उन्होंने कहा कि इस तरह के उपायों और धमकी भरे बयानों ने कूटनीतिक प्रयासों को लेकर यूएस की मंशा के प्रति सशंकित कर दिया है।
बातचीत में खाड़ी देशों का भी जिक्र हुआ। पड़ोसियों संग रिश्ते सहज करने पर चर्चा हुई। पेजेश्कियन ने कहा कि “ईरान आपसी सम्मान के आधार” पर फारस की खाड़ी के दक्षिणी किनारे के देशों सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बनाने और उन्हें मजबूत करने के लिए तैयार है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि “ये देश बाहरी दखल के बिना, इलाके में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे।”
ये बातचीत ऐसे दौर में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित संघर्ष विराम को लेकर वार्ता ठप पड़ गई है। दरअसल, ईरान से बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने वाले अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर का दौरा रद्द हो गया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, ” मैंने अपने दूतों को पाकिस्तान न जाने का निर्देश दिया है। यात्रा में बहुत समय लगता है। 18 घंटे समय बर्बाद कर बेकार की बातें करने नहीं जाना। अगर ईरान बात करना चाहता है तो उन्हें बस एक फोन करना है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ईरान के साथ फिर से जंग शुरू करेगा। इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
यह दूसरी बार है जब दोनों देशों की बैठक टली। इससे पहले ईरान ने शांति वार्ता न करने का ऐलान किया था। उसका कहना था कि पहले अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से नाकेबंदी हटाए, तब ही बातचीत संभव हो पाएगी।





