अमेरिका-ईरान डील के बाद भारत आने वाले 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया, 10 से ज्यादा जहाज अभी भी क्षेत्र में मौजूद


इन जहाजों में तीन कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं, जिनमें से हर एक में 2,85,000 मीट्रिक से ज्यादा कच्चा तेल है, साथ ही विदेशी झंडे वाला एक एलपीजी वाहक, विदेशी झंडे वाला एक कच्चे तेल का टैंकर और विदेशी झंडे वाले छह भारी मालवाहक पोत भी हैं, जिनमें खाद लदी है।

अमेरिका-ईरान डील के बाद भारत आने वाले 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया, 10 से ज्यादा जहाज अभी भी क्षेत्र में मौजूद

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता भारत के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है। पश्चिम एशिया में टकराव खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत आने वाले 11 जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया है, जो निश्चित तौर पर तेल और गैस की दिक्कत का सामना कर रहे देश के लिए राहत भरी खबर है।

वहीं शांति समझौते के तहत ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि वह पश्चिम एशिया में हो रही गतिविधियों पर नजर रख रहा है और भारत की तेल और ऊर्जा की आपूर्ति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता में कहा, “आज की स्थिति के अनुसार, भारतीय झंडे वाले हमारे 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में हैं। इसके अलावा, हाल ही में दो और जहाज वहां पहुंचे हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘सत्रह जून को एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद से, भारत आने वाले 11 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं।”

जायसवाल ने बताया कि इन जहाजों में भारतीय झंडे वाले तीन कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं, जिनमें से हर एक में 2,85,000 मीट्रिक से ज्यादा कच्चा तेल है, साथ ही विदेशी झंडे वाला एक एलपीजी वाहक, विदेशी झंडे वाला एक कच्चे तेल का टैंकर और विदेशी झंडे वाले छह भारी मालवाहक पोत भी हैं, जिनमें खाद लदी है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत के झंडे वाले बाकी जहाज भी जल्द ही होर्मुज पार कर सकेंगे।”

पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत रहा है। ईरानी कच्चे तेल पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटने से जुड़े एक सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा, “हम पश्चिम एशिया से जुड़ी सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। जहां तक हमारी ऊर्जा आपूर्ति का सवाल है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हमारी नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि 1.4 अरब लोगों को किफायती कीमतों पर और अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा मिल सके। यह लगातार हमारी नीति रही है।”

रणधीर जायसवाल ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि भारत के फलस्तीन के साथ दशकों से अच्छे संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी विकास साझेदारी रूपरेखा के तहत, हमने फलस्तीन में कई विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा, “इसके अलावा, हमने कई मौकों पर फलस्तीनी लोगों को मानवीय सहायता दी है। हम भविष्य में भी ऐसी मदद देना जारी रखेंगे।”

जयसवाल ने इस दौरान भारत-यूएई रक्षा साझेदारी से जुड़े एक सवाल का भी जवाब दिया।उन्होंने कहा, “संयुक्त अरब अमीरात के साथ यह रिश्ता बहुत अहम है।” उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में इस रिश्ते में काफी सुधार आया है और इसमें रक्षा साझेदारी अहम भूमिका निभाती है।




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