USS Gerald R Ford: US aircraft carrier deployment | Iran War News- अमेरिका पहुंचा ‘समंदर का सिकंदर’, ईरान में नहीं चला जलवा


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erald Ford Aircraft Carrier: अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर जेराल्ड आर. फोर्ड अब अपने मिशन को पूरा करके वापस आ गया है. यह दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है. इस जहाज की वापसी के बाद इस पर मौजूद नाविकों के परिवार ने राहत की सांस ली है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस पर मौजूद नाविक काफी परेशान थे. कई नाविकों का कहना था कि वह लौटते ही इस्तीफा दे देंगे. आइए जानें क्यों?

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जेराल्ड फोर्ड वापस लौटा. (AI Image)

Gerald Ford Aircraft Carrier: दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर जेराल्ड आर. फोर्ड आखिरकार अमेरिका पहुंच गया है. करीब एक साल तक यह समुद्र में रहा और कई बड़े सैन्य मिशनों का हिस्सा रहा. शनिवार को फोर्ड वर्जीनिया के नॉरफॉक पोर्ट पर लौट आया. यह सिर्फ एक वापसी नहीं थी, बल्कि उन परिवारों के लिए राहत का पल था, जिनके लोग इस जहाज पर थे. क्योंकि इस मिशन पर तैनात ज्यादातर अमेरिकी सैनिक लंबे और तनाव भरे मिशन का हिस्सा रहे. रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती वियतनाम युद्ध के बाद किसी भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की सबसे लंबी ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट रही. इस दौरान यह जहाज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कई बड़ी सैन्य रणनीतियों का केंद्र बना रहा, जिसमें वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और ईरान के साथ युद्ध जैसे ऑपरेशन शामिल थे. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था, यह अमेरिका के लिए ताकत से ज्यादा उसके अपमान का कारण बन रहा था. इसी वजह से इसे तुरंत वापस होना पड़ा.

परिवारों के लिए क्यों है राहत?

जैसे ही जहाज नॉरफॉक पहुंचा, वहां मौजूद परिवारों ने अपने प्रियजनों का जोरदार स्वागत किया. हाथों में ‘मैंने आपको याद किया! खुशी है आप लौट आए’ जैसे पोस्टर लिए लोग भावुक नजर आए. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी इस मौके पर मौजूद रहे. उन्होंने कहा, ‘फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने जो किया, वह शानदार और असाधारण है.’ इस जहाज का पहुंचना नाविकों के परिवारों के लिए राहत भरी खबर थी. क्योंकि लगातार ऐसी खबरें आ रही थीं कि लंबी तैनाती से सैनिक परेशान हैं. शारीरिक और मानसिक रूप से सैनिक थके हुए थे. कुछ ने तो यह तक कहा कि वह लौटते ही नौकरी छोड़ देंगे. वहीं परिवारों का कहना था कि कई दिनों तक बात नहीं हो पाती और न ही सैनिकों को खाने-पीने का सामान मिल पा रहा है.

टॉयलेट खराब हुए, आग भी लगी

आमतौर पर ऐसे एयरक्राफ्ट कैरियर को 7 महीने के लिए तैनात किया जाता है, लेकिन यह मिशन 11 महीने तक खिंच गया. एडमिरल डैरिल कॉडल ने भी माना कि इतनी लंबी तैनाती सामान्य नहीं होनी चाहिए और भविष्य में इसे दोहराने से बचना चाहिए. इस जहाज में पहले ही टॉयलेट की खराबी की बात सामने आई थी, जिस कारण यात्रा आसान नहीं रही. मार्च में ईरान युद्ध के दौरान जहाज के लॉन्ड्री एरिया में आग लग गई, जिसे बुझाने में करीब 30 घंटे लगे. इस दौरान करीब 600 नाविकों को अपने रहने की जगह छोड़नी पड़ी. हालांकि किसी को गंभीर चोट नहीं आई.

मिशन में क्यों था अहम?

करीब 13 अरब डॉलर की लागत वाला यह जहाज अमेरिकी सैन्य अभियानों में बेहद अहम साबित हुआ. वेनेजुएला ऑपरेशन में इसी से विमान उड़ाए गए, वहीं ईरान युद्ध में यह लगातार फाइटर जेट्स लॉन्च करने का प्लेटफॉर्म बना रहा. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस जहाज का एडवांस इलेक्ट्रॉनिक कैटापल्ट सिस्टम इसे खास बनाता है, जिससे छोटे ड्रोन से लेकर बड़े लड़ाकू विमान तक लॉन्च किए जा सकते हैं, जो अमेरिका के बाकी 10 कैरियर में नहीं है.

सफर कैसा रहा?

पिछले साल जून में वर्जीनिया से निकलने के बाद यह जहाज पहले अटलांटिक पार कर भूमध्य सागर और नॉर्वे गया. जनवरी में इसे वेनेजुएला ऑपरेशन के लिए कैरेबियन भेजा गया और फिर मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध के दौरान तैनात किया गया. करीब 11 महीने बाद अब यह जहाज घर लौटा है.

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Yogendra Mishra

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें



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