‘2 घंटे में पूरा हो रहा, आधे घंटे का सफर’, ऋषिकेश में टूरिस्ट सीजन शुरू होते ही आई आफत


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Rishikesh News : ऋषिकेश में इन दिनों पर्यटकों का सैलाब आया हुआ है. टूरिस्ट सीजन शुरू होते ही शहर के हर कोने में भीड़ दिखाई दे रही है. होटल और गेस्ट हाउस लगभग फुल चल रहे हैं. सड़कों पर लंबा जाम रोज की समस्या बन गया है. बाहर से आए लोगों की भीड़ स्थानीय कारोबारियों के लिए कमाई का बड़ा मौका है लेकिन ऋषिकेश पर दबाव बढ़ता जा रहा है. 30 सालों से ऋषिकेश में रह रहे विजयकांत लोकल 18 से वे बताते हैं कि हर साल सीजन के दौरान यही हाल रहता है. आरती के समय गंगा घाटों पर भीड़ के चलते कई बार सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बढ़ जाते हैं.

ऋषिकेश. उत्तराखंड का ऋषिकेश इन दिनों पर्यटकों के सैलाब से जूझता नजर आ रहा है. टूरिस्ट सीजन शुरू होते ही शहर के हर कोने में भीड़ का दबाव साफ दिखाई दे रहा है. गंगा घाटों से लेकर लक्ष्मण झूला, राम झूला, कैफे और बाजारों तक लोगों की भारी आवाजाही है. होटल और गेस्ट हाउस लगभग फुल चल रहे हैं. सड़कों पर लंबा जाम अब रोज की समस्या बन गया है. एक ओर यह भीड़ स्थानीय कारोबारियों के लिए कमाई का बड़ा मौका लेकर आई है, लेकिन दूसरी ओर शहर की व्यवस्थाओं पर इसका दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है.

जिसकी तलाश वो नहीं

भीड़ का असर शहर की शांति और आध्यात्मिक माहौल पर भी पड़ रहा है, जिसके लिए ऋषिकेश पूरी दुनिया में जाना जाता है. योग और मेडिटेशन के लिए आने वाले लोगों को अब शोर, ट्रैफिक और भीड़भाड़ के बीच वह सुकून नहीं मिल पा रहा, जिसकी वे तलाश में यहां आते हैं. गंगा घाटों पर बढ़ती भीड़ के चलते कई बार सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बढ़ जाते हैं, खासकर शाम की आरती के दौरान.

कहीं भी घुसा देते हैं गाड़ियां

विजयकांत 30 सालों से ऋषिकेश में रह रहे हैं, लोकल 18 से वे बताते हैं कि हर साल सीजन के दौरान यही हालात बन जाते हैं. पहले जहां किसी जगह पहुंचने में आधा घंटा लगता था, अब वही दूरी तय करने में दो घंटे तक लग जाते हैं. खासकर वीकेंड पर हालात और भी बिगड़ जाते हैं, जब बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है. शहर की संकरी गलियों में भी पर्यटक अपनी गाड़ियां घुसा देते हैं, जिससे न सिर्फ ट्रैफिक जाम बढ़ता है बल्कि स्थानीय लोगों के रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं.

इस वजह से भी समस्या ज्यादा

अभिषेक कहते हैं कि ट्रैफिक के साथ-साथ गंदगी भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. गंगा किनारे और पब्लिक प्लेस पर प्लास्टिक, खाने-पीने का कचरा और बोतलें बड़ी मात्रा में देखी जा सकती हैं. इससे न सिर्फ शहर की सुंदरता प्रभावित होती है बल्कि पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. पार्किंग की कमी, नियमों की अनदेखी, और ट्रैफिक पुलिस की सीमित मौजूदगी भी समस्या को और बढ़ा देती है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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