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Anashakti Ashram Kausani: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित कौसानी का ‘अनासक्ति आश्रम’ महात्मा गांधी की यादों और देश के स्वतंत्रता आंदोलन का एक ऐतिहासिक गवाह है. साल 1929 में महात्मा गांधी यहां 14 दिनों के लिए ठहरे थे और इसकी अद्भूत सुंदरता से प्रभावित होकर ही उन्होंने कौसानी को भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कहा था. यहां से करीब 350 किलोमीटर लंबी भव्य हिमालय पर्वतमाला और नंदा देवी जैसी चोटियों का विहंगम नजारा साफ दिखाई देता है. आज यह आश्रम इतिहास, प्रकृति और मानसिक शांति की तलाश करने वालों के लिए एक बेहतरीन ठिकाना बन चुका है.
कौसानी स्थित अनासक्ति आश्रम केवल एक धार्मिक या पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधी की स्मृतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है. वर्ष 1929 में महात्मा गांधी यहां 14 दिनों तक रुके थे. इसी प्रवास के दौरान उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के सिद्धांतों पर आधारित अपनी प्रसिद्ध पुस्तक अनासक्ति योग की रचना की थी. गांधी जी इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कौसानी को भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कहा था. आज भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटक उस कमरे को देखने पहुंचते हैं, जहां गांधी जी ठहरे थे. यह आश्रम इतिहास, आध्यात्म और प्रकृति का अनोखा संगम माना जाता है.

अनासक्ति आश्रम की सबसे बड़ी खासियत यहां का शांत और सकारात्मक वातावरण है. शहरों की भागदौड़ और शोरगुल से दूर यह स्थान मानसिक सुकून की तलाश करने वालों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. आश्रम में प्रतिदिन सुबह और शाम सर्वधर्म प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न धर्मों की शिक्षाओं और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया जाता है. यहां आने वाले लोग ध्यान, चिंतन और आत्ममंथन के लिए समय बिताते हैं. कई पर्यटक बताते हैं कि आश्रम का वातावरण उन्हें मानसिक रूप से तरोताजा कर देता है. यही वजह है कि आध्यात्मिकता में रुचि रखने वाले लोग बार-बार यहां आना पसंद करते हैं.

अनासक्ति आश्रम से दिखाई देने वाला हिमालयी दृश्य इसकी सबसे बड़ी पहचान है. यहां से करीब 350 किलोमीटर लंबी हिमालय पर्वतमाला का विहंगम नजारा देखने को मिलता है. साफ मौसम में बर्फ से ढकी कई प्रसिद्ध चोटियां स्पष्ट दिखाई देती हैं. पर्यटक घंटों तक आश्रम परिसर में बैठकर इन पर्वतों की सुंदरता को निहारते रहते हैं. खासकर सुबह की सुनहरी धूप और शाम के समय चोटियों पर पड़ने वाली लालिमा लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है. प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता है. जो कौसानी को देश के प्रमुख पर्वतीय पर्यटन स्थलों में शामिल करता है.
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आश्रम से हिमालय की कई प्रसिद्ध और ऊंची चोटियां एक साथ दिखाई देती हैं. इनमें नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंटी, चौखंबा और पंचाचूली प्रमुख हैं. ये चोटियां उत्तराखंड की प्राकृतिक पहचान मानी जाती हैं. सर्दियों और साफ मौसम के दौरान इन चोटियों का दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है. दूर-दूर से आने वाले पर्यटक इन दुर्लभ नजारों को अपने कैमरों में कैद करते हैं. पर्वतारोहण और प्रकृति अध्ययन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी यह स्थान खास महत्व रखता है. हिमालय की भव्यता और शांति का अनुभव एक साथ मिलने के कारण यह आश्रम पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना हुआ है.

अनासक्ति आश्रम परिसर में स्थित गांधी संग्रहालय पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. यहां महात्मा गांधी के जीवन, उनके विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी कई दुर्लभ तस्वीरें और दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं. संग्रहालय में आने वाले लोगों को गांधी जी के जीवन दर्शन को करीब से समझने का अवसर मिलता है. छात्र, शोधार्थी और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग यहां विशेष रूप से पहुंचते हैं. संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री न केवल प्रेरणादायक है बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण झलक भी प्रस्तुत करती है. आश्रम का यह हिस्सा लोगों को लंबे समय तक याद रहता है.

आश्रम में एक समृद्ध पुस्तकालय भी संचालित किया जाता है, जहां गांधी साहित्य, आध्यात्मिक ग्रंथों और सामाजिक विषयों से जुड़ी अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं. यहां आने वाले पर्यटक और शोधकर्ता शांत वातावरण में बैठकर अध्ययन कर सकते हैं. पुस्तकालय का उद्देश्य लोगों को गांधीवादी विचारधारा और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना है। कई विद्यार्थी और साहित्य प्रेमी यहां समय बिताना पसंद करते हैं. पुस्तकालय का वातावरण इतना शांत और प्रेरणादायक है कि लोग घंटों तक पढ़ाई और चिंतन में व्यस्त रहते हैं.

अनासक्ति आश्रम से केवल हिमालय ही नहीं, बल्कि आसपास की प्राकृतिक वादियों का भी शानदार दृश्य दिखाई देता है. यहां से सोमेश्वर घाटी, गरुड़ और बैजनाथ क्षेत्र के हरे-भरे खेत साफ नजर आते हैं. पहाड़ों के बीच फैली हरियाली और सीढ़ीनुमा खेत पर्यटकों को बेहद आकर्षित करते हैं. मानसून और सर्दियों के मौसम में यह दृश्य और भी अधिक मनमोहक हो जाता है. कई पर्यटक आश्रम परिसर में बैठकर घंटों तक इन प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हैं. प्रकृति के करीब समय बिताने और ग्रामीण जीवन की सुंदरता देखने के लिए यह स्थान बेहद उपयुक्त माना जाता है.

कौसानी का अनासक्ति आश्रम अपने शानदार सूर्योदय और सूर्यास्त दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध है. सुबह जब सूर्य की पहली किरणें हिमालय की बर्फीली चोटियों पर पड़ती हैं तो पूरा दृश्य सुनहरे रंग में बदल जाता है. वहीं शाम के समय डूबते सूरज की लालिमा पर्वतों और घाटियों को अद्भुत रूप प्रदान करती है. इन नजारों को देखने के लिए पर्यटक सुबह और शाम विशेष रूप से आश्रम परिसर में पहुंचते हैं. फोटोग्राफरों के लिए यह समय सबसे खास माना जाता है.




