अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है. अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है. इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले भी किए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाने के ऐलान पर भी यूटर्न ले लिया है. अब ट्रंप ने कहा है कि यह शुल्क नहीं लगाया जाएगा. इसकी जगह खाड़ी देशों के अमेरिका में होने वाले निवेश को सुरक्षा लागत की भरपाई माना जाएगा.
चौथे दिन भी जारी रहे अमेरिकी हमले
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास बंदरगाह और सीरिक के आसपास कई जोरदार विस्फोट हुए. यह अमेरिकी हमलों का लगातार चौथा दिन है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह नाकेबंदी पहले अप्रैल से जून के बीच भी लागू की गई थी. अब इसे दोबारा शुरू किया गया है. सेंटकॉम ने बताया कि इस वक्त पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसेना के 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान तैनात हैं.
‘ताकत की भाषा ही समझता है ईरान’
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आया, तो अगले सप्ताह उसके पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे अहम बुनियादी ढांचे पर हमले किए जाएंगे.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका इस समय पीछे हटता है, तो ईरान अपनी सैन्य क्षमता दोबारा खड़ी करने में करीब 20 साल लगा देगा. उन्होंने कहा, ‘इन लोगों से बातचीत करने का एकमात्र तरीका ताकत है और असली ताकत सैन्य ताकत होती है. दो दिन पहले हमारे बीच समझौता हो गया था, लेकिन उन्होंने आखिरी समय में उसे तोड़ दिया.’ ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ‘ईरान पर हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक मैं खुद यह न कह दूं कि अब काफी है.’
खार्ग द्वीप पर भी ट्रंप का बड़ा दावा
ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को लेकर ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना वहां पहले ही दो से तीन बार हमला कर चुकी है. उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं, हमने खार्ग द्वीप पर पहले ही हमला किया है… दो बार, बल्कि तीन बार. मैंने कहा था कि सब कुछ निशाना बनाओ, लेकिन उस छोटे से हिस्से को करीब 25 गज की दूरी तक छोड़ दो, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि इसका विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़े.’
जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरानी हमला
इन अमेरिकी हमलों के बीच ईरान ने जॉर्डन के अज़रक एयरबेस स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाने का दावा किया है. ईरानी मीडिया और अल जज़ीरा के मुताबिक, इस हमले के दौरान कई मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें रोकने के लिए जॉर्डन का एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया.
ईरान पर नागरिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप
उधर अमेरिकी सेना ने ईरान पर पिछले एक सप्ताह में सात व्यावसायिक जहाजों पर हमला करने का आरोप लगाया है. CENTCOM प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, इन हमलों में कई नागरिक चालक दल के सदस्य मारे गए, घायल हुए या लापता हैं. उनका आरोप है कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर भी दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं. कूपर ने कहा कि अमेरिका निर्दोष नागरिकों को खतरे में डालने वाली हर कार्रवाई के लिए ईरान को जवाबदेह ठहराएगा.
IRGC की चेतावनी- तेल और गैस निर्यात रोक देंगे
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक अमेरिकी हमले जारी रहेंगे, तब तक क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात सामान्य नहीं होने दिया जाएगा. IRGC ने कहा कि अमेरिका यदि सैन्य कार्रवाई नहीं रोकता, तो पूरे क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
इस लगातार हो रहे वार-पलटवार , समुद्री नाकेबंदी, तेल निर्यात पर खतरे और जॉर्डन तक हमलों के फैलने से अब पूरा खाड़ी क्षेत्र युद्ध जैसे हालात की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. अगर जल्द ही इसका कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका गहरा असर पड़ सकता है.




