QUAD: जिनपिंग से दोस्ती का वादा कर लौटे ट्रंप, इधर क्वाड की बैठक में मार्को रुबियो ने कर दी चीन की घेराबंदी


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जिनपिंग से दोस्ती का वादा कर लौटे ट्रंप, इधर क्वाड में रुबियो ने चीन को घेरा

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Marco Rubio on China: एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर रिश्तों को बेहतर बनाने की बात कह चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ क्वाड मंच पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान साफ संकेत दे रहा है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत अब भी अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है.

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ट्रंप की चीन यात्रा और जिनपिंग के साथ नरम भाषा के बावजूद अमेरिका क्वाड के जरिये चीन पर रणनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है.

दिल्ली में आयोजित क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक (QUAD Meeting) ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक राजनीति में अमेरिका का रुख चीन को लेकर फिर चर्चा में है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर रिश्तों को बेहतर बनाने की बात कह चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ क्वाड मंच पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान साफ संकेत दे रहा है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत अब भी अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है.

दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि क्वाड अब सिर्फ चर्चा का मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह साझेदारी अब जमीन पर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने भारत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का मेज़बानी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया अब ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, क्रिटिकल मिनरल्स, समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं.

रुबियो का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चीन दक्षिण चीन सागर से लेकर ताइवान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र तक अपनी आक्रामक रणनीति को लगातार आगे बढ़ा रहा है. क्वाड देशों की चिंता यह है कि चीन अपनी आर्थिक और सैन्य ताकत का इस्तेमाल क्षेत्रीय दबदबा बढ़ाने के लिए कर सकता है. यही वजह है कि क्वाड अब केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संसाधनों पर साझा तंत्र मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की चीन यात्रा और जिनपिंग के साथ नरम भाषा के बावजूद अमेरिका क्वाड के जरिये चीन पर रणनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है. दरअसल, अमेरिका एक तरफ चीन के साथ सीधे टकराव से बचना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ इंडो-पैसिफिक में अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर शक्ति संतुलन भी बनाए रखना चाहता है.

दिल्ली में हुई क्वाड बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और सप्लाई चेन को लेकर अहम घोषणाएं हो सकती हैं. माना जा रहा है कि इसका मकसद चीन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक आर्थिक नेटवर्क तैयार करना है. रुबियो ने यह भी कहा कि हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के बाद क्वाड की अहमियत और बढ़ गई है. इससे साफ है कि अमेरिका क्वाड को अब केवल एक रणनीतिक समूह नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले एक मजबूत भू-राजनीतिक मंच के तौर पर देख रहा है.

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Saad Omar

साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें

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