अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के बंदरगाहों को दी धमकी और बांग्लादेश में हिंसा…


अमेरिकी सेना सोमवार को ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से पोतों की आवाजाही राकने के मकसद से नाकेबंदी शुरू करने के लिए तैयार दिखी क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन अमेरिका के इस कदम के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को धमकी दी है। इस कदम से तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं और युद्ध के फिर से भड़कने की आशंका है।

‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (आईआरआईबी) के अनुसार, ‘‘फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।’’ ईरानी सेना ने कहा, ‘‘इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।’’

इससे पहले, अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे या ईरान के स्थानीय समयानुसार शाम साढ़े पांच बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा।

‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने कहा कि यह नाकेबंदी ‘‘सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी’’ जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं।

सेंटकॉम ने कहा कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

गौरतलब है कि विश्व के 20 फीसदी कच्चे तेल का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर होता रहा है।

ये घोषणाएं पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को हुई लंबी युद्धविराम वार्ता के बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद की गईं।

बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध संबंधी विचारों को लेकर पोप लियो 14वें पर असाधारण रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पोप ‘‘बहुत अच्छा काम’’ कर रहे हैं या ‘‘वह बहुत उदारवादी व्यक्ति हैं’’ तथा उन्हें ‘‘कट्टर वामपंथियों को खुश करना बंद कर देना चाहिए।’’

ट्रंप ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब लियो ने सप्ताहांत में संकेत दिया था कि ‘‘सर्वशक्तिमान होने का भ्रम’’ ईरान में अमेरिका-इजराइल युद्ध को हवा दे रहा है। पोप और राष्ट्रपति के विचारों में मतभेद होना असामान्य नहीं है लेकिन किसी पोप का किसी अमेरिकी नेता की सीधे आलोचना करना असामान्य है और इसके बाद दी गई ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया भी सामान्य नहीं है।

अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने की घोषणा के बाद बाजार में शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई।



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