Sharad Purnima 2026 Taj Mahal night viewing tickets full | शरद पूर्णिमा पर ‘चमकी’ का जादू: क्या होती है ताज की ‘चमकी’? जानिए शरद पूर्णिमा की रात कैसे


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Sharad Purnima 2026 Taj Mahal: 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा. शरद पूर्णिमा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति की सुंदरता का उत्सव भी है. एक ओर चंद्रमा की उजली चांदनी और दूसरी ओर ताजमहल की मनमोहक छटा इस रात को यादगार बना देती है. यही वजह है कि लोग इस अवसर पर ताजमहल का दीदार करना पसंद करते हैं.

Sharad Purnima 2026 Taj Mahal: 25 अक्टूबर दिन रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है, हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को यह पावन पर्व मनाया जाता है. इस रात आसमान में चमकता पूर्ण चंद्रमा, दूधिया चांदनी और धार्मिक मान्यताएं लोगों के मन में एक अलग ही उत्साह पैदा करती हैं. उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित ताजमहल को भी शरद पूर्णिमा की रात निहारने का खास आकर्षण रहता है. सफेद संगमरमर से बना यह ऐतिहासिक स्मारक चांदनी में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है, जिसकी वजह से देश-विदेश से पर्यटक इसे देखने के लिए उत्सुक रहते हैं.

सभी टिकट हो गईं बुक – ताजमहल के पूर्णिमा पर माह में पांच दिन होने वाले रात्रि दर्शन की शुरुआत 24 अक्टूबर यानी आज से होगी और 28 अक्टूबर तक चलेगा. हर दिन आधे-आधे घंटे के आठ स्लॉट में रात 8 बजे से लेकर मध्यरात्रि तक ताजमहल का दीदार कर सकेंगे. 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा की चांदनी जब ताजमहल पर पड़ेगी, तब अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा, जिसके लिए पर्यटकों में खूब क्रेज देखने को मिल रहा है और इस दिन की टिकट तो बहुत पहले ही बुक हो चुकी हैं. 24, 25 और 26 की सभी 1200 टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग हो चुकी है. एक स्लॉट में अधिकतम 50 पर्यटकों का प्रवेश दिया जाएगा.

आस्था और खूबसूरती का संगम – पूर्णिमा की चांदनी रात में पर्यटक ताजमहल की खूबसूरती निहार सकेंगे. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, ताजमहल को हर माह पूर्णिमा के दिन और उससे दो दिन पहले और व दो दिन बाद तक खोला जाता है. अगर आपको शरद पूर्णिमा की रात ताजमहल के दीदार करने का टिकट नहीं मिला है तो मायूस होने की जरूरत नहीं है, इसके लिए भी अलग से इंतजाम किए हए हैं. वे लोग मेहताब बाग स्थिति ताज व्यू प्वाइंट से चांदनी रात में ताजमहल देख सकते हैं.

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चमकी का जादुई नजारा – शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और उसकी चांदनी बेहद सफेद और तेज होती है. जब यह रोशनी ताजमहल के सफेद संगमरमर और उसमें जड़े कीमती पत्थरों पर पड़ती है, तो ताज हीरों की तरह चमक उठता है. इस दृश्य को स्थानीय भाषा में ‘चमकी’ कहा जाता है. एएसआई (ASI) द्वारा हर महीने पूर्णिमा पर और उसके 2 दिन पहले व 2 दिन बाद (कुल 5 दिन) रात 8 बजे से 12 बजे तक रात्रि दर्शन की अनुमति दी जाती है. शरद पूर्णिमा का वातावरण सबसे स्वच्छ और निर्मल होने के कारण इस दिन ताज का निखार देखते ही बनता है.

शरद पूर्णिमा और ताजमहल – ताजमहल अपनी अद्भुत वास्तुकला और सफेद संगमरमर के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी जब इसके संगमरमर पर पड़ती है, तो इसकी खूबसूरती और निखर उठती है. शांत वातावरण में चांदनी से जगमगाता ताजमहल प्रेम, सौंदर्य और इतिहास का अनूठा संगम नजर आता है. हालांकि, शरद पूर्णिमा के अवसर पर ताजमहल का रात्रि दर्शन निर्धारित तिथियों, समय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों के अनुसार होता है.

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व – हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. धार्मिक परंपरा में इस रात की चांदनी को अमृत के समान गुणकारी माना जाता है. कई परिवार इस अवसर पर खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. वैष्णव परंपरा में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला का विशेष महत्व है. वहीं, कई क्षेत्रों में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं.

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