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने अपने उस पोस्टपेड प्लान का नाम बदल दिया है, जिसने देश में नेट न्यूट्रलिटी (Net Neutrality) पर एक नई बहस छेड़ दी थी. नेट न्यूट्रलिटी मतलब सबको बराबर इंटरनेट मिलने के नियम. कंपनी ने अपनी इस ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सर्विस को अब ‘फास्ट लेन’ का नया नाम दे दिया है. अब एयरटेल के कई पोस्टपेड यूज़र्स के मोबाइल स्क्रीन पर नेटवर्क सिग्नल के साथ बकायदा Fast Lane लिखा हुआ दिखाई देने लगा है और कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर भी यह बदलाव कर दिया है.
इस पूरे मामले पर जब एयरटेल के प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या बवाल बढ़ता देख उन्होंने इस वीआईपी प्लान को बंद कर दिया है? तो उन्होंने साफ मना कर दिया. प्रवक्ता ने कहा कि प्लान को वापस लेने का तो सवाल ही नहीं उठता, बस हमारा लॉन्च कैंपेन खत्म हुआ है और अब हम इसे ‘फास्ट लेन’ के नाम से बुला रहे हैं, जो हमारी सर्विस को सही से बयां करता है. कंपनी का दावा है कि उनके इस प्लान को चुनने वाले और 5G फोन इस्तेमाल करने वाले पोस्टपेड ग्राहकों को हमेशा धमाकेदार स्पीड, अनलिमिटेड डेटा और बेहतरीन सर्विस मिलती रहेगी.
मगर असली पेंच यहीं फंसता है. एयरटेल इसके लिए नेटवर्क स्लाइसिंग (Network Slicing) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है. इसका मतलब यह है कि कंपनी अपने पूरे नेटवर्क का एक बड़ा और प्रीमियम हिस्सा सिर्फ महंगे पोस्टपेड ग्राहकों के लिए रिजर्व कर देगी. मिसाल के तौर पर, अगर आप किसी भारी भीड़भाड़ वाले बाजार या स्टेडियम में हैं, जहां इंटरनेट ठप हो जाता है, वहां भी इन ‘फास्ट लेन’ इंटरनेट बिना किसी रुकावट के सरपट दौड़ेगा.
एयरटेल ने क्या कहा?
हालांकि, एयरटेल का दावा है कि इस वीआईपी ट्रीटमेंट से आम प्रीपेड ग्राहकों के इंटरनेट पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा और उन्होंने इससे जुड़ा सारा डेटा रेगुलेटर (TRAI) को भी सौंप दिया है. लेकिन सरकार और संसद की स्टैंडिंग कमेटी को यह दलील हजम नहीं हो रही है.
सरकार को चिंता
बीजेपी नेता निशिकांत दुबे की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने साफ तौर पर चिंता जताई है कि कुछ कंपनियों के ऐसे प्रायोरिटी प्लान की वजह से देश के करोड़ों गरीब और आम प्रीपेड मोबाइल यूज़र्स के हक मारे जा सकते हैं, जो नेट न्यूट्रलिटी के नियमों के खिलाफ है. कमेटी ने दूरसंचार विभाग (DoT) और ट्राई से 25 दिनों के भीतर इस पर जवाब मांगा है कि क्या यह वाकई आम जनता के साथ भेदभाव है?
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मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें




