नई दिल्ली. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले कई देशों के प्रतिनिधिमंडल उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर पहले से अलर्ट रहते हैं. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति और यूक्रेन के नेताओं के साथ उनकी बातचीत के दौरान भी कई बार ऐसा देखने को मिला है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि ऐसे में भारत भी कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और बेहद सोच-समझकर आगे बढ़ रहा है. यही वजह है कि अमेरिका के साथ बातचीत और संभावित मुलाकातों को लेकर भारत का रुख फिलहाल काफी सतर्क और सावधानी भरा है.
यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ ऐसा किया किया था, जिसके बाद भारत को ये सतर्कता बरतनी पड़ी. ये दोनों ही घटनाएं व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई थीं. तो चलिए जानते हैं इसके बारे में…
ट्रंप ने रामाफोसा को असहज कर दिया
मई 2025 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अमेरिका के व्हाइट हाउस पहुंचे थे. डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के दौरान अचानक माहौल बदल गया. ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका के विपक्षी नेता जूलियस मालेमा का एक वीडियो दिखाया, जिसमें वह ‘Shoot The Boer’ का नारा लगाते नजर आए. ट्रंप ने इसके साथ दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों के खिलाफ हिंसा से जुड़े कुछ लेख भी पेश किए. इस दौरान उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में श्वेत लोगों के कथित नरसंहार का मुद्दा भी उठाया. ट्रंप ने इस बैठक में रामाफोसा के सामने इन दावों को लेकर कई सवाल रखे, जिसने उन्हें असमंजस में डाल दिया.
हालांकि, रामाफोसा ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बनाए रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी नेता के राजनीतिक नारे को दक्षिण अफ्रीकी सरकार की नीति नहीं माना जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण अफ्रीका में अपराध किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है और इसका असर अलग-अलग समुदायों पर पड़ता है. बैठक का माहौल भले ही तनावपूर्ण रहा, लेकिन रामाफोसा ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश जारी रखी. उन्होंने अमेरिका के एक प्रतिनिधिमंडल को दक्षिण अफ्रीका आने और वहां निवेश के अवसर तलाशने का न्योता भी दिया. इस मुलाकात के दौरान ट्रंप का आक्रामक रुख और रामाफोसा का शांत जवाब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का प्रमुख हिस्सा बन गया.
जेलेंस्की के साथ डोनाल्ड ट्रंप की तीखी बहस
यह घटना 28 फरवरी 2025 को हुई थी और इसे अमेरिका-यूक्रेन संबंधों के सबसे असाधारण सार्वजनिक टकरावों में गिना गया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में बैठक कैमरों के सामने ही तीखी बहस में बदल गई. जेलेंस्की अमेरिका से यूक्रेन को आगे भी समर्थन और रूस के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी हासिल करना चाहते थे. वहीं ट्रंप का मुख्य जोर रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म कराने और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने पर था. बैठक में यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर अमेरिका-यूक्रेन के बीच एक मिनरल्स डील पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी. लेकिन विवाद के बाद यह समझौता साइन नहीं हो सका.
बहस कैसे शुरू हुई?
बैठक के दौरान ट्रंप और वेंस ने जेलेंस्की पर सवाल उठाया कि वह युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते पर पर्याप्त रूप से आगे क्यों नहीं बढ़ रहे हैं. वेंस ने कहा कि अमेरिका कूटनीति के जरिए युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रहा है. इस पर जेलेंस्की ने रूस और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा नहीं करने की बात कही और पिछले वर्षों में रूस के साथ हुए समझौतों और उनके टूटने का हवाला दिया. जेलेंस्की ने वेंस से लगभग चुनौती देते हुए पूछा कि वह किस तरह की कूटनीति की बात कर रहे हैं. वेंस ने जवाब दिया कि वह ऐसी कूटनीति की बात कर रहे हैं जिससे यूक्रेन में जारी तबाही खत्म हो.
फिर ट्रंप भी भड़क गए
इसके बाद बातचीत और ज्यादा तीखी हो गई. ट्रंप ने जेलेंस्की से कहा कि यूक्रेन इस समय मजबूत स्थिति में नहीं है और अमेरिका के समर्थन के बिना उसकी स्थिति और मुश्किल हो सकती है. ट्रंप ने जेलेंस्की पर अमेरिका के प्रति पर्याप्त आभार नहीं दिखाने का आरोप भी लगाया. उन्होंने यह तक कहा कि जेलेंस्की युद्ध को लेकर जोखिम भरा खेल खेल रहे हैं और इससे तीसरे विश्व युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है. जेलेंस्की ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिकी जनता को कई बार धन्यवाद दिया है. लेकिन ट्रंप और वेंस लगातार उन पर दबाव बनाते रहे.
‘आपके पास कार्ड नहीं हैं’
बहस के दौरान ट्रंप का एक चर्चित बयान सामने आया. उन्होंने जेलेंस्की से कहा कि ‘आपके पास अभी कार्ड नहीं हैं’ और अमेरिका के साथ होने पर ही यूक्रेन के पास मजबूत स्थिति होगी. जेलेंस्की ने जवाब दिया कि वह कोई कार्ड नहीं खेल रहे हैं और इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं.
बैठक अचानक खत्म हो गई
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ट्रंप ने कैमरों के सामने ही बैठक समाप्त कर दी. बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने जेलेंस्की और उनकी टीम को व्हाइट हाउस से जाने के लिए कहा. प्रस्तावित मिनरल्स डील पर हस्ताक्षर नहीं हुए और दोनों देशों के रिश्तों में तनाव खुलकर सामने आ गया. ट्रंप ने बाद में कहा कि उन्हें लगा कि जेलेंस्की उस समय शांति के लिए तैयार नहीं थे और वे तभी वापस आएं जब वे शांति वार्ता के लिए तैयार हों.




