अमेरिका की टॉप-सीक्रेट लैब्स के 10 साइंटिस्ट अचानक लापता, क्या मारे गए? ‘रहस्यमयी’ मौतों का असली सच है क्‍या!


अमेरिका की टॉप-सीक्रेट लैब्स और विज्ञान रिसर्च से जुड़े 10 लोग अचानक या तो लापता हो गए हैं या फिर रहस्यमयी तरीके से मारे गए हैं. ऐसा दावा इंटरनेट पर हो रहा है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि इसके पीछे साइबर जासूसों का हाथ है. विदेशी ताकतों की साजिश है या फिर कोई गहरा एलियन कनेक्शन है. सुनने में ये एकदम हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म जैसा लगता है? लेकिन ठहरिए! इसके पीछे एक और कहानी है. जो लोग मारे गए हैं या लापता हैं, उनके परिवार इसे साज‍िश या मनोरंजक कहानी बता रहे हैं.तो आख‍िर सच है क्‍या?

कार्ल ग्रेलमेयर: जब एक खुन्नस खाए पड़ोसी ने ले ली जान

सबसे पहले बात करते हैं 67 साल के कार्ल ग्रेलमेयर की. कार्ल कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के AIPAC साइंस एंड डेटा सेंटर में एस्‍ट्रोनॉमी और ग्रह विज्ञान के एक जाने-माने वैज्ञानिक थे. इसी साल फरवरी में कैलिफोर्निया के ल्लानो स्थित उनके घर पर उन्हें गोली मार दी गई. इंटरनेट पर बैठे लोगों ने फौरन इसे सीक्रेट मिशन से जोड़ दिया. लेकिन कार्ल की पत्नी लुईस ग्रेलमेयर इन बातों पर माथा पीट लेती हैं. वो कहती हैं, अगर कार्ल जिंदा होते, तो अपनी ही हत्या की इन मनगढ़ंत साजिशों पर खूब हंसते. मुझे लगता है कि ये पूरी तरह बकवास है. तथ्य स्पष्ट हैं और सबके सामने हैं.

तो असली कहानी क्या है?

लुईस ने कहा, कार्ल की हत्या किसी अंतरराष्ट्रीय जासूस ने नहीं, बल्कि 29 साल के एक स्थानीय सनकी लड़के फ्रेडी स्नाइडर ने की थी. हत्या से कुछ महीने पहले एक आदमी बंदूक लेकर उनके घर में घुस आया और बोला कि वो कोयोट यानी एक जंगली जानवर का शिकार कर रहा है. लुईस ने उसे घर के पास पहाड़ी का रास्ता दिखा दिया.

वो आदमी इलाके के दूसरे घरों में भी खुराफात कर रहा था, तो किसी पड़ोसी ने पुलिस बुला ली. उस आदमी को लगा कि पुलिस कार्ल ने बुलाई है. हत्या से दो हफ्ते पहले वो बेसबॉल बैट लेकर धमकाने भी आया था. फिर 16 फरवरी को उसने कार्ल की गोली मारकर हत्या कर दी. पुलिस ने फ्रेडी को पकड़ लिया है और उस पर हत्या का मुकदमा चल रहा है. ये बदला लेने का एक सीधा सा, लेकिन बेहद दुखद मामला था.

क्या कोई नया पैटर्न है?

अब आप कहेंगे कि चलो एक मर्डर हो गया, लेकिन बाकी के 9 लोगों का क्या? साइंस रिसर्चर और स्‍यूडो साइंस की पोल खोलने वाले मिक वेस्ट ने सबस्टैक पर इस पूरे नैरेटिव की हवा निकाल दी है. उन्होंने लिखा, अमेरिका के एयरोस्पेस और परमाणु उद्योगों में करीब 7 लाख लोग काम करते हैं. 22 महीनों की अवधि के सामान्य मृत्यु दर के हिसाब से, इस आबादी में लगभग 4,000 मौतें, 70 हत्याएं और 180 आत्महत्याएं होनी चाहिए थीं. जबकि इस रहस्यमयी लिस्ट में सिर्फ 10 लोग शामिल हैं. मौतें वास्तविक हैं. परिवारों का दुख वास्तविक है. लेकिन यह पैटर्न वास्तविक नहीं है. मतलब साफ है. मौतों को जबरदस्ती एक धागे में पिरोकर साजिश का रूप दिया जा रहा है. लुईस कहती हैं कि कार्ल होते तो इन दावों को तर्क देकर ही खारिज कर देते.

जनरल मैककॉसलैंड: यूएफओ, एलियंस और लापता होने का सच

इस लिस्ट में सबसे हाई-प्रोफाइल नाम है रिटायर्ड एयरफोर्स जनरल विलियम नील मैककॉसलैंड का. 27 फरवरी को वो न्यू मैक्सिको स्थित अपने घर से गायब हो गए. जैसे ही ये खबर उड़ी, यूएफओ और एलियन थ्योरी वालों को तो जैसे खजाना मिल गया. दावा किया जाने लगा कि जनरल साहब के पास राइट-पैटर्सन एयर फोर्स बेस, जहां कथित तौर पर 1947 के रोसवेल क्रैश के बाद एलियंस के अवशेष रखे गए थे, उसके खुफिया राज थे.

लेकिन उनकी पत्नी सुसान ने फेसबुक पर आकर इन फर्जी खबरों की बखिया उधेड़ दी. उन्होंने ल‍िखा,मैककॉसलैंड 13 साल पहले ही रिटायर हो चुके थे और उनके पास अब केवल सामान्य सुरक्षा क्लीयरेंस था. गायब होने वाले दिन वो फोन घर पर छोड़ गए थे, लेकिन अपनी बंदूक साथ ले गए थे, जो वो आमतौर पर नहीं करते थे. वो काफी समय से एंग्जायटी, कमजोर याददाश्त और अनिद्रा से जूझ रहे थे. उन्होंने सुसान से कहा भी था, अगर मेरा शरीर और दिमाग ऐसे ही खराब होता रहा, तो मैं ऐसे जीना नहीं चाहता.

बाकी ‘लापता’ लोगों की हकीकत

मेलिसा कैसिलास: लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी में असिस्टेंट. वो गायब नहीं हुईं, बल्कि अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थीं. उनके पति मार्क ने अगस्त 2025 में फेसबुक पर लिखा कि हमें पता है तुम ठीक हो, बस तुमने फोन क्यों नहीं किया ये समझ नहीं आ रहा.

नूनो लौरेइरो: इनकी हत्या इनके ही एक पूर्व सहपाठी ने की थी, जिसने ब्राउन यूनिवर्सिटी में भी हत्याएं की थीं और पुलिस को मिले एक वीडियो में अपना जुर्म कबूला था.

एक रिसर्चर जिसके माता-पिता की कुछ ही घंटों के अंतराल में मौत हो गई (पिता को मां की बाहों में हार्ट अटैक आया था), वो सदमे में टूट गया और बाद में एक झील में उसका शव मिला. एक अन्य वैज्ञानिक की 59 साल की उम्र में एथेरोस्क्लेरोसिस से प्राकृतिक मौत हुई. ऐसे कई लोग हैं ज‍िनका ज‍िक्र सोशल मीड‍िया में खूब हो रहा है, लेकिन वह सच नहीं है.



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