Trump US Military Purge Just Like China Jinping | जिनपिंग की राह पर ट्रंप, अमेरिका को चीन बनाने की तैयारी में है व्हाइट हाउस


होमदुनियाअमेरिका

जिनपिंग की राह पर ट्रंप, अमेरिका को ‘चीन मॉडल’ बनाने की तैयारी में व्हाइट हाउस

Last Updated:

ट्रंप, अमेरिकी सेना के टॉप पर बैठे अधिकारियों को एक-एक करके निकाल कर रहे हैं. जो ‘शी जिनपिंग’ के चीनी मॉडल की याद दिलाता है. जहां सत्ता को मजबूत करने के लिए सेना में बार-बार सफाई की जाती है. ट्रंप प्रशासन अब तक कम से कम 13 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटा चुका है, जो मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच एक बड़ा रिस्क माना जा रहा है.

Zoom

जिनपिंग की राह पर ट्रंप

वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप भले ही दुनिया के सामने चीन को कोसते हों लेकिन सच तो ये है कि वो अंदर ही अंदर शी जिनपिंग के ‘पावर गेम’ के मुरीद हैं. ट्रंप कई बार सरेआम कह चुके हैं कि उन्हें जिनपिंग का वो अंदाज बहुत पसंद है, जिसमें उनके मंत्री और स्टाफ खौफ के मारे थर-थर कांपते हैं. अब इसी खौफ को अमेरिका में पैठ जमाने के लिए ट्रंप ने ‘मिलिट्री पर्ज’ यानी सेना में बड़ी सफाई का बिगुल फूंक दिया है. जैसे चीन में जिनपिंग अपनी कुर्सी पक्की करने के लिए जनरलों को किनारे लगा देते हैं, ठीक वैसे ही अब वाशिंगटन में भी टॉप सैन्य अफसरों को धड़ाधड़ पदों से हटाया जा रहा है.

जो जिनपिंग ने किया वही US में कर रहे ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना में हड़कंप मचा दिया. अब तक के घटनाक्रमों में कम से कम 13 वरिष्ठ सैन्य नेताओं को उनके पदों से हटा दिया गया है या उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा है. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका मिडिल ईस्ट में एक बड़े और फैलते हुए युद्ध में उलझा हुआ है. जिस रफ्तार से ये बदलाव किए जा रहे हैं, उससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह केवल एक प्रशासनिक सुधार है या फिर विरोधियों को ठिकाने लगाने का एक ‘पर्ज’ है?

क्या है ट्रंप का असली मकसद?

चीन में शी जिनपिंग ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सेना और राजनीतिक गलियारों में कई बार ‘पर्ज’ यानी सफाई अभियान चलाया है. जिनपिंग का मकसद साफ था- ‘कोई भी संस्थान उनकी मर्जी के खिलाफ न खड़ा हो पाए’. अब अमेरिका में भी कुछ वैसी ही झलक दिख रही है.

ट्रंप के इस कदम को उनके ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ मिशन का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह सेना को पूरी तरह से पॉलिटिकल बनाने की कोशिश है. अगर अमेरिकी सेना के जनरल राष्ट्रपति की व्यक्तिगत वफादारी की कसौटी पर परखे जाने लगे तो दशकों पुरानी उस परंपरा का अंत होगा जहां सेना राजनीति से दूर रहकर केवल देश के प्रति जवाबदेह होती थी.

अमेरिका के लिए बड़ा रिस्क

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह मिलिट्री पर्ज तब हो रहा है जब अमेरिकी सेना को सबसे ज्यादा स्थिरता की जरूरत है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और रेड सी में हुती विद्रोहियों के हमलों के बीच, अनुभवी जनरलों को हटाना एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है.

जानकारों का मानना है कि ट्रंप उन चेहरों को आगे लाना चाहते हैं जो उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ के विजन को बिना किसी सवाल के लागू कर सकें. यह ठीक वैसा ही है जैसे चीन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) सीधे तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी और शी जिनपिंग के प्रति वफादार है.

About the Author

authorimg

Utkarsha SrivastavaChief Sub Editor

Utkarsha Shrivastava is a seasoned digital journalist specializing in geo-politics, currently writing for World section of News18 Hindi. With over 10 years of extensive experience in digital media, she has buil…और पढ़ें





Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img