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Accused’s grandfather claims- the car was being driven by the family driver; | पुणे पोर्श केस: आरोपी के दादा का दावा- कार फैमिली ड्राइवर चला रहा था; पुलिस ने विशाल अग्रवाल का फोन जब्त किया

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पुणे4 मिनट पहले

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विश्वासपात्र पर लगे सीसीटीवी में प्रोटोटाइप से थोक हुई पोर्श दिखाई दे रही है।  - दैनिक भास्कर

विश्वासपात्र पर लगे सीसीटीवी में प्रोटोटाइप से थोक हुई पोर्श दिखाई दे रही है।

पुणे पोर्श केस के नाबालिग नाबालिग के दादा सुरेंद्र अग्रवाल ने दावा किया है कि घटना के वक्त उनकी फैमिली ड्राइवर थी। नाबालिग के दोस्तों ने भी ड्राइवर की बात कही है। पुलिस की पूछताछ में ड्राइवर ने भी गाड़ी चलाने की बात स्वीकार करते हुए अपनी पहली पुष्टि की है।

वहीं, पुलिस के पास मौजूद दादा के पिता विशाल अग्रवाल ने भी पुलिस से कहा कि उनकी गाड़ी में उनका बेटा नहीं बल्कि हमारा परिवार का ड्राइवर आ रहा था। वहीं, पुलिस ने विशाल का फोन जब्त कर लिया है। विशाल की कॉल डिटेल और अन्य जानकारी का प्रयास कर रही है।

दूसरी तरफ पुणे के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने 25 साल की उम्र के पहले माइनर को लाइसेंस जारी नहीं किया। वहीं, आरटीओ ने पोर्श कार टेंपररी रजिस्ट्रेशन 12 महीने के लिए रद्द कर दिया है।

जुवेनाइल बोर्ड ने 5 जून तक बाल सुधार गृह भेजा

ये तस्वीर पब के सीसीटीवी फुटेज की है।  हादसे से पहले नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ शराब पी और ड्रग्स में कार लेकर निकल गया।

ये तस्वीर पब के सीसीटीवी फुटेज की है। हादसे से पहले नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ शराब पी और ड्रग्स में कार लेकर निकल गया।

घटना के अगले दिन किशोर न्याय बोर्ड ने 75 हजार रुपए के बांड और सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने की सजा सुनते हुए नाबालिग आदर्श को जमानत दे दी थी। इस जजमेंट का विरोध किया गया। पुणे में लोगों ने हड़ताल की तो महाराष्ट्र सरकार ने बोर्ड से फैसले पर फिर विचार करने को कहा।

बुधवार (22 मई) को बोर्ड ने घटना को फिर पूछताछ के लिए बुलाया। यहां पुलिस ने बताया कि अपराध क्रूर तरीके से किया गया। आदर्श 17 साल 8 महीने का है। वह गाड़ी चलाता है। शराब पीता है और उसका व्यवहार बलिग जैसा है। इसलिए इसे भी कार्यक्रमों में लिया जाता है। इसके बाद बोर्ड ने जमानत का फैसला रद्द कर 5 जून तक किशोर सुधार गृह भेज दिया।

पुणे आरटीओ ने पोर्श कार की टेंपरेरी भर्ती 12 महीने के लिए रद्द कर दी है।

पुणे आरटीओ ने पोर्श कार की टेंपरेरी भर्ती 12 महीने के लिए रद्द कर दी है।

2.44 करोड़ की कार, 1758 रुपए के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ
आरटीओ के अधिकारी संजीव भोर के मुताबिक, विशाल अग्रवाल ने मार्च में बेंगलुरु के एक डीलर से इलेक्ट्रिक लग्जरी स्पोर्ट्सटेम्प पोर्श कार 2.44 करोड़ रुपये में खरीदी थी। डीलर ने 18 मार्च को टेम्परेरी रजिस्ट्रेशन के बाद यह कार बड़ी मुश्किल से पकड़ी थी। इसका रजिस्ट्रेशन 17 सितंबर 2024 तक वैध है।

उन्होंने आगे कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 ए (4) के अनुसार, माइनर के मामले में कार का पंजीकरण 12 महीने के लिए रद्द कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कार ओनर 18 अप्रैल 2024 को पुणे के आरटीओ ऑफिस में रजिस्ट्रेशन के लिए आया था। जांच और सारी प्रक्रिया उसी दिन पूरी कर दी गई थी, लेकिन 1758 रुपये नहीं चुकाने के कारण कार का रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं किया गया था।

