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आज के डिजिटल दौर में ठगों ने चोरी का नया तरीका खोज लिया है जिसे ‘एआई फिशिंग’ कहा जाता है. इसमें एआई की मदद से ऐसे फर्जी मैसेज तैयार किए जाते हैं जिन्हें पहचानना नामुमकिन सा लगता है. ये ठग बैंक अधिकारी या नामी ब्रांड बनकर आपको शिकार बनाते हैं. जानिए एआई फिशिंग से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी और खुद को सुरक्षित रखने के आसान तरीके.

इन दिनों ठग भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं.
आजकल इंटरनेट की दुनिया में ठगी करने वाले यानी स्कैमर्स नए-नए तरीके अपना रहे हैं. इन्हीं में से एक तरीका है एआई फिशिंग (AI Phishing). दरअसल, यह धोखाधड़ी का एक ऐसा जाल है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके आपको फर्जी मैसेज भेजे जाते हैं. ये मैसेज इतने असली लगते हैं कि एक आम इंसान के लिए असली और नकली में फर्क करना बहुत मुश्किल हो जाता है. ठग अक्सर नामी कंपनियों, बैंकों या मशहूर हस्तियों के नाम का सहारा लेकर लोगों को अपनी बातों में फंसाते हैं और उनकी मेहनत की कमाई लूट लेते हैं.
पुराने जमाने में जो ठगी के मैसेज आते थे, उन्हें पहचानना आसान होता था क्योंकि उनमें स्पेलिंग की गलतियां या व्याकरण (Grammar) की कमियां होती थीं. लेकिन अब एआई फिशिंग के मैसेज बहुत ही सटीक और बिना किसी गलती के लिखे होते हैं. ठग एआई का इस्तेमाल सिर्फ भाषा सुधारने के लिए ही नहीं करते, बल्कि वे आपकी पसंद और नापसंद के हिसाब से पर्सनल मैसेज भी तैयार करते हैं. वे इंटरनेट पर मौजूद आपकी जानकारी, जैसे सोशल मीडिया प्रोफाइल या पुरानी किसी डेटा चोरी से मिली जानकारियों का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद एआई के जरिए वे एक साथ हजारों लोगों को ऐसे मैसेज भेज सकते हैं जो बिल्कुल उन्हें ध्यान में रखकर लिखे गए लगते हैं. ये मैसेज आपको ईमेल, सोशल मीडिया या साधारण मैसेज के जरिए मिल सकते हैं.
ठगी के संकेतों को पहचानें
किसी भी मैसेज को देखकर सबसे पहले यह गौर करें कि क्या वह आप पर कोई काम तुरंत करने का दबाव बना रहा है? अक्सर ये मैसेज ऐसी भाषा में होते हैं जिससे आपको लगे कि अगर अभी कुछ नहीं किया तो नुकसान हो जाएगा. जैसे, आपको नकली बैंक अलर्ट मिल सकता है कि “आपके खाते में कुछ संदिग्ध गतिविधि हुई है, इसे ठीक करने के लिए तुरंत अपनी जानकारी भरें.”
इसके अलावा, ये ठग रोजमर्रा की सेवाओं की नकल भी करते हैं, जैसे कोरियर कंपनी का मैसेज कि “आपका पार्सल रुक गया है, उसे छुड़ाने के लिए छोटी सी फीस दें.” अगर कोई आपसे पेमेंट की जानकारी बदलने को कहे, कोई अनजान फाइल डाउनलोड करने को बोले या किसी दूसरी वेबसाइट पर जाने का दबाव बनाए, तो समझ लीजिए कि यह खतरे की घंटी है.
खुद को सुरक्षित कैसे रखें
अगर आपको किसी मैसेज पर शक हो, तो घबराएं नहीं और न ही उस पर दिए गए किसी लिंक पर क्लिक करें. सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप खुद उस कंपनी या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या उनके असली कस्टमर केयर नंबर पर फोन करके सच्चाई जानें. अगर आपको लगता है कि आप ठगी का शिकार हो गए हैं, तो सबसे पहले अपने बैंक और ईमेल के पासवर्ड बदलें. जिस प्लेटफॉर्म पर आपको शक है, वहां ठग से बात करना बंद कर दें और सबूत के तौर पर स्क्रीनशॉट ले लें. याद रखें, सावधानी ही आपको ऑनलाइन ठगी से बचा सकती है.





