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Linguda benefits : लिंगुडे की सब्जी पहाड़ों की जान है. दिखने में यह मुड़े हुए कीड़े की तरह नजर आता है. इसे भी लोग अपने-अपने तरीके से बनाते हैं. सिर्फ 4 महीने मिलने वाली यह सब्जी फाइबर, प्रोटीन और विटामिन का भंडार है. इसमें फैटी एसिड होते हैं, लेकिन यह वजन बढ़ने नहीं देता है. पिछले दिनों उत्तराखंड घूमने आईं बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान भी इसका स्वाद लेती देखी गईं. लोकल 18 से देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि लिंगुड़ा सेहत के लिए खजाने से कम नहीं.
देहरादून. उत्तराखंड का खानपान रहन-सहन बेहद अलग है. हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान उत्तराखंड घूमने आई थीं. उन्होंने यहां पहाड़ों का स्वाद भी लिया. पहाड़ी थाली खाई, जिसमें मंडुवे की रोटी, दाल और लिंगुडे की सब्जी भी थी. लिंगुड उगाया नहीं जाता है. यह जंगलों में कुदरती रूप में खुद उगता है. दिखने में यह मुड़े हुए कीड़े की तरह नजर आता है. इसे भी लोग अपने-अपने तरीके से बनाते हैं. कोई इसे सालन में मसालेदार बनाता हैं तो कोई इसकी भाजी तैयार करता है. सिर्फ 4 महीने मिलने वाली यह सब्जी फाइबर, प्रोटीन और विटामिन का भंडार है. इसमें फैटी एसिड होते हैं, लेकिन यह वजन बढ़ने नहीं देता है. ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करता है. देहरादून के बाजारों में यह इन दिनों काफी महंगी बेचा जा रहा है क्योंकि यह पहाड़ से मंगवाया जाता है.
प्योर…नेचुलर गिफ्ट
लोकल 18 से देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि लिंगुड़े को सेहत का खजाना इसलिए माना जाता है क्योंकि यह फाइबर, प्रोटीन और विटामिन का भंडार है. इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. फैटी एसिड होने के बावजूद यह वजन घटाने में भी मददगार है. इसके रेगुलर यूज से ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है, जिससे यह डायबिटीज के रोगियों के लिए भी बेस्ट है. लिंगुड़ा को उगाया नहीं जाता है बल्कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से जंगलों में पाया जाता है. उत्तराखंड के ठंडे इलाकों और गधेरों के नजदीक यह खुद-ब-खुद उगता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका घुमावदार आकार है, जो पहली नजर में किसी मुड़े हुए कीड़े या स्प्रिंग जैसा दिखाई देता है. प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जंगलों से मिलने वाला एक प्योर और नेचुरल गिफ्ट है.
इसका अचार भी लाजवाब
पहाड़ की वादियों में छिपे खान-पान के खजानों में शामिल लिंगुड़ा सिर्फ उत्तराखंड के लोगों को ही पसंद नहीं आता है, बल्कि जो लोग देहरादून घूमने के लिए आते हैं इसकी सब्जी बड़े चाव के साथ खाते हैं. यह सिर्फ 4 महीने ही मिलता है. लोग इसे आचार के रूप में संरक्षित करके रखते हैं. इसकी सब्जी ही नहीं इसका अचार भी बेहद स्वादिष्ट है. कुछ लोग इसे कम मसालों के साथ सूखी भाजी के रूप में बनाना पसंद करते हैं, ताकि इसका प्राकृतिक स्वाद बना रहे. कुछ इसे तरीदार या मसालेदार सालन की तरह तैयार करते हैं. लोहे की कड़ाही में जखिया मारकर बनाई गई यह सब्जी मंडुवे की रोटी के साथ बेहतरीन स्वाद देती है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें





