Donald Trump | Trump US News | डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट का बड़ा झटका, ग्रीन कार्ड, वर्क परमिट और नागरिकता पर रोक गैरकानूनी, भारतीयों पर क्या असर


अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को इमिग्रेशन नीति के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है. अमेरिका की एक संघीय अदालत ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन ने 39 देशों के लोगों के इमिग्रेशन लाभों से जुड़े आवेदनों पर रोक लगाकर कानून का उल्लंघन किया. रोड आइलैंड के प्रोविडेंस स्थित संघीय न्यायाधीश जॉन मैककॉनेल ने यह फैसला सुनाया. अदालत ने माना कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) ने कई देशों के आवेदकों के साथ ऐसा व्यवहार किया, जो अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों और प्रशासनिक नियमों के खिलाफ है.

यह मामला उन नीतियों से जुड़ा है, जिन्हें पिछले साल नवंबर से लागू किया गया था. इनके तहत ट्रैवल बैन सूची में शामिल 39 देशों के नागरिकों के शरण (Asylum), वर्क परमिट, ग्रीन कार्ड और नागरिकता संबंधी आवेदनों की प्रक्रिया को रोक दिया गया था. ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और अतिरिक्त जांच-पड़ताल की जरूरत को देखते हुए उठाया गया है.

जन्मस्थान की वजह से आवेदन अटकाना गलत

हालांकि अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना. जज मैककॉनेल ने कहा कि प्रभावित लोगों ने अमेरिकी कानून के तहत सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया था, लेकिन केवल उनके जन्मस्थान की वजह से उनके आवेदनों को लंबे समय तक लटकाकर रखा गया.

उन्होंने कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए. अदालत के मुताबिक USCIS ने न केवल इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन किया, बल्कि उन प्रशासनिक नियमों का भी पालन नहीं किया, जिनके तहत उसे काम करना चाहिए था.

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले में भारत का नाम ट्रैवल बैन सूची में शामिल देशों में नहीं है. इसलिए भारतीय नागरिक सीधे तौर पर इस मामले से प्रभावित नहीं होंगे. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का अप्रत्यक्ष असर भारतीय आवेदकों पर पड़ सकता है. अमेरिका में H-1B वीजा, स्टूडेंट वीजा और ग्रीन कार्ड के लिए बड़ी संख्या में भारतीय आवेदन करते हैं. अदालत के इस फैसले के बाद अमेरिकी एजेंसियों के लिए आवेदनों को अनिश्चितकाल तक रोककर रखना मुश्किल हो सकता है.

प्रवासी संगठनों ने फैसला का किया स्वागत

इस फैसले का कई प्रवासी संगठनों ने स्वागत किया है. न्यूयॉर्क इमिग्रेशन कोएलिशन के अध्यक्ष मुराद अवावदेह ने कहा कि अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी व्यक्ति के मूल देश के आधार पर उसे कानूनी इमिग्रेशन प्रक्रिया से वंचित नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने हजारों परिवारों को लंबे समय तक अनिश्चितता में रखा और वैध इमिग्रेशन प्रक्रिया को बाधित किया.

किन देशों पर लगा था ट्रैवल बैन?

ट्रंप प्रशासन ने जिन देशों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, उनमें अफगानिस्तान, ईरान, हैती, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया, यमन समेत कई अफ्रीकी और पश्चिम एशियाई देश शामिल थे.

वहीं नाइजीरिया, वेनेजुएला, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे जैसे देशों पर आंशिक प्रतिबंध लागू किया गया था.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में इमिग्रेशन नीति एक बार फिर राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनी हुई है. अदालत के इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की सख्त प्रवासन नीतियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका माना जा रहा है.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img