मिशन लादेन की तरह US ने चलाया पायलट रेस्क्यू ऑपरेशन, पाकिस्तान के सीने पर मारी थी गोली, ओबामा की राह पर ट्रंप


Operation Neptune Spear To Kill Osama Bin Laden: ईरान युद्ध के दौरान शुक्रवार को अमेरिकी एयर फोर्स का एक F-15E स्ट्राइक ईगल दुश्मन के एयर डिफेंस से टकराकर गिर गया. इस घटना में पायलट और वीपन सिस्टम्स ऑफिसर (WSO) दोनों इजेक्ट हो गए. एक रिमोट माउंटेन एरिया में छिपे WSO को निकालने के लिए अमेरिका ने रविवार को एक हाई-रिस्क रेस्क्यू मिशन चलाया. यह एक बहुत बड़ा ऑपरेशन था और इसमें अमेरिकी सेना के 100 से अधिक स्पेशल कमांडो ने हिस्सा लिया. इस ऑपरेशन को सीधे व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम देख रही थी. दरअसल, अमेरिका के लिए अपने WSO को बचाना नाक का सवाल बन गया था. अगर वह WSO ईरान के हाथ लग जाता तो मौजूदा युद्ध का रुख पूरी तरह बदल जाता.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने इस ऑपरेशन को बेहद शातिर तरीके अंजाम दिया. पहले उसने एक धोखे का अभियान (Deception Campaign) चलाया, जिसमें ईरान के अंदर अफवाह फैलाई गई कि अमेरिकी फोर्सेज ने पहले ही मिसिंग ऑफिसर को ढूंढ लिया है और उसे वे ग्राउंड कन्वॉय से निकाल रहे हैं. इसने ईरानी सर्च टीमों को भ्रमित किया और उनका समय जाया किया. सीआईए के एजेंटों ने स्पेशलाइज्ड टेक्नोलॉजी से ऑफिसर की लोकेशन ट्रेस की और रीयल-टाइम जानकारी पेंटागन व व्हाइट हाउस को दी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर रेस्क्यू मिशन शुरू हुआ, जो सफल रहा. रेस्क्यू के बाद दो ट्रांसपोर्ट प्लेन्स रिमोट बेस पर फंस गए, इसलिए तीन नए प्लेन्स भेजे गए और सभी अमेरिकी पर्सनल को निकाला गया. निकालते समय दोनों प्लेन्स को खुद उड़ा दिया गया ताकि टेक्नोलॉजी दुश्मन के हाथ न लगे.

2011 के ऑपरेशन में सिचुएशन रूम में ऑपरेशन की लाइव टेलीकास्ट देखते पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी टीम. फोटो- रायटर

क्या था ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर, जिसमें ओसामा मारा गया

2 मई 2011 की रात (पाकिस्तानी समय) अमेरिका ने ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर चलाया. यह ऑपरेशन सीआईए की वर्षों की खुफिया मेहनत का नतीजा था. बिन लादेन को 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था. अमेरिकी इंटेलिजेंस ने उसके कूरियर अबू अहमद अल-कुवैती को ट्रैक किया, जो पाकिस्तान के अबोटाबाद में एक हवेली तक पहुंचा. CIA ने पुष्टि की कि हवेली में बिन लादेन छिपा है. राष्ट्रपति ओबामा ने मिशन को अप्रूव किया. नेवी सील टीम सिक्स दो ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टरों से जालालाबाद बेस से रवाना हुई. मिशन में करीब 24 सील्स, एक इंटरप्रेटर और एक डिटेक्शन डॉग शामिल थे. पाकिस्तान की हवाई क्षेत्र में घुसते हुए हेलिकॉप्टर ने रडार से बचने के लिए लो-अल्टीट्यूड फ्लाइट की. हवेली के पास पहुंचते ही एक हेलिकॉप्टर की टेल दीवार से टकराई और सॉफ्ट क्रैश हो गया. कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन हेलिकॉप्टर को बाद में उड़ा दिया गया ताकि टेक्नोलॉजी पाकिस्तान या चीन के हाथ न लगे.

कैसे अंजाम तक पहुंया वह ऑपरेशन

सील्स ने नाइट विजन गॉगल्स का इस्तेमाल कर हवेली में एंट्री की. उन्होंने सुरक्षा गार्ड्स को मार गिराया. तीसरी मंजिल पर बिन लादेन अपने बेडरूम में मिला. उसने हथियार उठाने की कोशिश की, लेकिन सील्स ने उसे गोली मार दी. ऑपरेशन में बिन लादेन समेत पांच लोग मारे गए. सील्स ने हार्ड ड्राइव्स, दस्तावेज और कंप्यूटर सामग्री जब्त की. 40 मिनट के ऑपरेशन के बाद टीम वापस अफगानिस्तान लौटी. बिन लादेन का शव अरब सागर में दफनाया गया. इसके बाद राष्ट्रपति ओबामा ने टीवी पर घोषणा की- जस्टिस हैज डन. यह ऑपरेशन अमेरिकी खुफिया और स्पेशल फोर्सेज की क्षमता का प्रतीक बना. हालांकि पाकिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया. इस ऑपरेशन को व्हाइट हाउस में लाइव देखा गया था.

ट्रंप का पायलट रेस्क्यू मिशन

ईरान युद्ध में F-15E स्ट्राइक ईगल के गिरने के बाद अमेरिका ने एक और हाई-रिस्क मिशन चलाया. पायलट जल्दी रेस्क्यू हो गया था, लेकिन WSO दो दिनों तक ईरान की पहाड़ों में छिपा रहा. ईरान ने उसे पकड़ने के लिए सर्च शुरू कर दिया था और इनाम की भी घोषणा की. सीआईए ने यहां निर्णायक भूमिका निभाई. उसने एक झूठी खबर फैलाई. ईरान के अंदर खुफिया चैनलों से अफवाह फैलाई कि अमेरिकी फोर्सेज ने पहले ही WSO को ढूंढ लिया है और उसे ग्राउंड कन्वॉय से निकाल रहे हैं. इससे ईरानी सर्च टीम भटक गईं. इस बीच सीआईए ने स्पेशलाइज्ड सेंसर्स और लोकल संपर्कों से ऑफिसर की सटीक लोकेशन ट्रेस की. रीयल-टाइम डेटा पेंटागन और व्हाइट हाउस को भेजा गया. राष्ट्रपति ट्रंप ने मिशन को ग्रीन सिग्नल दिया. स्पेशल फोर्सेज ने नाइट ऑपरेशन में एंट्री की. भारी फायरिंग के बीच ऑफिसर को सुरक्षित निकाला गया. रेस्क्यू के बाद दो ट्रांसपोर्ट प्लेन्स रिमोट बेस पर फंस गए. तीन नए प्लेन्स भेजे गए. सभी अमेरिकी पर्सनल को निकालते समय दो डिसेबल्ड प्लेन्स को खुद उड़ा दिया गया ताकि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी ईरान या उसके सहयोगियों के हाथ न लगे. इसके बाद ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर लिखा- वी गॉट गिह… अमेरिका इतिहास का एक सबसे जोखिम भरा सर्च और रेस्कू ऑफरेशन.



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