नई दिल्ली. गाजा के फिर से निर्माण को लेकर दुनिया के बड़े-बड़े वादे अब खोखले साबित होते दिख रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को 17 अरब डॉलर का वादा तो मिला, लेकिन जमीन पर हकीकत बेहद चौंकाने वाली है. 17 अरब डॉलर तो बहुत दूर की बात है, अब तक यह 1 अरब डॉलर भी नहीं पहुंचा. वॉशिंगटन में हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में खाड़ी देशों ने अरबों डॉलर देने का ऐलान किया था, लेकिन अब वही देश पीछे हटते नजर आ रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मोरक्को और अमेरिका को छोड़ दें, तो बाकी देशों की जेबें अभी भी बंद हैं. यानी जो ‘रीबिल्डिंग ऑफ गाजा’ का सपना दिखाया गया था, वो अब फंडिंग के अभाव में दम तोड़ता नजर आ रहा है.
सबसे बड़ा झटका आया है ईरान से जुड़े युद्ध के कारण. इस संघर्ष ने पूरी तस्वीर ही बदल दी है क्योंकि जो पैसा गाजा के लिए आना था, वह अब जंग और सुरक्षा पर खर्च हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक, “ईरान से जुड़ी जंग ने सब कुछ प्रभावित कर दिया है.” मतलब साफ है कि गाजा अब वैश्विक राजनीति की प्राथमिकता से फिसलता जा रहा है. ऐसा कहा जा सकता है कि दुनिया ने वादे तो बड़े किए, लेकिन जब देने की बारी आई, तो कदम पीछे खींच लिए. गाजा आज भी मलबे में है, और ‘रीबिल्डिंग’ सिर्फ कागजों तक सीमित होती जा रही है.
‘अभी कोई पैसा उपलब्ध नहीं है’
फंडिंग संकट का सीधा असर गाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (NCAG) को तैनात करने की योजनाओं पर पड़ा है. यह समिति फ़िलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स का एक US-समर्थित समूह है, जिसका मकसद हमास से नियंत्रण अपने हाथ में लेना है. रॉयटर्स ने इस मामले से परिचित एक अन्य फ़िलिस्तीनी अधिकारी के हवाले से बताया कि बोर्ड ने हमास और अन्य गुटों को सूचित किया है कि फंड की कमी के कारण गाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति अभी इस क्षेत्र में प्रवेश करने में असमर्थ है. अधिकारी ने बताया कि दूत निकोले म्लादेनोव ने फ़िलिस्तीनी समूहों से कहा, “अभी कोई पैसा उपलब्ध नहीं है.”
अली शाथ के नेतृत्व वाली NCAG की परिकल्पना गाज़ा में संघर्ष के बाद प्रशासनिक प्राधिकरण के रूप में की गई थी. इसे हमास के निरस्त्रीकरण और इज़राइली सैनिकों की वापसी के बाद मंत्रालयों को चलाने और पुलिस व्यवस्था की देखरेख करने की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी. हालांकि, फंडिंग की कमी और लगातार बनी सुरक्षा चिंताओं, दोनों कारणों से यह समिति अभी तक तैनात नहीं हो पाई है. इसके सदस्य फिलहाल काहिरा में निगरानी में हैं और अगले कदमों के बारे में स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं.
युद्ध का प्रभाव और मानवीय नुकसान
सूत्रों ने बताया कि फंडिंग और सुरक्षा, दोनों चिंताओं के कारण NCAG अभी तक वहां प्रवेश नहीं कर पाई है. पिछले अक्टूबर में संघर्ष-विराम पर सहमति बनने के बावजूद हिंसा जारी है; स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इजरायली हमलों में गाजा में कम से कम 700 लोगों की मौत हुई है. वैश्विक अनुमानों के अनुसार, गाजा के पुनर्निर्माण में, जहां लगभग 80% बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुका है, लगभग $70 बिलियन का खर्च आ सकता है. इस युद्ध की शुरुआत 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमास के हमलों के बाद हुई थी, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे. स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद इजरायल द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान में 72,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं.
हमास के निरस्त्रीकरण को लेकर मिस्र की मेजबानी में हुई बातचीत में बहुत कम प्रगति हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी कठोर मांगों पर अड़े हुए हैं. इजरायल का कहना है कि सैनिकों की वापसी से पहले हमास को निरस्त्र होना ही होगा, जबकि हमास ने इजरायली सैनिकों की पूर्ण वापसी और दुश्मनी समाप्त करने की गारंटी की मांग की है. राजनयिक सूत्रों ने एजेंसी को बताया कि इस गतिरोध के कारण एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे शांति स्थापित करने के नाजुक प्रयास और भी अधिक जटिल हो गए हैं.





