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भारतीय किचन में इस्तेमाल होने वाला काला नमक सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक औषधि की तरह भी काम करता है. आयुर्वेद में इसे ‘सौवर्चला लवण’ कहा गया है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और गैस, अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. सही मात्रा में इसका सेवन सेहत के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकता है.
भारतीय रसोई में काला नमक एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसका उपयोग सदियों से होता चला आ रहा है. यह सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेद में काले नमक को ‘सौवर्चला लवण’ कहा गया है, जो अपने विशेष औषधीय गुणों के कारण साधारण नमक से अधिक उपयोगी माना जाता है.

आयुर्वेद के डॉक्टर पल्लव प्रजापति ने लोकल 18 से बताया कि इसका स्वाद हल्का खट्टा-नमकीन और सुगंध विशिष्ट होती है, जो किसी भी व्यंजन को अलग पहचान देती है. आज के समय में गलत खान-पान और अनियमित जीवनशैली के कारण पाचन संबंधी समस्याएं जैसे गैस, अपच, पेट फूलना और कब्ज आम हो गई हैं, ऐसे में काला नमक एक प्राकृतिक उपचार के रूप में काफी कारगर साबित होता है. इसकी तासीर गर्म होती है और यह पाचन क्रिया को तेज करने में मदद करता है.

उन्होंने बताया कि यह पेट में बनने वाली गैस को कम करता है और भोजन को आसानी से पचाने में सहायक होता है. यही कारण है कि कई लोग भारी भोजन के बाद चुटकी भर काला नमक लेना पसंद करते हैं. काला नमक शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने में भी मदद करता है. यह शरीर में पित्त को संतुलित रखने का काम करता है, जिससे पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है.
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आगे उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को सुबह पेट साफ न होने की समस्या रहती है, तो गुनगुने पानी के साथ एक चुटकी काला नमक लेना लाभदायक हो सकता है. यह शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है और आंतों को साफ रखने में मदद करता है. हालांकि, काले नमक का सेवन करते समय मात्रा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है.

वहीं, डॉक्टर ने बताया कि किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है और काला नमक भी इसका अपवाद नहीं है. जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर यह शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. विशेष रूप से जिन लोगों को उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), किडनी से जुड़ी समस्याएं या हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं हैं, उन्हें काले नमक का सेवन सावधानीपूर्वक करना चाहिए.

डॉक्टर पल्लव ने बताया कि ऐसे लोगों को खाली पेट काला नमक लेने से बचना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका उपयोग करना चाहिए. काला नमक सिर्फ आंतरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि बाहरी उपयोग के लिए भी लाभकारी होता है. जोड़ों के दर्द में राहत पाने के लिए काले नमक और गर्म रेत की पोटली से सिकाई करना एक पारंपरिक और प्रभावी उपाय माना जाता है.

वहीं, उन्होंने बताया कि यह दर्द को कम करने और सूजन को घटाने में मदद करता है. गर्मियों के मौसम में काला नमक विशेष रूप से उपयोगी होता है. पेट की जलन और अपच को दूर करने के लिए छाछ में भुना हुआ जीरा और काला नमक मिलाकर पीना एक बेहतरीन घरेलू उपाय है. यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है.

बता दें कि यह कहा जा सकता है कि काला नमक एक प्राकृतिक औषधि की तरह कार्य करता है, जो सही मात्रा और सही तरीके से उपयोग करने पर कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिला सकता है. इसे अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है, बशर्ते इसका सेवन संतुलित रूप में किया जाए.





