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Explain- अमेरिका और ईरान के बीच संवर्धित यूरेनियम भंडार पर तनाव बढ़ गया है. डोनाल्ड ट्रम्प के दावे को तेहरान ने एक सिरे से खारिज किया.इस वजह से हथियार क्षमता को लेकर ग्लोबल चिंता तेज हो गयी है. आखिर ईरान के पास कितना यूरेनियम है, जो परेशानी का कारण बना हुआ है.
यूरेनियम को लेकर फिर से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ रहा है तनाव. (रॉयटर्स)
नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर परमाणु को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. अमेरिक के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है. वहीं, दूसरी ओर ईरान ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया.उसने कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है. आइए जानते हैं कि ईरान के पास कितना भंडार है, जिसने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी हैै.
ट्रम्प के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. जहां अमेरिका इसे संभावित समझौते का संकेत बता रहा है, वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया. इस विरोधाभास ने साफ कर दिया है कि दोनों देश इस मुद्दे का इस्तेमाल रणनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं.
क्या होता है संवर्धित यूरेनियम
यूरेनियम अपने प्राकृतिक रूप में सीधे उपयोग के लायक नहीं होता. इसमें यूरेनियम-235 (यू-235) तत्व की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया को संवर्धन कहा जाता है. प्राकृतिक यूरेनियम में यू-235 सिर्फ 0.7% होता है. वैज्ञानिक गैस सेंट्रीफ्यूज जैसी तकनीक से इसकी मात्रा बढ़ाते हैं. 3-5% तक संवर्धित यूरेनियम का उपयोग बिजली बनाने वाले परमाणु रिएक्टरों में होता है, जबकि 20% से ऊपर जाने पर यह ज्यादा संवेदनशील हो जाता है.
कब बनता है हथियार के लिए खतरनाक
जब यूरेनियम का संवर्धन लगभग 90% तक पहुंच जाता है, तो उसे हथियार-ग्रेड माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक परमाणु बम बनाने के लिए करीब 25 किलोग्राम 90% संवर्धित यूरेनियम पर्याप्त होता है. इसके अलावा, 60% तक संवर्धित 40-42 किलोग्राम यूरेनियम को आगे प्रोसेस करके भी हथियार बनाया जा सकता है. खास बात यह है कि 60% से 90% तक पहुंचने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज होती है.
ईरान के पास कितना भंडार
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 400-450 किलोग्राम 60% तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इसके अलावा कम संवर्धित यूरेनियम का भी बड़ा भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, हाल के वर्षों में निगरानी सीमित होने के कारण इन आंकड़ों की पूरी तरह पुष्टि करना मुश्किल हो गया है.
ग्लोबल चिंता क्यों बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि विश्वास और इरादों का मामला है. अमेरिका और उसके सहयोगियों को डर है कि ईरान का बढ़ता भंडार उसके ‘ब्रेकआउट टाइम’ यानी हथियार बनाने की क्षमता तक पहुंचने के समय को कम कर सकता है. वहीं, ईरान इस भंडार को अपनी रणनीतिक ताकत और बातचीत में दबाव बनाने के तौर पर देखता है. ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच वार्ता का परिणाम पूरी दुनिया के लिए अहम साबित हो सकता है
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें





