आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर ने नगीना में नया इतिहास लिखा। उन्होंने यहां भाजपा के ओम कुमार को 1 लाख 51 हजार 473 वोटों से हरा दिया। पिछले 10 सालों में यूपी के अंदर यह पहला मौका है, जब सपा-बसपा और भाजपा के अलावा किसी पार्टी से कोई सांसद बना। चंद्र
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आखिर चंद्रशेखर की रणनीति क्या थी? इंडी गठबंधन से टिकट न मिलने के बाद वैष्णव चुनाव लड़ने का फैसला कैसे किया गया? एकल वर्ग के हितैषी होने का टैग कैसे हटाया जाए? आइए सब कुछ एक तरफ से जानते हैं। सबसे पहले चंद्रशेखर ने यह ग्राफिक डिजाइन देखा…

अखिलेश ने चंद्रशेखर की जगह मनोज कुमार को टिकट दे दिया
मार्च के दूसरे हफ्ते में अखिलेश यादव ने नगीना कांग्रेस पर सपा की घोषणा की। उम्मीद थी, चंद्रशेखर को टिकट मिलेगा लेकिन पूर्व जज मनोज कुमार को सुला दिया गया। मीडिया में जब अखिलेश से चंद्रशेखर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- गठबंधन को चंद्रशेखर से कोई फायदा नहीं मिल रहा है। चंद्रशेखर ने दावा किया, उनसे अखिलेश यादव ने पिछले साल पूछा था कि क्या करोगे? तब हमने नगीना से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी।
चंद्रशेखर ने नगीना में कई सालों से तैयारी की थी। रफाल के साथ बैठक की और तय किया कि उनकी ही पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ा जाएगा। उन्होंने ऐलान कर दिया और फिर पिता के बीच प्रचार शुरू कर दिया।

चंद्रशेखर कहते हैं कि पिछले साल पहले हमने अखिलेश जी से नगीना से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी।
50% दलित-मुस्लिम वोटों के माध्यम से सफलता प्राप्त हुई
पश्चिमी यूपी के रुहेलखंड में आने वाली नगीना सीट सुरक्षित है। यहां 22% दलित और 28% मुस्लिम वोटर हैं। जिस आत्मा को इनका समर्थन मिल गया, उसकी जीत तय है। 2019 में यहां के गिरीश जाटव को 56.3% वोट मिले थे। चंद्रशेखर भी वोटरों के बीच पहुंचे और खुद को नगीना का बेटा और भाई बताया। दूसरी तरफ, सपा-बसपा के नेताओं ने चंद्रशेखर पर व्यक्तिगत हमले किए।

चुनाव प्रचार के दौरान चंद्रशेखर को महिलाओं के बीच खूब प्यार मिला।
आकाश आनंद ने चंद्रशेखर को बेघर और खुशहाल बताया
आकाश आनंद नगीना में आगामी सूर्या सुरेंद्र सिंह के पक्ष में रैली करने पहुंचे। उन्होंने चंद्रशेखर का नाम इसलिए रखा था- इंडी गठबंधन से टिकट मांगने वाला एक गरीब घूम रहा है। ये रियायतें दांव पर लगाती हैं कि अकेले लड़ेंगे तो जमानत उपयोगी हो जाएगी। यह छुटभैया नेता है। युवाओं को उत्साहित करता है। हड़ताल बुलाकर खुद चला जाता है और किसानों पर केस लग जाता है।

आकाश ने न सिर्फ नगीना में बल्कि बाकी जवानों में भी चंद्रशेखर पर जुबानी हमला बोला।
आकाश का यह दांव उलट गया। नगीना में नेताओं के वोटरों ने इस युवा नेतृत्व को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। दूसरी तरफ, चंद्रशेखर मुसलमानों के बीच सक्रिय रहे। सीएए प्रदर्शन के दौरान उनके लगातार आंदोलन में शामिल होने से लाभ हुआ। मुस्लिम नेताओं ने एकतरफा वोट कर दिया। सपा को यहां सिर्फ 1 लाख 2 हजार 374 वोट मिले।
पूरे चुनाव में विवादित भाषण से दूर रहे
चुनाव प्रचार के दौरान एक पत्रकार चंद्रशेखर से पूछा, आप पिछड़ वर्ग के बीच ही सक्रिय रहे, क्या इस चुनाव में स्वर्ण और ओबीसी का वोट नहीं देना चाहिए? चंद्रशेखर ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। वह चुनाव प्रचार के दौरान ओबीसी और स्वर्ण अक्षरों के बीच भी गए। यही कारण है कि इस वर्ग के लोगों ने भी चंद्रशेखर को वोट दिया।

चंद्रशेखर पूरे प्रचार के दौरान किसी भी तरह का विवादित बयान नहीं दिया जो मुद्दा बना।
2022 में जमानत सुरक्षित हो गई थी
चंद्रशेखर ने अपना पहला चुनाव 2022 में गोरखपुर विधानसभा सीट पर सीएम योगी के खिलाफ लड़ा। उनमें चंद्रशेखर को महज 7 हजार 640 वोट मिले थे। यह कुल पड़े वोट का महज 3.6% था। उस चुनाव से पहले भी उन्हें सपा की तरफ से गठबंधन की उम्मीद थी। लेकिन, पिछले दिनों अखिलेश यादव ने गठबंधन से इनकार कर दिया था।
खुद चंद्रशेखर गोरखपुर से निकले थे। इसके अलावा प्रदेश की 111 और सीटों से लुढ़का था, लेकिन किसी को भी जीत नहीं मिली। सबकी जमानत सुरक्षित हो गई थी। 111दारों को कुल 1 लाख 19 हजार 564 वोट मिले। यह कुल पड़े वोटों का महज 0.1% था।