भोर ने बताया कि एक्ट के मुताबिक अगर किसी नाबालिग से कोई हादसा होता है तो उसे 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल सकता।

आदर्श के दादा ने भाई से प्रॉपर्टी को लेकर विवाद में छोटे राजन से मदद मांगी थी
इधर, नाबालिग नाबालिग के दादा सोंदर अग्रवाल का अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन निकला है। बताया जा रहा है कि 2021 में सुरन्द्रा ने अपने भाई के साथ मिलकर सामान बेचने के विवाद को लेकर छोटे राजन से मदद मांगी थी। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री महामहिम कलाकार ने कहा है कि इसकी भी जांच होगी।

एक अधिकारी ने बताया कि पुणे पोर्श केस में नाबालिग नाबालिग के दादा से पुणे पुलिस पूछताछ कर रही है। दूसरी ओर, पुलिस ने नाबालिग अल्ट्रासाउंड से उसके पिता विशाल अग्रवाल पर इल्जाम लगाया है। एफआईआर के मुताबिक, रियल एस्टेट रियल एस्टेट डेवलपर को पता चला कि उसका बेटा इंजीनियर है। फिर भी उन्होंने बेटे को न सिर्फ 2.50 करोड़ कीमत वाली बिना नंबर प्लेट की पोर्श कार दी, बल्कि पब में शराब पार्टी के लिए अपना क्रेडिट कार्ड भी दिया था।

इस कार्ड से 90 मिनट में 48 हजार रुपये का बिल चुकाया गया। कार के ड्राइवर ने माँ को गाड़ी देने से मना कर दिया था, लेकिन पिता विशाल ने गाड़ी छोड़ दी। 18 मई की रात को सुपरमार्केट ने पब से शराब पार्टी के बाद बाइक सवार युवा-युवती को कार से टक्कर मार दी। हादसे में दोनों की मौत हो गई थी। पूरी खबर पढ़ें…

दोनों मृतक मध्य प्रदेश में रहने वाले, घरवाले बोले- यह हादसा नहीं, हत्या

कार से टक्कर के बाद अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की कार पर ही मौत हो गई थी।

कार से टक्कर के बाद अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की कार पर ही मौत हो गई थी।

चश्मेदियों के अनुसार, घटना के दौरान मामूली शराब के नशे में करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चल रही थी। उसने रात करीब 2 बजे कल्याणीनगर में बाइक सवार आईटी इंजीनियर्स को पीछे से टक्कर मार दी थी। कार का एयरबैग माइलेज की वजह से वह आगे नहीं देख पा रहा था। इसके बाद पैटर्न को मजबूरन कार रोकनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया।

हादसे में मध्य प्रदेश के रहने वाले इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई। दोनों एक पार्टी से लौट रहे थे। लोगों ने बताया कि कार की टक्कर से बाइक सवार लड़की हवा में कई फीट ऊंची कूद वाली जमीन पर गिरी थी और युवक पास में खड़ी कार से दूसरी कार में जा टकराया था।

एक्सीडेंट में जान गंवाने वाले युवा अनीश कालरा मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बीरसिंहपुर और स्वर्गीय अश्विनी कोष्टा जबलपुर की रहने वाली थीं। एक की डेड बॉडी 20 मई को और दूसरे की 21 मई को उनके घर पहुंची। अनीश के चाचा अखिलेश यादव ने कहा- यह घटना हत्या नहीं है। फॉर्म को जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।

अश्विनी कोस्टा के पिता सुरेश कोस्टा ने कहा कि चारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि लोगों को सबक मिले। मेरी बेटी ने अपनी पढ़ाई पूरी तरह से पुणे में की और उसे कहीं नौकरी मिल गई। भाई समरप्रीत ने बताया कि अश्विनी पुणे में 6 साल पहले, जनवरी में ही उन्होंने 24वीं जयंती मनाई थी।

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नाबालिगों की जमानत रद्द, 5 जून तक बाल सुधार गृह भेजा गया, पिता को 24 मई तक पुलिस हिरासत में भी भेजा गया

पुणे के पोर्श एक्सीडेंट और मर्डर केस में जुवेनाइल बोर्ड ने बुधवार को माइनर इफेक्ट की जमानत रद्द कर दी और उसे 5 जून तक बाल सुधार के लिए घर भेज दिया गया है। एक नामी बिल्डर का बेटा है, जिसने 18 मई की रात शराब के नशे में अपनी पोर्श कार से बाइक को टक्कर मार दी थी। पूरी खबर पढ़ें…

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