नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिका इस समय एक तरफ ईरान के साथ युद्ध में उलझा हुआ है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश के भीतर चुनावी नियमों को पूरी तरह पलटने की तैयारी कर रहे हैं. नवंबर 2026 में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप एक ऐसा कानून लाना चाहते हैं, जिससे अमेरिकी वोटिंग का पूरा ढांचा बदल जाएगा. इस प्रस्तावित कानून को ‘SAVE एक्ट’ (Safeguard American Voter Eligibility Act) कहा जा रहा है. ट्रंप का मानना है कि अगर यह बिल पास हो गया, तो रिपब्लिकन पार्टी आने वाले लंबे समय तक सत्ता में बनी रहेगी. सोमवार को सांसदों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा, ‘जब तक यह बिल मंजूर नहीं होता, मैं किसी भी चीज पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा.’
फिलहाल यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से पास हो चुका है, लेकिन सीनेट में अटका हुआ है. ट्रंप चाहते हैं कि हर अमेरिकी नागरिक वोट देने से पहले अपनी नागरिकता का पुख्ता दस्तावेजी सबूत पेश करे. यह प्रक्रिया भारत में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) से काफी मिलती-जुलती है.
क्या रिपब्लिकन पार्टी की जीत की गारंटी है यह बिल?
ट्रंप का दावा है कि नया चुनावी कानून मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी की जीत को ‘गारंटी’ देगा. असल में, हालिया सर्वे ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं. क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी के पोल के मुताबिक, 53% अमेरिकी नागरिक ईरान युद्ध के खिलाफ हैं और केवल 40% ही सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं.
ऐसे में ट्रंप को डर है कि युद्ध का विरोध चुनाव में भारी पड़ सकता है. फिलहाल सीनेट में रिपब्लिकन 53-47 से बहुमत में हैं, लेकिन नियम बदलने के लिए उन्हें अपने ही कुछ नेताओं के कड़े रुख का सामना करना पड़ रहा है.
युद्ध के बीच ट्रंप का दांव: वोटर कानून बदलकर जीत पक्की करने की कोशिश? (File Photo : AP)
वोटिंग के लिए कौन से डॉक्यूमेंट्स होंगे जरूरी?
प्रस्तावित कानून के तहत अब केवल पहचान पत्र दिखाना काफी नहीं होगा. वोटर्स को नागरिकता साबित करने के लिए यूएस पासपोर्ट, एनहांस्ड ड्राइवर लाइसेंस या जन्म प्रमाण पत्र जैसे सरकारी दस्तावेज देने होंगे.
अगर कोई मेल (Mail) के जरिए रजिस्ट्रेशन कराना चाहता है, तो उसे खुद दफ्तर जाकर अपने ओरिजिनल पेपर्स दिखाने होंगे.
यही नहीं, हर राज्य को अपनी वोटर लिस्ट ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ को भेजनी होगी ताकि डेटाबेस से उसका मिलान किया जा सके. ट्रंप का आरोप है कि डेमोक्रेट्स गैर-नागरिकों को वोट दिलाकर देश की डेमोग्राफी बदलना चाहते हैं.
क्या करोड़ों महिलाएं और अल्पसंख्यक हो जाएंगे वोटिंग से बाहर?
डेमोक्रेटिक पार्टी और मानवाधिकार संगठनों ने इस बिल को ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’ बताया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 10 में से एक अमेरिकी नागरिक के पास जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं होते. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा महिलाओं को लेकर है.
एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 69 मिलियन अमेरिकी महिलाओं के पास ऐसा जन्म प्रमाण पत्र नहीं है जो उनके मौजूदा कानूनी नाम (शादी के बाद बदले नाम) से मेल खाता हो.
भारत में भी ‘SIR’ के दौरान महिलाओं के नाम कटने की बड़ी वजह यही रही है. विपक्ष का तर्क है कि यह कानून जानबूझकर अल्पसंख्यकों और गरीब वोटरों को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है.
ट्रंप का दावा, नया कानून रिपब्लिकन पार्टी को लंबे समय तक जिताएगा (File Photo : AP)
सीनेट में ‘न्युक्लियर ऑप्शन’ पर फंसा है पेच
सीनेट में रिपब्लिकन लीडर जॉन थून फिलहाल ‘न्युक्लियर ऑप्शन’ इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं हैं. अमेरिका में किसी भी बड़े बिल पर बहस खत्म करने के लिए 60 वोटों की जरूरत होती है, जिसे ‘फिलीबस्टर’ कहा जाता है. ट्रंप चाहते हैं कि इस नियम को खत्म कर साधारण बहुमत से बिल पास कराया जाए. हालांकि, कई रिपब्लिकन सीनेटर इस पुराने संसदीय अधिकार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं.
अगले हफ्ते सीनेट में इस पर तीखी बहस होने की उम्मीद है. अगर ट्रंप इस बार भी नाकाम रहते हैं, तो वे पहले की तरह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का रास्ता अपना सकते हैं, जिसे अदालतों में चुनौती मिलना तय है.





