Donald Trump Praises Mojtaba Khamenei | Iran US Deal Latest News: ईरान में तख्तापलट का ट्रंप का दावा, मोजतबा खामेनेई की तारीफ, US-Iran Deal पर बयान


Donald Trump News: ईरान और अमेरिका के बीच साढ़े तीन महीने तक चले तनाव और युद्ध के बाद आखिरकार समझौता हो ही गया. इस समझौते ने दुनिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. लेकिन इस समझौते से भी ज्यादा चर्चा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन बयानों की हो रही है, जिनमें उन्होंने खुलकर दावा किया कि ईरान में अब ‘रिजीम चेंज’ यानी तख्तापलट हो चुका है. ट्रंप ने यहां तक कहा कि मौजूदा ईरानी नेतृत्व पहले जैसा नहीं है और अब एक नया समूह सामने आया है. दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई की तारीफ करते हुए उन्हें उनके पिता से अलग और बेहतर सोच वाला व्यक्ति भी बताया.

ट्रंप का यह इंटरव्यू ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. इस समझौते के तहत 60 दिनों तक अंतिम समझौते पर बातचीत होगी, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई वार्ताओं का रास्ता तैयार होगा. हालांकि कई अहम मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बनी है. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ताकत की स्थिति से बातचीत की क्योंकि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी थी. उन्होंने यह भी कहा कि अगर युद्ध लंबा खिंचता तो वैश्विक मंदी आ सकती थी, इसलिए समझौता जरूरी था.

ट्रंप के मुताबिक, ‘कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए युद्ध बढ़ाया जाता तो वैश्विक मंदी आ सकती थी. (AP)

क्या सचमुच ईरान में सत्ता परिवर्तन हो गया?

  • Axios को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ‘अगर आप सच्चाई जानना चाहते हैं तो मुझे लगता है कि ईरान में रेजीम चेंज हो चुका है. वे अलग लोग हैं. पहले नेतृत्व खत्म हो गया, फिर दूसरा समूह आया और अब तीसरा समूह सामने है, जिसे मैं सबसे ज्यादा समझदार मानता हूं.’
  • ट्रंप के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. हालांकि ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी सत्ता परिवर्तन की पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन ट्रंप का दावा है कि वर्तमान नेतृत्व पहले के मुकाबले अलग सोच और रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है.
  • ट्रंप ने बातचीत के दौरान मोजतबा खामेनेई का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैंने नए ईरानी नेता से बात नहीं की है. दुर्भाग्य से मोजतबा खामेनेई को नुकसान पहुंचा और उन्हें गंभीर चोटें आईं, लेकिन उनमें साहस है.’ उन्होंने यह भी कहा कि खामेनेई का बेटा अपने पिता से अलग है और ईरान में जो कुछ हो रहा है, वह इसी बदलाव का संकेत है.

होर्मुज की नाकेबंदी ने कैसे बदला खेल?

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में सबसे बड़ी भूमिका नौसैनिक नाकेबंदी की रही. उनके मुताबिक, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव ने ईरान को पहले से कहीं ज्यादा बातचीत के लिए मजबूर किया.’ उन्होंने कहा कि अब हालात सामान्य हो रहे हैं और होर्मुज से अभूतपूर्व संख्या में जहाज गुजर रहे हैं. ट्रंप के अनुसार लगभग 700 जहाज इस अहम समुद्री मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

2015 के परमाणु समझौते पर फिर हमला

ट्रंप ने एक बार फिर बराक ओबामा के दौर में हुए 2015 के ईरान परमाणु समझौते की आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘2015 का परमाणु समझौता एक आपदा था.’ ट्रंप का कहना है कि मौजूदा समझौता पूरी तरह अलग है और इसमें अमेरिका कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है. उन्होंने यहां तक कहा कि यह समझौता ईरान के लिए “बिना शर्त आत्मसमर्पण” जैसा साबित हो सकता है.

युद्ध बढ़ता तो आ सकती थी वैश्विक मंदी: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर संघर्ष को और लंबा खींचा जाता तो उसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता. ट्रंप के मुताबिक, ‘कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए युद्ध बढ़ाया जाता तो वैश्विक मंदी आ सकती थी.’ उन्होंने कहा कि समझौते का उद्देश्य सिर्फ युद्ध रोकना नहीं था, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर रखना भी था. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की कीमतों में भारी उछाल का खतरा पैदा हो गया था.

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल और गैस का निर्यात करता है. अगर यह मार्ग बंद हो जाए तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है. यही वजह है कि अमेरिका और अन्य बड़े देश इस क्षेत्र की स्थिरता को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं.

मोजतबा खामेनेई कौन हैं और उनका नाम चर्चा में क्यों है?

मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं. लंबे समय से उन्हें ईरानी सत्ता में प्रभावशाली माना जाता रहा है. पिता की मौत के बाद वह ईरान के सर्वोच्च नेता हैं.

क्या अमेरिका-ईरान समझौते से पश्चिम एशिया में स्थिरता आएगी?

यह पूरी तरह अंतिम समझौते की शर्तों और दोनों देशों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगा. फिलहाल यह समझौता तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है. लेकिन परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे कई मुद्दे अभी भी बाकी हैं. यदि 60 दिनों की बातचीत सफल रहती है तो पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ सकती है, अन्यथा तनाव फिर से लौटने की आशंका बनी रहेगी.



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