सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट्स मेला भारत का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय हस्तशिल्प मेला माना जाता है. इसमें भारत और कई देशों की संस्कृति, कला, भोजन और हस्तशिल्प एक ही जगह देखने को मिलता है. हर साल लाखों लोग यहां पहुंचते हैं, ताकि पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों का अनोखा हुनर करीब से देख सकें.
मेले की खासियत (Highlights)
सूरजकुंड मेले का मुख्य आकर्षण इसकी सांस्कृतिक विविधता और अद्वितीय हस्तशिल्प है.
2026 की थीम- “Local to Global” (स्थानीय कला को वैश्विक पहचान दिलाने पर फोकस)
थीम स्टेट: उत्तर प्रदेश और मेघालय, जो अपनी पारम्परिक कला, चिकनकारी, ज़री, ट्राइबल हैंडीक्राफ्ट आदि प्रदर्शित कर रहे हैं.
पार्टनर नेशन: मिस्र (Egypt), जिसका पिरामिड-प्रेरित मंडप, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक प्रदर्शन मेले का अंतरराष्ट्रीय रंग बढ़ाते हैं.
1300+ स्टॉल- जिनमें हैंडिक्राफ्ट, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, मिट्टी-बांस के उत्पाद और बहुत कुछ मिलता है.
दैनिक सांस्कृतिक कार्यक्रम- ओपन-एयर चौपालों में लोकगीत, नृत्य और देश‑विदेश के कलाकारों की परफॉर्मेंस.
खास फूड कोर्ट- उत्तर प्रदेश, मेघालय और अन्य राज्यों के पारंपरिक व्यंजन.
यह मेला कलाकारों और शिल्पकारों के लिए अपनी कला दुनिया तक पहुंचाने का बड़ा मंच है.
लगने का समय (Dates & Timings)
तारीखें: 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक (16 दिन)
टाइमिंग: प्रतिदिन सुबह 10:00–10:30 AM से शाम 7:00–8:30 PM तक
सूरजकुंड मेला कैसे पहुंचें?
लोकेशन: सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट्स मेला ग्राउंड, फरीदाबाद, हरियाणा (दिल्ली से लगभग 20–25 किमी दूरी)
1. मेट्रो से
सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन: Badarpur Border (वायलेट लाइन)
यहां से ऑटो या कैब आसानी से मिल जाती है (लगभग 4–5 किमी दूरी).
2. रोड से
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम से सीधे टैक्सी, बस या निजी वाहन से पहुंचा जा सकता है.
ट्रैफिक नियंत्रण के कारण कुछ मार्गों पर प्रतिबंध होता है, इसलिए वैकल्पिक रूट का उपयोग बेहतर है.
3. विशेष बस सेवा
मेले के दौरान 18 विशेष बसें चलती हैं, विशेषकर बल्लभगढ़ और फरीदाबाद रूट से.
4. पार्किंग
10 से अधिक निर्धारित पार्किंग ज़ोन उपलब्ध हैं, अनाधिकृत जगह पार्किंग पर जुर्माना लग सकता है.
टिकट (Ticket Prices)
वीकडेज़: ₹120
वीकेंड: ₹180
छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को छूट मिलती है.
टिकट DMRC ऐप, हरियाणा टूरिज्म वेबसाइट या मेले के काउंटर से मिलते हैं.





