रूजवेल्ट हाउस: मकराना मार्बल और जालीदार कंक्रीट से बना, अमेरिकी राजदूत के इस आलीशान बंगले का क्या है इतिहास?


Roosevelt House New Delhi: दिल्ली का चाणक्यपुरी इलाका दुनिया भर के दूतावासों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां मौजूद एक इमारत ऐसी है, जिसकी वास्तुकला और इतिहास दोनों ही बेहद खास हैं. यह इमारत है ‘रूजवेल्ट हाउस’, जो भारत में अमेरिकी राजदूत का आधिकारिक निवास है. अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सम्मान में आज शनिवार को इसी ऐतिहासिक भवन में एक भव्य और औपचारिक रात्रिभोज का आयोजन किया जा रहा है.

इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम की मेजबानी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर कर रहे हैं. इस दावत में न सिर्फ स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाएंगे, बल्कि यह जगह एक बार फिर भारत और अमेरिका के बीच गहराते रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों की गवाह बनेगी.

मार्को रुबियो के डिनर में कौन-कौन होगा शामिल?

रूजवेल्ट हाउस में आयोजित होने वाले इस खास रात्रिभोज में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी जगत की नामचीन हस्तियां, नवाचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और दोनों देशों के रणनीतिक साझेदार शिरकत करेंगे. यह वही चुनिंदा समूह है, जो अमेरिका-भारत सहयोग के अगले चरण को आकार दे रहा है.

यह आयोजन व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को रेखांकित करेगा. इतनी विविध पृष्ठभूमि के लीडर्स की मौजूदगी यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भारत और अमेरिका की साझेदारी अब केवल सरकारों और फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमी, संस्थान और उद्योग जगत मिलकर इसे व्यावहारिक और जमीनी सहयोग में बदल रहे हैं.

मार्को रुबियो के स्वागत में अमेरिकी दूतावास रूजवेल्ट हाउस में एक ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी रखी गई.

28 एकड़ का साम्राज्य: क्या है रूजवेल्ट हाउस का इतिहास?

रूजवेल्ट हाउस महज एक बंगला नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक विरासत है. 28 एकड़ के विशाल और हरे-भरे परिसर में स्थित इस भवन को 1950 के दशक में विशेष रूप से अमेरिकी कूटनीतिक उपयोग के लिए निर्धारित किया गया था.

नाम के पीछे की कहानी: इस आलीशान बंगले का नाम अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति ‘फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट’ (Franklin D. Roosevelt) के सम्मान में रखा गया है. यह नाम इसलिए चुना गया क्योंकि रूजवेल्ट ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद भारत की आजादी के संघर्ष का मुखर समर्थन किया था. भारत के प्रति उनकी इसी सहानुभूति और समर्थन को अमर बनाने के लिए अमेरिकी राजदूत के निवास को उनका नाम दिया गया.

भवन का गेट

मकराना मार्बल और कंक्रीट की जाली: बेजोड़ है वास्तुकला

रूजवेल्ट हाउस की सबसे बड़ी खासियत इसका शानदार और अनूठा डिजाइन है, जिसमें अमेरिकी वास्तुकला और भारतीय निर्माण सामग्री का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

वास्तुकार: इस भवन का डिजाइन विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी वास्तुकार ‘एडवर्ड ड्यूरेल स्टोन’ (Edward Durell Stone) ने तैयार किया था. बता दें कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की ‘चांसरी इमारत’ का डिजाइन भी स्टोन ने ही तैयार किया था.

निर्माण सामग्री: इस इमारत को बनाने में भारतीय कारीगरी और पत्थरों का भरपूर इस्तेमाल हुआ है. इसकी वास्तुकला की सबसे खास विशेषता ‘हाथ से पॉलिश किए गए कंक्रीट ब्लॉकों’ से बनी खूबसूरत जालीदार संरचना है, जो इसे बाहर से एक शाही महल का लुक देती है. निर्माण में धौलपुर, आगरा और कोटा के प्रसिद्ध पत्थरों के साथ-साथ राजस्थान का विश्व प्रसिद्ध ‘मकराना संगमरमर’ भी उपयोग किया गया है.

इसके निर्माण में भारतीय कारीगरी और पत्थरों का भरपूर इस्तेमाल हुआ

1963 का वो ऐतिहासिक उद्घाटन और पंडित नेहरू की मौजूदगी

इस आलीशान बंगले का इतिहास कई सुनहरे पन्नों से भरा है. जनवरी 1963 में जब इस भवन का आधिकारिक उद्घाटन हुआ था, तब वह पल बेहद भव्य था. इस समारोह में 700 से अधिक वीवीआईपी (VVIP) मेहमान शामिल हुए थे. उस समय भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन, उपराष्ट्रपति जाकिर हुसैन और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इस समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी.

इस भवन के उद्घाटन में भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु समेत दुनिया के तमाम नेता पहुंचे थे.

रूजवेल्ट हाउस में रहने वाले पहले अमेरिकी राजदूत

जॉन केनेथ गैलब्रेथ थे. इस भवन के उद्घाटन से ठीकएक साल पहले, गैलब्रेथ ने अमेरिका की तत्कालीन प्रथम महिला जैकलीन कैनेडी को दूतावास परिसर का दौरा कराया था. वह इस इमारत के डिजाइन से इतनी अधिक प्रभावित हुईं कि अमेरिका लौटने के बाद उन्होंने वाशिंगटन डीसी में मशहूर ‘केनेडी सेंटर’ के डिजाइन के लिए वास्तुकार एडवर्ड ड्यूरेल स्टोन को ही नियुक्त कर लिया.

अंतरिक्ष यात्रियों से लेकर नोबेल विजेताओं तक

रूजवेल्ट हाउस केवल कूटनीतिक बैठकों का केंद्र नहीं रहा है, बल्कि यह कला, विज्ञान और संस्कृति के दिग्गजों की मेजबानी के लिए भी जाना जाता है. वर्षों से इस भवन ने राजनीतिक नेताओं के अलावा अंतरिक्ष यात्रियों, कलाकारों, वैज्ञानिकों और लेखकों का भी स्वागत किया है.

यहां आने वाले प्रमुख और ऐतिहासिक अतिथि:

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
  • पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जॉन ग्लेन
  • अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा
  • महान सितार वादक पंडित रवि शंकर
  • प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन (MF Husain)
  • नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर

नई दिल्ली स्थित ‘रूजवेल्ट हाउस’ का डिजाइन किस मशहूर वास्तुकार ने तैयार किया था?
रूजवेल्ट हाउस का डिजाइन प्रसिद्ध अमेरिकी वास्तुकार ‘एडवर्ड ड्यूरेल स्टोन’ ने तैयार किया था.

भारत में अमेरिकी राजदूत के निवास का नाम ‘रूजवेल्ट हाउस’ क्यों रखा गया?
इस भवन का नाम अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के नाम पर रखा गया है, क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत की आजादी के संघर्ष का मजबूत समर्थन किया था.

रूजवेल्ट हाउस के निर्माण में किन खास भारतीय पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है?
इस ऐतिहासिक इमारत के निर्माण में धौलपुर, आगरा और कोटा के पत्थरों के साथ-साथ राजस्थान के प्रसिद्ध मकराना संगमरमर का उपयोग किया गया है.

रूजवेल्ट हाउस में रहने वाले पहले अमेरिकी राजदूत कौन थे?
रूजवेल्ट हाउस में निवास करने वाले पहले अमेरिकी राजदूत ‘जॉन केनेथ गैलब्रेथ’ थे.



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