Space Data Center: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने इंटरनेट की दुनिया में क्रांति ला दिए हैं. इनका जमकर इस्तेमाल हो रहा है. मगर किसी को पता नहीं है ये हमारी धरती के लिए कितना खतरनाक हैं. इनकी वजह से ऊर्जा और संसाधनों का भारी संकट खड़ा हो गया है. इन एआई डेटा सेंटर्स को चलाने बहुत ज्यादा मात्रा में बिजली चाहिए होता है. साथ ही उनके विशाल सर्वरों को ठंडा रखने के लिए बेतहाशा पानी की जरूरत होती है. इसकी वजह से धरती पर एक अलग ही समस्या खड़ी हो गई है. इस समस्या को दूर करने के लिए टेक दिग्गजों ने एक अनोखा और हाई-टेक समाधान खोजा जा रहा है. अब स्पेस में डेटा सेंटर बनाने की तैयारी की जा रही है. जी हां, गूगल और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क स्पेस में डेटा सेंटर बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी Google अपने एआई डेटा सेंटर्स को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने के लिए एलन मस्क की रॉकेट कंपनी SpaceX के साथ एक संभावित लॉन्च डील पर बातचीत कर रही है.
प्रतिद्वंद्वी बनेंगे साझेदार?
दिलचस्प बात यह है कि Google और SpaceX दोनों ही ‘ऑर्बिटल डेटा सेंटर’ के क्षेत्र में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं. इसके बावजूद यह संभावित डील दोनों को एक साथ ला सकती है. जर्नल ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया है कि गूगल अपने अत्याधुनिक उपकरणों को अंतरिक्ष में स्थापित करने के लिए स्पेसएक्स के भारी-भरकम और विश्वसनीय रॉकेट्स का इस्तेमाल करना चाहता है.
एलन मस्क के साथ मिलकर स्पेस में डेटासेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है.
अंतरिक्ष ही क्यों? धरती पर क्या है समस्या?
एआई के तेजी से विकास के कारण डेटा सेंटर्स का आकार और उनकी ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है. धरती पर इन सेंटर्स के विस्तार में कई रुकावटें हैं. जैसे कि पर्याप्त जमीन की कमी, पर्यावरण से जुड़े सख्त नियम और भारी कार्बन फुटप्रिंट. स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क का लंबे समय से इसकी वकालत कर रहे हैं. उनका दावा रहा है कि अंतरिक्ष में एआई डेटा सेंटर स्थापित करना काफी लागत-प्रभावी होगा. अंतरिक्ष में बादलों या मौसम का कोई दखल नहीं होता, इसलिए वहां सूर्य से चौबीसों घंटे सीधे और निरंतर सौर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है. इससे इन सेंटर्स को चलाने और उनके मेंटेनेंस का खर्च लगभग शून्य हो जाएगा. साथ ही, अंतरिक्ष के ठंडे वातावरण के कारण सर्वरों को कूल करने के लिए धरती की तरह पानी की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
अगर SpaceX से बात नहीं बनी तो क्या?
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि Google केवल SpaceX के भरोसे नहीं बैठा है. कंपनी अन्य प्रमुख रॉकेट-लॉन्च कंपनियों के साथ भी समानांतर बातचीत कर रही है. अगर एलन मस्क के साथ डील किसी वजह से फाइनल नहीं होती है, तो गूगल के पास अन्य विकल्प मौजूद हैं. वह जेफ बेजोस के स्वामित्व वाली Blue Origin, ऑर्बिटल लॉन्च में विशेषज्ञता रखने वाली Rocket Lab, या United Launch Alliance (ULA) जैसी कंपनियों के साथ भी समझौता कर सकता है.
सुंदर पिचाई का मास्टरप्लान
Google के सीईओ सुंदर पिचाई भी अंतरिक्ष में भविष्य की टेक्नोलॉजी को लेकर काफी आशान्वित हैं. पिछले साल के अंत में फॉक्स न्यूज से बात करते हुए पिचाई ने भविष्यवाणी की थी कि ‘अगले एक दशक या उसके आसपास के समय में ऑर्बिटल डेटा सेंटर एक आम बात बन जाएंगे.’ उन्होंने गूगल के रोडमैप का खुलासा करते हुए कहा था कि कंपनी शुरुआत में सैटेलाइट्स के जरिए मशीनों के छोटे रैक अंतरिक्ष में भेजकर उनकी व्यावहारिकता का परीक्षण करेगी. जब यह टेस्टिंग सफल होगी, तो इसे बड़े पैमाने पर ‘स्केल’ किया जाएगा.
स्पेसएक्स और एंथ्रोपिक की महा-डील
मस्क की स्पेसएक्स इस रेस में पहले से ही काफी आगे चल रही है. कंपनी ने हाल ही में दिग्गज एआई स्टार्टअप ‘एंथ्रोपिक’ के साथ भी एक बड़ा समझौता किया है. एंथ्रोपिक को स्पेसएक्स के शक्तिशाली कोलोसस सुपरकंप्यूटर का एक्सेस दिया गया है. स्पेसएक्स के एक बयान के अनुसार, दोनों कंपनियां मिलकर अंतरिक्ष में ‘मल्टीपल गीगावाट की ऑर्बिटल एआई कंप्यूटिंग क्षमता’ विकसित करने पर विचार कर रही हैं. स्पेसएक्स का स्पष्ट रूप से मानना है कि अगली पीढ़ी के एआई को विकसित करने के लिए जितनी विशाल कंप्यूटिंग पावर की जरूरत है, वह अब धरती पर मौजूद संसाधनों के बस की बात नहीं रही. धरती पर समय और जगह की कमी है, जबकि अंतरिक्ष में ‘पृथ्वी को नुकसान पहुंचाए बिना असीमित और टिकाऊ ऊर्जा’ मौजूद है.
किसके साथ मिलकर गूगल अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाएगा?
रिपोर्ट के मुताबिक गूगल अपने एआई डेटा सेंटर्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए एलन मस्क की रॉकेट-लॉन्च कंपनी SpaceX के साथ बातचीत कर रहा है.
एआई डेटा सेंटर्स को धरती की बजाय अंतरिक्ष में क्यों भेजा जा रहा है?
धरती पर विशाल एआई डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली, जमीन और सर्वरों को ठंडा रखने के लिए पानी की जरूरत होती है. अंतरिक्ष में निर्बाध सौर ऊर्जा मिलेगी, जिससे ऊर्जा संकट खत्म होगा और पर्यावरण पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा.
अगर स्पेसएक्स के साथ डील फेल हो जाती है, तो गूगल के पास क्या विकल्प हैं?
अगर स्पेसएक्स से समझौता नहीं होता है, तो गूगल जेफ बेजोस की कंपनी Blue Origin, Rocket Lab या ULA के साथ डील कर सकता है.
अंतरिक्ष में डेटा सेंटर्स को लेकर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का क्या प्लान है?
सुंदर पिचाई का मानना है कि अगले एक दशक में ऑर्बिटल डेटा सेंटर एक नई सच्चाई होंगे.





