ईरान जंग के बीच चीन को घर में घुसकर मारने की तैयारी में अमेरिका – America next generation carrier based advanced super fighter jet china attack


होमदुनियाचीन

चीन को घर में घुसकर मारने की तैयारी में अमेरिका, बना रहा सुपर फाइटर जेट

Last Updated:

Next Generation Fighter Jet: 21वीं सदी डिफेंस सेक्‍टर के लिए अभी तक काफी उथल-पुथल वाला रहा है. सदी की शुरुआत में अमेरिका के वर्ल्‍ड ट्रेड टॉवर पर आतंकवादी हमले ने पूरी दुनिया को स्‍तब्‍ध कर दिया. इसके बाद अमेरिका की तत्‍कालीन जॉर्ज डब्‍ल्‍यू बुश (जूनियर) सरकार ने अफगानिस्‍तान और इराक पर हमला बोल दिया. अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में सालों तक युद्ध में उलझी रही. इसके बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हो गया. अभी यह सशस्‍त्र संघर्ष खत्‍म भी नहीं हुआ था कि पश्चिम एशिया में एक और जंग छिड़ गई. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्‍त रूप से ईरान पर अटैक कर दिया. इससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया. अब अमेरिका और चीन के बीच युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है. चीन की नेवी की बढ़ती ताकत के बीच अमेरिका अब विमानवाहक पोत से उड़ान भरने में सक्षम सुपर फाइटर जेट डेवलप कर रहा है. इसका उद्देश्‍य इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन के बढ़ते कदम को रोकना है. (सभी तस्‍वीरें: Reuters)

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य संतुलन की दिशा तय करने वाली एक अहम प्रतिस्पर्धा अब अमेरिकी नौसेना के अगली पीढ़ी के कैरियर बेस्‍ड लड़ाकू विमान F/A-XX के इर्द-गिर्द केंद्रित होती दिख रही है. यह परियोजना केवल एक नए फाइटर जेट के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात की परीक्षा भी है कि अमेरिका और चीन में से कौन विमानवाहक पोत (aircraft carrier) को भविष्य में प्रभावी सैन्य शक्ति, निरोधक क्षमता (deterrence) और रणनीतिक प्रभाव के साधन के रूप में बनाए रख सकता है. अमेरिकी नौसेना प्रमुख एडमिरल डैरिल कॉडल ने हाल ही में संकेत दिया कि F/A-XX कार्यक्रम के लिए अगस्त में निर्माता का चयन किया जाएगा. इस बहुचर्चित प्रोजेक्ट में बोइंग और नॉर्थरोप ग्रुमैन जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. यह विमान 2030 के दशक में मौजूदा F/A-18 सुपर हॉर्नेट की जगह लेगा और इसे ऐसे समय में विकसित किया जा रहा है जब चीन की सैन्य क्षमताएं, खासकर समुद्री क्षेत्र में, तेजी से बढ़ रही हैं.

Next Gen Jet

इंडो-पैसिफिक का युद्धक्षेत्र अब पहले से कहीं अधिक जटिल हो गया है. चीन ने एंटी-एक्सेस/एरिया-डिनायल (A2/AD) क्षमताओं के जरिए ऐसी व्यवस्था विकसित की है जो दुश्मन के युद्धपोतों और विमानों की पहुंच को सीमित कर सके. इस चुनौती का सामना करने के लिए F/A-XX को अधिक दूरी, बेहतर स्टील्थ तकनीक और मानव रहित प्रणालियों (unmanned systems) के साथ समन्वय की क्षमता से लैस किया जा रहा है. यह विमान केवल एक प्लेटफॉर्म नहीं होगा, बल्कि एक नेटवर्क्ड सिस्टम का हिस्सा होगा, जिसमें F-35 जैसे स्टील्थ फाइटर और MQ-25 जैसे ड्रोन टैंकर शामिल होंगे. इस तरह अमेरिकी नौसेना भविष्य के युद्ध में किल वेब यानी सेंसर, शूटर और कमांड सिस्टम के आपसी जुड़ाव के जरिए बढ़त बनाए रखना चाहती है.

Next Gen Jet

दूसरी ओर, चीन भी तेजी से अपने कैरियर बेस्‍ड एरियल फ्लीट को मजबूत कर रहा है. उसके नवीनतम विमानवाहक पोत फुजियान पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम (EMALS) का सफल परीक्षण एक बड़ी तकनीकी छलांग माना जा रहा है. इसके साथ ही J-35 स्टील्थ फाइटर, J-15T और KJ-600 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग विमान का संयोजन चीन को एक अधिक सक्षम कैरियर इकोसिस्टम की ओर ले जा रहा है. KJ-600 कोफ्लाइंग आईज और ब्रेन के रूप में देखा जाता है, जो युद्ध के दौरान बेहतर निगरानी और कमांड कंट्रोल सुनिश्चित करता है. हालांकि, चीन की यह प्रणाली अभी पूरी तरह से परिचालन (operational) नहीं मानी जा रही है. तकनीकी विश्वसनीयता, पायलट प्रशिक्षण और डेटा वैलिडेशन जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

Next Gen Jet

अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिचालन रणनीति (operational doctrine) का भी मुकाबला है. अमेरिका डिस्ट्रिब्यूटेड मैरीटाइम ऑपरेशंस (DMO) और जॉइंट ऑल-डोमेन कमांड एंड कंट्रोल (JADC2) जैसे कॉन्सेप्ट पर काम कर रहा है, जिससे युद्ध के दौरान भी नेटवर्क और कमांड सिस्टम सक्रिय रह सकें, भले ही संचार बाधित हो जाए. इसके विपरीत चीन अपने बेड़े के बेहतर समन्वय और दोहरे विमानवाहक पोत (dual-carrier operations) के जरिए पावर प्रोजेक्‍शन बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को अभी भी संयुक्त सैन्य संचालन और लंबी दूरी पर लॉजिस्टिक सपोर्ट में सुधार की जरूरत है.

Next Gen Jet

भविष्य के युद्ध में जीत केवल बेहतर हथियारों से तय नहीं होगी, बल्कि इस बात से तय होगी कि कौन सा देश अपने पूरे युद्ध तंत्र को दबाव में भी सक्रिय रख सकता है. यानी असली मुकाबला सस्टेनेबिलिटी और रिजिलिएंस का है. अमेरिका का जोर इस बात पर है कि वह अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को नेटवर्क आधारित और लचीला बनाए, ताकि दुश्मन के हमलों के बावजूद ऑपरेशन जारी रह सके. वहीं चीन अपनी क्षेत्रीय पकड़ मजबूत करने और प्रतीकात्मक शक्ति प्रदर्शन के जरिए प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है.

Next Gen Jet

रणनीतिक स्तर पर यह प्रतिस्पर्धा इस सवाल पर आकर टिकती है कि क्या विमानवाहक पोत भविष्य में भी उतने ही प्रभावी रहेंगे जितने वे पिछले दशकों में रहे हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चीन का कैरियर कार्यक्रम मुख्य रूप से क्षेत्रीय प्रभाव और दबाव बनाने के लिए है, न कि सीधे अमेरिका से टकराव के लिए. दूसरी ओर, अमेरिका का इतिहास बताता है कि उसने हमेशा नई तकनीकों और रणनीतियों के प्रयोग के जरिए अपनी नौसैनिक श्रेष्ठता बनाए रखी है. F/A-XX इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जहां कई विकल्पों को परखा जाएगा और सबसे प्रभावी मॉडल को अपनाया जाएगा.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img