रोमन टेलीस्कोप: $4 अरब की जादुई दूरबीन, हबल से 100 गुना ज्यादा ताकतवर, 15 लाख किलोमीटर दूर जाकर क्या करेगी?


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NASA Roman Space Telescope: नासा ने ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने के लिए ‘नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ पेश किया है. यह टेलीस्कोप हबल से 100 गुना ज्यादा बड़ा व्यू एरिया रखता है. यह डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और सौर मंडल के बाहर नए ग्रहों की खोज करेगा. इसे 4 अरब डॉलर की लागत से तैयार किया गया है. यह एल2 पॉइंट से अंतरिक्ष की अद्भुत तस्वीरें और डेटा भेजेगा.

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हबल से 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली, 4 अरब डॉलर का टेलीस्कोप खोलेगा डार्क मैटर के राज. (Photo : NASA)

वाशिंगटन: नासा ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक नया अध्याय शुरू किया है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ का अनावरण कर दुनिया को चौंका दिया है. यह कोई साधारण दूरबीन नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड के उन कोनों को झांकने का जरिया है जिन्हें अब तक नहीं देखा गया. यह टेलीस्कोप मुख्य रूप से डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और सौर मंडल के बाहर मौजूद एक्सोप्लैनेट की तलाश करेगा. मैरीलैंड के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में इसकी घोषणा करते हुए नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने इसे भविष्य का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बताया है. उनके अनुसार, यह टेलीस्कोप पृथ्वी को ब्रह्मांड का एक ऐसा डिजिटल नक्शा देगा, जो पहले कभी संभव नहीं था. इसे इसी साल सितंबर में स्पेसएक्स के रॉकेट से लॉन्च करने की तैयारी है.

क्यों खास है नैंसी ग्रेस रोमन टेलीस्कोप का डिजाइन?

यह टेलीस्कोप करीब 12 मीटर लंबा है और सिल्वर रंग की चमक के साथ तैयार किया गया है. इसमें बिजली की आपूर्ति के लिए विशाल सोलर पैनल लगाए गए हैं. इसका नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री नैन्सी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है. उन्हें ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप की मां’ के रूप में जाना जाता है.

रोमन टेलीस्कोप की सबसे बड़ी खासियत इसका विजन एरिया है. यह हबल टेलीस्कोप की तुलना में 100 गुना अधिक एरिया को एक बार में कवर कर सकता है. इसका मतलब है कि यह कम समय में ब्रह्मांड के बहुत बड़े हिस्से की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें ले सकेगा.

डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के रहस्य कैसे सुलझेंगे?

  • ब्रह्मांड का एक बड़ा हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से बना है, जो अभी तक वैज्ञानिकों के लिए पहेली है. रोमन टेलीस्कोप अपने जीवनकाल में करीब एक अरब आकाशगंगाओं की रोशनी को मापेगा.
  • यह टेलीस्कोप तारों की तेज रोशनी को ब्लॉक करने की क्षमता रखता है. इससे यह सीधे उन ग्रहों को देख पाएगा जो किसी तारे के चारों ओर घूम रहे हैं.
  • यह हमारी गैलेक्सी में ग्रहों की संख्या और उनके प्रकार का एक सटीक डेटाबेस तैयार करेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे डार्क एनर्जी के विस्तार और व्यवहार को समझने में बड़ी कामयाबी मिलेगी.
अंतरिक्ष में नासा की तीसरी आंख: डार्क मैटर और एलियंस की दुनिया का चलेगा पता! (Photo : NASA)

एल2 पॉइंट और 11 टेराबाइट डेटा का गणित क्या है?

रोमन टेलीस्कोप को पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर ‘एल2’ यानी लाग्रांज पॉइंट पर तैनात किया जाएगा. यह अंतरिक्ष में एक ऐसा स्थान है जहां पृथ्वी और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित रहता है. यहां टेलीस्कोप को तापमान में स्थिरता मिलेगी और यह बिना हिले-डुले सटीक डेटा जुटा सकेगा.

सिस्टम इंजीनियर मार्क मेल्टन के मुताबिक, यह टेलीस्कोप हर दिन करीब 11 टेराबाइट डेटा पृथ्वी पर भेजेगा. यह डेटा हबल टेलीस्कोप के मुकाबले 10 गुना ज्यादा बेहतर क्वालिटी का होगा. 4 अरब डॉलर की लागत से बना यह प्रोजेक्ट एलियंस की दुनिया और ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़े कई सवालों के जवाब दे सकता है.

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दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें





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