Who is Arman Khan: Anti Nation Article| कौन है अरमान खान भारत की रोटी खाकर उगल रहा जहर दूतावास ने लताड़ा बहस करो बकवास नहीं


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Who Is Arman Khan Wrote Anti-India Article: इस वक्त मुंबई के पत्रकार अरमान खान का एक आर्टिकल चर्चा का विषय बना हुआ है. इसमें उन्होंने अपने ही देश के खिलाफ जहर उगला है, जिसे लेकर अब अमेरिका में भारत के राजदूत विनय कुमार क्वात्रा ने उन्हें पाठ पढ़ाया है कि एक स्वस्थ बहस और पक्षपातपूर्ण नजरिये में फर्क होता है.

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अरमान खान. (Instagram)

मुंबई के पत्रकार अरमान खान जिस देश की रोटी खाते हैं, उसी को दुनिया में बदनाम करते हैं. देश के खिलाफ उन्होंने 1 मई 2026 को न्यूयॉर्क टाइम्स में एक ओपिनियन आर्टिकल के नाम पर जो जहर उगला, अब वो उसे लेकर घिरते हुए नजर आ रहे हैं. उन्होंने इस लेख में ऐसी देश विरोधी बातें लिखीं, जो पीएम मोदी ही नहीं भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली हैं. भारत सरकार की ओर से इस लेख पर तीखी प्रतिक्रिया आई है. उनके इस लेख से देश की गलत छवि प्रस्तुत होती है, ऐसे में अब अमेरिका में भारतीय राजनयिक ने अरमान खान को लताड़ा है. उन्होंने स्वस्थ बहस का हमेशा स्वागत है लेकिन पक्षपाती नजरिये को सही नहीं माना जा सकता.

आपको बता दें कि इस लेख में अरमान खान ने IT एक्ट 2000 को लेकर दावा किया कि सरकार बार-बार इसका इस्तेमाल कर रही है और नए संशोधन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूरी पोस्ट या अकाउंट हटाने की व्यापक शक्ति देंगे. इससे प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी, जो सेल्फ सेंसशिप को बढ़ावा देगा. उन्होंने इसे लोकतंत्रों के लिए खतरनाक मॉडल बताया. अब अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस पर जवाब दिया है.

भारत सरकार ने क्या दिया जवाब?

विनय कुमार क्वात्रा ने कहा कि IT नियमों के तहत वायरल गल जानकारी और भारतीय समाज को संभावित नुकसान से बचाने के प्रयासों को ‘सेंसरशिप’ कहना लोगों का ध्यान तो खींच सकता है, लेकिन यह एक आलसी तर्क है. क्वात्रा ने जोर दिया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां लिखित संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका, जीवंत मीडिया और अधिकार-आधारित मुकदमेबाजी की लंबी परंपरा है. उन्होंने लेख को स्वतंत्र अभिव्यक्ति बनाम सेंसरशिप की गलत फ्रेमिंग बताया और कहा कि मुद्दा असल में प्लेटफॉर्म जवाबदेही का है. सरकार का प्रयास सिर्फ जिम्मेदार डिजिटल स्पेस बनाने का है, न कि अभिव्यक्ति को दबाने का. उन्होंने संतुलित बहस का स्वागत किया, लेकिन पक्षपाती दृष्टिकोण को रचनात्मक नहीं माना.





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