Last Updated:
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वेटिकन सिटी पहुंचकर पोप लियो XIV से मुलाकात की, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पोप के बीच हालिया कड़वाहट को दूर करने की एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. अपोस्टोलिक पैलेस में हुई यह बैठक 30 मिनट से कहीं अधिक लंबी चली, जिसके कारण पोप को अपने अगले कार्यक्रमों में 40 मिनट की देरी हुई और इस दौरान मध्य पूर्व संकट व मानवाधिकारों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई.
रूबियो-पोप लियो मीटिंग
वेटिकन सिटी: अमेरिका और वेटिकन के बीच तनाव और कड़वाहट को कम करने के लिए विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बड़ा कूटनीतिक मोर्चा संभाला है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में पोप के खिलाफ की गई तीखी बयानबाजी के बाद, रूबियो शांतिदूत बनकर वेटिकन सिटी पहुंचे. उनकी इस मुलाकात का असर ऐसा रहा कि पोप लियो XIV न केवल प्रभावित हुए, बल्कि रूबियो के साथ उनकी चर्चा इतनी लंबी खिंच गई कि वेटिकन का पूरा शेड्यूल ही बदल गया.
रूबियो से मीटिंग के लिए पोप ने बदला शेड्यूल
पोप लियो XIV से अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मुलाकात की. 30 मिनट तक हुई बैठक में मिडिल ईस्ट संघर्ष को लेकर बात हुई. अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी जानकारी दी. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इस मुलाकात को लेकर एक छोटा सा बयान जारी किया. जिसके अनुसार, बैठक में मध्य पूर्व की स्थिति और पश्चिमी गोलार्ध से जुड़े साझा मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात अमेरिका और होली सी के बीच मजबूत संबंधों, शांति और मानव गरिमा को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
वेटिकन की ओर से जारी तस्वीरों में पोप लियो और रुबियो को अपोस्टोलिक पैलेस में हाथ मिलाते और बातचीत करते देखा जा सकता है. बताया गया कि बैठक तय समय से लंबी चली, जिसके कारण पोप अपने अगले कार्यक्रम में करीब 40 मिनट देरी से पहुंचे.
ट्रंप और पोप लियो के बीच बवाल
अमेरिका के पहले पोप बने लियो XIV हाल के महीनों में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर रुख और ट्रंप प्रशासन की कड़ी इमीग्रेशन नीतियों के आलोचक रहे हैं. इसी वजह से ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक रूप से पोप के खिलाफ टिप्पणी की है.
सोमवार को ही ट्रंप ने दावा किया था कि पोप मानते हैं कि ईरान को परमाणु हथियार मिलना ठीक है. ट्रंप ने यह भी कहा था कि पोप ‘कई कैथोलिक्स को खतरे में डाल रहे हैं’. हालांकि, पोप लियो ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चर्च का मिशन शांति का संदेश देना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कैथोलिक चर्च लंबे समय से परमाणु हथियारों का विरोध करता आया है.
पोप ने कहा, ‘चर्च का काम सुसमाचार और शांति का प्रचार करना है. परमाणु हथियारों के खिलाफ चर्च का रुख वर्षों से स्पष्ट रहा है’. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी पोप से मुलाकात की. बैठक के बाद टस्क ने कहा कि दुनिया को अराजकता से बचाने के लिए अच्छे इरादों वाले देशों और नेताओं को एकजुट होकर काम करना होगा.
About the Author

Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of News18 Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें





