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पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्ध में केवल यूएस ने ही ईरान को नुकसान नहीं पहुंचाया है, ईरान में भी अमेरिका को खूब नाकों चने चबवाए हैं. एनबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने 11 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर लगभग 5 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया है. इसमें कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में मौजूद बेस शामिल हैं. पूरी जानकारी के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट…
ईरान ने अमेरिकी बेस पर अटैक करके काफी US को काफी नुकसान पहुंचाया है. (Image – AI Generated)
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच एक बड़ी तस्वीर उभरकर सामने आई है, वह अमेरिका के लिए सिरदर्द से कम नहीं. एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान (Iran) के हमलों ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. यह नुकसान इतना ज्यादा है कि इसकी भरपाई करने में अमेरिका के अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं. खास बात यह है कि जितना नुकसान अमेरिका ने दुनिया के सामने माना था, असलियत में तबाही उससे कहीं ज्यादा बड़ी है.
एनबीसी न्यूज़ (NBC News) की एक रिपोर्ट में छह बड़े अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ईरान ने पश्चिम एशिया के सात देशों में फैले कम से कम 11 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कुल 100 अलग-अलग ठिकानों पर हमला किया. शुरुआती अनुमान बताते हैं कि इन ठिकानों की मरम्मत में करीब 5 अरब डॉलर (लगभग 41,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) का खर्च आएगा. चौंकाने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम खर्च में रडार सिस्टम, महंगे हथियार और तबाह हुए विमानों की मरम्मत का खर्च शामिल नहीं है. अगर उन्हें भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा बहुत ऊपर चला जाएगा.
पुराने लड़ाकू विमान ने अमेरिकी सुरक्षा को दी मात
एक घटना ने सबको हैरान कर दिया है. युद्ध की शुरुआत में ईरान के एक पुराने एफ-5 फाइटर जेट (F-5 fighter jet) ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी बेस कैंप ब्यूरिंग (Camp Buehring) पर बमबारी की. यह जेट 1960 के दशक का है. यह पहली बार था जब किसी दुश्मन देश के विमान ने अमेरिकी बेस के सुरक्षा घेरे को तोड़कर सीधे हमला किया और सुरक्षित वापस भी लौट गया. इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अल धफरा एयर बेस (Al Dhafra Air Base) और अल रुवैस (Al Ruwais) सैन्य ठिकाने पर भी ईरान ने हमला किया. यहां ईंधन रखने की जगह, मेडिकल क्लिनिक, विमान खड़े करने वाले हैंगर और सैनिकों के रहने की जगह को भारी नुकसान पहुंचा है.
कहां-कहां हुए हमले?
ईरान ने सात देशों जैसे कि कुवैत (Kuwait), सऊदी अरब (Saudi Arabia), संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन (Jordan) और बहरीन (Bahrain) में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया. वहां अमेरिकी सेना के जो वायुसेना (Air Force), नौसेना (Navy) और थल सेना (Army) के ठिकाने हैं, उन्हें सटीकता से निशाना बनाया गया.
ईरान के निशाने पर सिर्फ कुवैत या यूएई ही नहीं थे, बल्कि उसने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस (Prince Sultan Air Base), जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयर बेस (Muwaffaq Salti Air Base) और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Navy Fifth Fleet) के मुख्यालय को भी निशाना बनाया. अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ नौसेना मुख्यालय की मरम्मत में ही 200 मिलियन डॉलर खर्च हो सकते हैं. इन हमलों में अमेरिका के बेहद महंगे उपकरण भी तबाह हुए हैं, जिनमें एक ई-3 अवाक्स (US E-3 AWACS) विमान, 12 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन (12 MQ-9 Reaper drones), दो केसी-135 टैंकर और नौसेना का एक एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन शामिल है. आने वाले समय में इन ठिकानों को फिर से खड़ा करना अमेरिका के लिए एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक चुनौती साबित होने वाला है.
तबाह हुए कीमती हथियार
इस हमले में अमेरिका ने अपने कौन से महंगे उपकरण खो दिए हैं:
- 12 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन (12 MQ-9 Reaper drones): ये दुनिया के सबसे खतरनाक जासूसी और हमलावर ड्रोन माने जाते हैं.
- 2 एमसी-130 टैंकर (2 MC-130 tankers): ये विमान हवा में ही दूसरे विमानों में ईंधन भरने का काम करते हैं.
- यूएस ई-3 अवाक्स (US E-3 AWACS): यह एक उड़ता हुआ रडार सिस्टम है जो युद्ध की निगरानी करता है.
- यूएस नेवी एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन (US Navy MQ-4C Triton drone): समुद्र की निगरानी करने वाला बेहद आधुनिक ड्रोन.
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मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें





