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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फ्लोरिडा की एक संघीय अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है. ट्रंप ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े अखबारों में शुमार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) और मीडिया टाइकून रूपर्ट मर्डोक पर 10 बिलियन डॉलर (करीब 84,000 करोड़ रुपये) का मानहानि का मुकदमा किया था. ट्रंप का आरोप था कि अखबार ने उनके और कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन के संबंधों को लेकर गलत खबरें छापी हैं.
डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगा.
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फ्लोरिडा की एक संघीय अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है. ट्रंप ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े अखबारों में शुमार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) और मीडिया टाइकून रूपर्ट मर्डोक पर 10 बिलियन डॉलर (करीब 84,000 करोड़ रुपये) का मानहानि का मुकदमा किया था. ट्रंप का आरोप था कि अखबार ने उनके और कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन के संबंधों को लेकर गलत खबरें छापी हैं. हालांकि जज डैरिन पी. गेल्स ने सोमवार को इस मुकदमे को खारिज करते हुए ट्रंप की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
क्या था पूरा मामला?
यह कानूनी लड़ाई पिछले साल जुलाई में शुरू हुई थी. ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एक खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसने ट्रंप और जेफरी एपस्टीन के पुराने रिश्तों पर नई रोशनी डाली थी. रिपोर्ट में 2003 के एक एल्बम का जिक्र था जो एपस्टीन के 50वें जन्मदिन के लिए तैयार किया गया था. इस एल्बम में ट्रंप के हस्ताक्षर वाला एक पत्र शामिल था, जिसकी भाषा को अखबार ने यौन रूप से सांकेतिक बताया था. ट्रंप ने इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया और अखबार के खिलाफ 10 बिलियन डॉलर का दावा ठोक दिया. ट्रंप का मकसद न केवल इस रिपोर्ट को गलत साबित करना था बल्कि मीडिया संस्थानों को कानूनी उलझनों में फंसाकर डराना भी था.
जज ने क्या कहा?
फ्लोरिडा के डिस्ट्रिक्ट जज डैरिन पी. गेल्स ने अपने आदेश में ट्रंप की दलीलों को कमजोर पाया. जज ने स्पष्ट किया कि ट्रंप यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि अखबार ने यह लेख किसी दुर्भावना के साथ छापा था. अमेरिकी कानून के तहत प्रेस की स्वतंत्रता सर्वोपरि है, और किसी सार्वजनिक हस्ती के खिलाफ खबर छापना तब तक मानहानि नहीं माना जाता जब तक कि यह साबित न हो जाए कि पत्रकार ने जानबूझकर झूठ फैलाया है.
जज ने ट्रंप को अपनी शिकायत में सुधार करने का एक मौका जरूर दिया है, लेकिन वर्तमान स्थिति में इस केस का खारिज होना ट्रंप प्रशासन और उनके कानूनी सलाहकारों के लिए एक बड़ी फजीहत माना जा रहा है.
सवाल-जवाब
वॉल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट में ऐसा क्या था जिससे ट्रंप भड़क गए?
रिपोर्ट में एक पत्र का जिक्र था जो जेफरी एपस्टीन के जन्मदिन के एल्बम में मिला था. इस पत्र पर ट्रंप के दस्तखत थे और इसकी भाषा पर सवाल उठाए गए थे. बाद में यह पत्र अमेरिकी कांग्रेस द्वारा भी सार्वजनिक किया गया था.
क्या कोर्ट के इस फैसले का प्रेस की आजादी पर कोई असर पड़ेगा?
जी हाँ, विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन नेताओं के लिए एक कड़ा संदेश है जो कानूनी मुकदमों का सहारा लेकर आलोचनात्मक पत्रकारिता को दबाना (Chilling Effect) चाहते हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया कि तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग को मानहानि नहीं कहा जा सकता.
जेफरी एपस्टीन फाइल्स का ट्रंप से क्या लेना-देना है?
जेफरी एपस्टीन एक हाई-प्रोफाइल यौन अपराधी था, जिसके संबंध अमेरिका के कई रसूखदार लोगों से थे. एपस्टीन की फाइल्स सार्वजनिक होने के बाद से ही ट्रंप और उसके पुराने रिश्तों को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं, जिन्हें ट्रंप की टीम दबाने की कोशिश कर रही है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें





