दिसंबर में घूमने के लिए बेस्ट है उत्तराखंड के ये ट्रैक, IRCTC Tourism की गाइड में जानें खासियत


दिसंबर का महीना आते ही उत्तराखंड की वादियां बर्फ की सफेद चादर से ढकने लगती हैं. ऊंचे पहाड़ों पर गिरती बर्फ, देवदार और ओक के जंगलों से गुजरते रास्ते, जमी हुई झीलें और दूर तक फैले खूबसूरत बुग्याल सर्दियों में यहां की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं. अगर आप भी इस बार दिसंबर की छुट्टियों में कुछ रोमांचक करने का प्लान बना रहे हैं, तो उत्तराखंड के ट्रैकिंग रूट आपके लिए शानदार विकल्प हो सकते हैं. यहां आपको बर्फ के बीच पैदल चलने, हिमालय की ऊंची चोटियों को करीब से देखने और पहाड़ों के शांत वातावरण में कुछ दिन बिताने का मौका मिलता है. IRCTC Tourism से मिली जानकारी के अनुसार दी गई जानकारी को जरूर पढ़ें…

कुआरी पास ट्रेक क्यों है खास?

1. सर्दियों में बर्फ से ढके रास्ते: सर्दियों के मौसम में कुआरी पास के रास्ते बर्फ की सफेद चादर से ढक जाते हैं. यहां खुले मैदानों, जंगलों और पहाड़ी ढलानों पर जमी बर्फ के बीच चलने का अनुभव मिलता है. चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़ और शांत वातावरण इस ट्रेक को खास बनाते हैं.

2. कर्जन ट्रेल का ऐतिहासिक रास्ता: कुआरी पास ट्रेक को कर्जन ट्रेल भी कहा जाता है. इसका संबंध ब्रिटिश भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन से है, जिन्होंने इस रास्ते की यात्रा की थी. इस वजह से ट्रेक में प्राकृतिक खूबसूरती के साथ इतिहास की झलक भी देखने को मिलती है.

3. हिमालय की ऊंची चोटियों का नजारा: कुआरी पास से हिमालय की कई प्रसिद्ध चोटियों का शानदार नजारा दिखाई देता है. इनमें नंदा देवी, कामेट, चौखंबा, द्रोणागिरी, चांगबांग, नीलकंठ और कुंती भंडार जैसी चोटियां शामिल हैं. ट्रेक के दौरान अलग-अलग जगहों से पहाड़ों के नजारे बदलते रहते हैं.

4. नंदा देवी क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती: इस ट्रेक के दौरान नंदा देवी और आसपास के हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है. नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है. यहां के जंगल, ऊंचे पहाड़ और वन्य प्राकृतिक वातावरण इस यात्रा को यादगार बनाते हैं.

5. गढ़वाल के गांवों की झलक: रास्ते में तुगासी और अपर तुगासी जैसे पहाड़ी गांव आते हैं. यहां आपको पहाड़ों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक घरों को करीब से देखने का मौका मिलता है.

6. ताली झील और तारों से भरा आसमान: ताली झील इस ट्रेक के आकर्षणों में शामिल है. सर्दियों में इसका पानी जम सकता है और आसपास बर्फ से ढकी चोटियों का नजारा बेहद खूबसूरत लगता है. वहीं, पिपलकोटी के कैंपसाइट पर साफ मौसम में रात के समय आसमान में चमकते तारे देखना भी एक खास अनुभव हो सकता है.

7. औली घूमने का मौका: कुआरी पास ट्रेक के पास ही औली स्थित है, जो अपनी बर्फबारी, स्कीइंग और हिमालय के खूबसूरत नजारों के लिए मशहूर है. मौसम और ट्रेक के रास्ते की स्थिति अनुकूल होने पर वापसी में औली से होकर आने का मौका मिल सकता है.

कुआरी पास ट्रेक के प्रमुख आकर्षण

तुगासी गांव: ट्रेक की शुरुआत तुगासी गांव से होती है. यहां से धीरे-धीरे चढ़ाई शुरू होती है और रास्ता घने ओक के जंगलों से होकर गुजरता है. सर्दियों में पेड़ों की शाखाओं पर जमी बर्फ और दूर दिखाई देते पहाड़ इस सफर को खूबसूरत बना देते हैं.

ताली फॉरेस्ट: आगे बढ़ने पर ताली का घना जंगल आता है. यहां ऊंचे चीड़ और ओक के पेड़ दिखाई देते हैं. सर्दियों में पेड़ों और जमीन पर जमी बर्फ के बीच से गुजरना किसी अलग ही दुनिया में पहुंचने जैसा लगता है. जंगल का शांत वातावरण ट्रेकर्स को प्रकृति के करीब ले जाता है.

कुआरी पास: इस ट्रेक का मुख्य आकर्षण कुआरी पास है, जो समुद्र तल से लगभग 3,900 मीटर यानी 12,750 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यहां पहुंचने के बाद चारों तरफ फैली हिमालय की ऊंची चोटियां दिखाई देती हैं. लंबे सफर और चढ़ाई के बाद मिलने वाला यह नजारा ट्रेक की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक है.

गोरसों बुग्याल: वापसी के रास्ते में गोरसों बुग्याल आता है. बुग्याल का मतलब होता है ऊंचाई पर स्थित हरा-भरा घास का मैदान. सर्दियों में यह पूरा इलाका बर्फ से ढक जाता है. यहां से नंदा देवी सहित आसपास की हिमालयी चोटियों के खूबसूरत दृश्य दिखाई देते हैं.

6 दिनों में कैसे पूरा होगा कुआरी पास ट्रेक?

पहला दिन: ऋषिकेश से पिपलकोटी

दूरी: लगभग 220 किलोमीटर

समय: 9 से 10 घंटे

ऊंचाई: लगभग 1,350 मीटर (4,400 फीट)

पहले दिन ऋषिकेश से सड़क मार्ग के जरिए पिपलकोटी पहुंचना होता है. पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए इस सफर में लगभग 9 से 10 घंटे लगते हैं. पिपलकोटी इस ट्रेक का बेस कैंप है. यहां पहुंचकर अगले दिन की तैयारी की जाती है. अगर आपने ट्रेक ऑपरेटर के जरिए परिवहन बुक किया है, तो उसकी उपलब्धता पहले से जांच लें.

दूसरा दिन: पिपलकोटी से गुलिंग टॉप

पिपलकोटी से तुगासी तक दूरी: 50 किलोमीटर

ड्राइविंग समय: 2 से 3 घंटे

ट्रेक दूरी: 3 किलोमीटर

ट्रेकिंग समय: 2 से 3 घंटे

तुगासी की ऊंचाई: 2,450 मीटर

गुलिंग टॉप की ऊंचाई: 2,850 मीटर

दूसरे दिन पिपलकोटी से गाड़ी के जरिए तुगासी गांव पहुंचेंगे. यहां से पैदल चढ़ाई शुरू होगी. रास्ते में घने जंगल, पहाड़ी पगडंडियां और बर्फ से ढके रास्ते देखने को मिलेंगे. लगभग 3 किलोमीटर चलने के बाद गुलिंग टॉप पहुंचेंगे, जहां रात में कैंपिंग की जाती है.

तीसरा दिन: गुलिंग टॉप से ताली फॉरेस्ट कैंप

दूरी: 5 किलोमीटर

समय: 4 से 5 घंटे

ऊंचाई: लगभग 3,350 मीटर (11,100 फीट)

इस दिन का सफर ताली फॉरेस्ट कैंप तक होगा. रास्ते में घने ओक और चीड़ के जंगल मिलते हैं. ऊंचाई बढ़ने के साथ आसपास के पहाड़ों और बर्फ से ढकी चोटियों के नजारे और साफ दिखाई देने लगते हैं. यहां पहुंचकर कैंप में रात बिताई जाती है.

चौथा दिन: ताली फॉरेस्ट कैंप से कुआरी पास और वापसी

कुल ट्रेक दूरी: 10 से 11 किलोमीटर

समय: 8 से 9 घंटे

खुलारा टॉप की ऊंचाई: 3,650 मीटर (12,000 फीट)

कुआरी पास की ऊंचाई: 3,900 मीटर (12,750 फीट)

यह ट्रेक का सबसे महत्वपूर्ण और लंबा दिन है. इस दिन खुलारा टॉप होते हुए कुआरी पास तक पहुंचना होता है. रास्ते में ऊंचाई बढ़ने के साथ हिमालय की विशाल चोटियां नजर आने लगती हैं. कुआरी पास पहुंचकर नंदा देवी, चौखंबा और द्रोणागिरी जैसी चोटियों का शानदार नजारा देखा जा सकता है. यहां कुछ समय बिताने के बाद वापस ताली फॉरेस्ट कैंप लौटना होता है.

पांचवां दिन: ताली कैंप से गोरसों बुग्याल और औली होते हुए पिपलकोटी

ट्रेक दूरी: लगभग 9 किलोमीटर

ट्रेकिंग समय: 6 से 7 घंटे

ताली झील की ऊंचाई: 3,550 मीटर

गोरसों बुग्याल की ऊंचाई: 3,400 मीटर

औली की ऊंचाई: लगभग 2,900 मीटर

औली से पिपलकोटी तक ड्राइव: लगभग 45 किलोमीटर

इस दिन वापसी का रास्ता ताली झील, गोरसों बुग्याल और औली से होकर हो सकता है. ताली झील के आसपास का शांत वातावरण और गोरसों बुग्याल के खुले मैदान इस सफर को खास बनाते हैं. इसके बाद औली पहुंचकर वहां की खूबसूरती देख सकते हैं और फिर गाड़ी से पिपलकोटी लौट सकते हैं. हालांकि, बर्फबारी और मौसम की स्थिति अनुकूल न होने पर ट्रेक ऑपरेटर तुगासी वाले रास्ते से वापसी करा सकता है.

छठा दिन: पिपलकोटी से ऋषिकेश

दूरी: लगभग 220 किलोमीटर

समय: करीब 9 घंटे

आखिरी दिन पिपलकोटी से सड़क मार्ग के जरिए ऋषिकेश लौटना होता है. इसके साथ ही आपका छह दिनों का कुआरी पास ट्रेक पूरा हो जाता है.

ट्रेक पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

कुआरी पास एक ऊंचाई वाला हिमालयी ट्रेक है. यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और सर्दियों में बर्फबारी के कारण रास्ते मुश्किल हो सकते हैं. इसलिए गर्म कपड़े, अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज, दस्ताने, टोपी, रेन प्रोटेक्शन और जरूरी दवाइयां साथ रखें. ऊंचाई पर शरीर को ढलने के लिए समय दें और ट्रेक गाइड की सलाह का पालन करें. जाने से पहले मौसम, बर्फ की स्थिति और ट्रेक की मौजूदा अनुमति से जुड़ी जानकारी जरूर ले लें.



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