‘बंधक कूटनीति अब और नहीं’ अफगानिस्तान के खिलाफ अमेरिका का एक्शन, मार्को रुबियो ने चेताया


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‘बंधक कूटनीति अब और नहीं’ अफगानिस्तान के खिलाफ अमेरिका का एक्शन, चेताया भी

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US warn Afghanistan: अमेरिका ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर ‘बंधक कूटनीति’ का आरोप लगाते हुए बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अफगानिस्तान को गलत तरीके से लोगों को हिरासत में रखने को बढ़ावा देने वाला देश’ घोषित किया है और हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों की तुरंत रिहाई की मांग की है. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि तालिबान को अब यह नीति हमेशा के लिए खत्म करनी होगी.

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वॉशिंगटन का कहना है कि तालिबान सरकार ‘बंधक कूटनीति’ के जरिए राजनीतिक और आर्थिक रियायतें हासिल करने की कोशिश कर रही है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: अमिरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका फर्स्ट को लेकर प्रखर दिखते हैं. वे अमेरिका और अमेरिकी नागरिक के लिए कुछ भी करने का दावा करते हैं और करते भी हैं. इसकी बानगी एक बार फिर दिखी है. अमेरिकी सरकार ने अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को धमकी दे दी है. वाशिंगटन ने साफ कहा है कि ‘बंधक कूटनीति’ अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए अफगानिस्तान को आधिकारिक तौर पर ‘गलत तरीके से लोगों को हिरासत में रखने वाला देश’ घोषित कर दिया. अमेरिका का आरोप है कि तालिबान विदेशी नागरिकों और खासकर अमेरिकियों को गलत तरीके से हिरासत में लेकर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है. इस कदम के साथ ही अमेरिका ने तालिबान से तुरंत सभी अमेरिकी नागरिकों को रिहा करने की मांग भी की है.

न्यूज एजेंसी AFP के अनुसार अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों का मुद्दा लगातार चर्चा में है. वॉशिंगटन का कहना है कि तालिबान सरकार ‘बंधक कूटनीति’ के जरिए राजनीतिक और आर्थिक रियायतें हासिल करने की कोशिश कर रही है. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जब तक हिरासत में लिए गए अमेरिकियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक अफगानिस्तान के खिलाफ कड़े कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय कदम उठाए जा सकते हैं. अमेरिकी प्रशासन ने अपने नागरिकों को अफगानिस्तान की यात्रा से भी सख्ती से बचने की सलाह दी है.

अमेरिकी नागरिकों की रिहाई की मांग

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि तालिबान लगातार ऐसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है जो आतंकवादी रणनीतियों से मिलते-जुलते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को अगवा करना, उन्हें कैद में रखना और बदले में राजनीतिक या आर्थिक लाभ मांगना तालिबान की रणनीति बन चुकी है. इसी वजह से अमेरिका ने अफगानिस्तान को ‘गलत तरीके से हिरासत में लोगों को रखने वाला देश’ घोषित किया है.

अमेरिका ने अफगानिस्तान को ‘गलत तरीके से हिरासत में लोगों को रखने वाला देश’ घोषित किया है. (फाइल फोटो)
  • रुबियो ने विशेष रूप से दो अमेरिकी नागरिकों डेनिस कॉयल और महमूद हबीबी का नाम लेते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है. बता दें कि महमूद हबीबी अफगान-अमेरिकी कारोबारी हैं और पहले अफगानिस्तान के सिविल एविएशन निदेशक रह चुके हैं. उन्हें अगस्त 2022 में काबुल में गिरफ्तार किया गया था. अमेरिकी विदेश विभाग ने हबीबी की सुरक्षित वापसी के लिए जानकारी देने पर 5 मिलियन डॉलर का इनाम भी घोषित किया है.
  • डेनिस कॉयल को जनवरी 2025 में हिरासत में लिया गया था. वे कोलोराडो के एक अकादमिक हैं और करीब दो दशकों तक अफगानिस्तान में काम कर चुके हैं. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन मामलों में तालिबान ने अब तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया है. यही वजह है कि अमेरिका ने इस कड़े कदम का सहारा लिया.

’लोगों को गलत तरीके से हिरासत में रखने को बढ़ावा देने वाला देश’ घोषित करने का मतलब क्या है?

यह अमेरिका द्वारा बनाया गया एक नया कूटनीतिक दर्जा है. इसके तहत उन देशों को सूची में डाला जाता है जो विदेशी नागरिकों को गलत तरीके से हिरासत में रखते हैं और उन्हें राजनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल करते हैं. यह सूची आतंकवाद समर्थक देशों की सूची की तरह ही दबाव बनाने का एक कूटनीतिक तरीका मानी जाती है.

अमेरिका ने अफगानिस्तान पर यह आरोप क्यों लगाया?

अमेरिका का कहना है कि तालिबान सरकार विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर उन्हें ‘बर्गेनिंग टूल’ की तरह इस्तेमाल करती है. यानी किसी नीति या रियायत के बदले उनकी रिहाई की बात करती है. अमेरिका इसे ‘होस्टेज डिप्लोमेसी’ यानी बंधक कूटनीति कहता है.

क्या इससे अमेरिका-अफगानिस्तान संबंध और खराब होंगे?

इस फैसले से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है. तालिबान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में अमेरिका का यह कदम उसकी कूटनीतिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा सकता है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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