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मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच अस्पताल और हेल्थ वर्कर भी सुरक्षित नहीं हैं. हनान बाल्खी ने बताया कि हेल्थ सेंटर्स पर 116 बड़े हमले हुए हैं. कई इंडस्ट्रियल यूनिट्स और इमरजेंसी सर्विस पर सीधे हमले हुए हैं. इलाके के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर अपना निशाना बनाया गया है. बाल्खी ने कहा, ‘मिडिल ईस्ट की यह तस्वीर बहुत ही ज्यादा कष्टकारी है’.
जंग की वजह से न्यूक्लियर और रेडिएशन का भी खतरा मंडरा रहा है. (फाइल फोटो)
जिनेवा. मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त एयर स्ट्राइक में ईरान के बड़े शहरों पर हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइलें दागीं. गोलाबारी के बीच बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की जान जा रही है. स्वास्थ्यकर्मी भी इस फेहरिस्त में हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार आंकड़े जारी कर रहा है जो जितने कष्टकारी हैं उतने ही खौफनाक भी. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, शुरुआती हफ्तों में ही करीब 3,300 लोग आसमान से बरसते गोलों का शिकार हुए, तो 43 लाख से ज्यादा दर बदर हुए.
ये रूह कंपाने वाली सच्चाई विश्व स्वास्थ्य संगठन की ईस्टर्न मेडिटेरेनियन (पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों) की क्षेत्रीय निदेशक, हनान बाल्खी, ने ईरान संघर्ष के शुरुआती हफ्तों के असर का अवलोकन करते हुए बताई. बाल्खी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि लड़ाई ने हाल के दशकों में सबसे ‘बड़े संकटों’ में से एक को जन्म दिया है, जिसके नतीजे दर्दनाक हैं. 3,300 से ज्यादा लोगों की जान गई है, 30 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए और 4.3 मिलियन (43 लाख) से ज्यादा बेघर हुए हैं.
इतना ही नहीं, इस दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर 116 हमले किए गए. इतना ही नहीं, कई औद्योगिक इकाइयों, आपातकालीन सेवाओं और अहम बुनियादी ढांचों को भी निशाने पर लिया गया. उन्होंने कहा मिडिल ईस्ट में जिस तरह की तस्वीर उभर कर आ रही है, वह बेहद कष्टकारी है. हाल के दशकों में यह क्षेत्र की सबसे बड़ी त्रासदी है. उनके मुताबिक स्वास्थ्य व्यवस्था बिल्कुल चरमरा गई है. रिफ्यूजी शिविरों में जरूरत से ज्यादा लोग पनाह लिए हुए हैं.
इतना ही नहीं वर्तमान हालात पर्यावरण के लिए भी ठीक नहीं हैं. लोग जैविक, परमाणु और रेडियोएक्टिव विकिरण के जोखिम से जूझ रहे हैं. ये पूरे क्षेत्र के लिए संकट का सबब है. बाल्खी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संघर्ष विराम की अपील की. साथ ही इन क्षेत्रों में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गारंटी मांगी.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





