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US Invasion Of Iran: अमेरिका इस समय ईरान को दो तरफ से घेरने में लगा है. US नेवी ने इलाके में दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात कर रखे हैं. अरब सागर में यूएसएस अब्राहम लिंकन मौजूद है. वहीं रेड सी में दुनिया के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाने वाला यूएसएस गेराल्ड फोर्ड पहुंच चुका है. इस तैनाती का मतलब है कि ईरान अब दो दिशाओं से अमेरिकी दबाव में आ सकता है. एक तरफ साउथ यानी अरब सागर से हमला करने की क्षमता है. दूसरी तरफ वेस्ट यानी रेड सी और सुएज के रास्ते स्ट्राइक की पोजिशन बनाई गई है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हाल ही में लिंकन के नए फोटो जारी कर ईरान के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरानी मिसाइलों ने इस कैरियर को निशाना बनाया था.
वाशिंगटन ने तेहरान को घुटनों पर लाने के लिए एक बेहद खतरनाक चक्रव्यूह रचा है. ताजा रिपोर्ट्स और सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान को दो तरफ से घेर लिया है. एक तरफ अरब सागर में दुनिया का सबसे घातक युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन तैनात है, तो दूसरी तरफ लाल सागर में USS गेराल्ड फोर्ड अपनी मिसाइलों का मुंह ईरान की ओर किए खड़ा है.

ईरान ने पिछले दिनों दावा किया था कि उसने अरब सागर में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को अपनी मिसाइलों से निशाना बनाया है. तेहरान के मीडिया आउटलेट्स ने तो यहां तक कह दिया था कि यह युद्धपोत मैदान छोड़कर भाग गया है. लेकिन अमेरिकी सेना ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए नई तस्वीरें जारी की हैं.

इन तस्वीरों में ‘लिंकन’ पूरी शान से अरब सागर की लहरों पर तैरता नजर आ रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ किया है कि लिंकन पर एक भी खरोंच नहीं आई है और वह सामान्य रूप से अपनी उड़ानें संचालित कर रहा है. असल में, अमेरिका ने इसे ईरान के दक्षिण की ओर से हमला करने के लिए तैनात किया है. होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब इसकी मौजूदगी ईरान की तेल सप्लाई और नौसैनिक ठिकानों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है.
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जंग के दूसरे मोर्चे पर अमेरिका का सबसे आधुनिक और नया एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड फोर्ड तैनात है. पेंटागन द्वारा जारी तस्वीरों के मुताबिक, फोर्ड ने हाल ही में स्वेज नहर को पार किया और अब वह लाल सागर में मौजूद है. यहां से अमेरिका ईरान के पश्चिमी ठिकानों और उसके समर्थित हूतियों पर नजर रख रहा है.

गौर करने वाली बात यह है कि गेराल्ड फोर्ड का यह मिशन काफी लंबा होने वाला है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह करीब 11 महीने की तैनाती पर है, जो वियतनाम युद्ध के बाद का एक रिकॉर्ड होगा. लाल सागर से फोर्ड की मिसाइलें सीधे ईरान के पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच सकती हैं, जिससे ईरान के लिए अपनी सुरक्षा करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा.

अमेरिका ने ईरान की समुद्री ताकत को कुचलने के लिए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ लॉन्च किया है. इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान के उन ठिकानों को तबाह करना है, जहां से ड्रोन्स और मिसाइलें दागी जाती हैं. रणनीति बेहद साफ है- दक्षिण से USS अब्राहम लिंकन और पश्चिम से USS गेराल्ड फोर्ड एक साथ हमला करेंगे. इसमें सिर्फ हवाई हमले ही नहीं, बल्कि पनडुब्बियों और विध्वंसक जहाजों (Destroyers) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स को सुरक्षित रखने के लिए है, लेकिन हकीकत में यह ईरान की मिलिट्री कैपेबिलिटी को जीरो करने की तैयारी है. जब दो तरफ से आसमान से आग बरसेगी, तो ईरान के पास संभलने का मौका तक नहीं होगा.

अमेरिकी घेराबंदी सिर्फ इन दो जहाजों तक सीमित नहीं है. अमेरिका का एक और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश भी युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. हाल ही में इस स्ट्राइक ग्रुप ने अपनी ट्रेनिंग पूरी की है. ट्रेनिंग के दौरान 28 दिनों में 1500 से ज्यादा उड़ानें भरी गईं, जो अमेरिका की हमलावर क्षमता को दर्शाती हैं.

कैप्टन रॉबर्ट बिब्यू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनके सैनिक खतरे के बीच काम कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर वे बिना किसी हिचकिचाहट के एयर सुपीरियरिटी और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के जरिए हमला करने को तैयार हैं. इसका मतलब है कि अगर ईरान ने पलटवार की कोशिश की, तो अमेरिका के पास बैकअप के तौर पर एक और विनाशकारी ताकत तैयार खड़ी है.

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) लगातार दावे कर रही है कि उनके पास अमेरिका को जवाब देने के लिए घातक ड्रोन यूनिट्स हैं. लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका की इस दोतरफा घेराबंदी ने ईरान की घेराबंदी कर दी है. एक तरफ अरब सागर की ओर से लिंकन का दबाव है और दूसरी तरफ लाल सागर से फोर्ड का खौफ.

ईरान के पास सीमित विकल्प बचे हैं. अगर वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका इसे युद्ध की घोषणा मानकर फुल-स्केल अटैक शुरू कर देगा. फिलहाल मिडिल ईस्ट में बारूद बिछ चुका है, बस एक चिंगारी की देरी है जो इस पूरे इलाके को राख में बदल सकती है.





