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अमेरिका और ईरान के बीच जारी टेंशन जारी है. कई मीडिया आउटलेट्स का दावा है कि जल्द ही अमेरिका ईरान को घुटने पर लाने के लिए चुनिंदा जगहों पर हमला कर सकता है. हालांकि, अभी तय नहीं है कि हमला कितना विनाशकारी होगा. वहीं, ईरान ने भी चेतावनी जारी करते हुए बताया कि अंग अमेरिका की ओर से कोई भी हमला होता है तो उसके इस इलाके में मौजूद कोई भी सैन्य ठिकाने हमारे मिसाइलों के निशाने पर होंगे.
अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े पांच बड़े अपडेट.
मिडिल ईस्ट चरम तनाव के दौर से गुजर रहा है. अमेरिकी सेना अरब सागर में बेड़ा डाले हुए हैं. मिडिल ईस्ट की ज्योपॉलिटिक्स की जानकारी रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप कभी भी हमला करने के आदेश दे सकते हैं. क्योंकि अमेरिका ने ईरान के पास अरब सागर क्षेत्र में अपने दो विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर- USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) और USS गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) तैनात किए हुए हैं. एयरक्राफ्ट कैरियर पर मौजूद फाइटर जेट्स, हेलिकॉप्टर लगातार उड़ान भर कर ईरान को डराने की कोशिश में लगे हुए. वहीं, बीते मंगलवार को ईरान ने भी अपने खतरनाक शाहिद सैय्यद शिराजी ने सैय्यद-3G लॉन्ग-रेंज SAM का पहला नेवल वर्टिकल मिसाइल लॉन्च कर समंदर में अमेरिका को अपनी ताकत दिखा दिया था कि वह किसी भी हमले से निपटने को तैयार है.
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की माने तो गुरुवार को आई खबर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर लिमिटेड स्ट्राइक करने पर विचार कर रहे हैं ताकि वह न्यूक्लियर एग्रीमेंट के लिए अपनी मांगें मानने के लिए मजबूर हो जाए. उधर, तेहरान ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमला होता है तो दुश्मन के बेस लेजिटिमेट टारगेट बन जाएंगे. हालांकि, अमेरिकी मीडिया की मानें तो ईरान पर यूएस के शुरुआती स्ट्राइक कुछ ही दिनों में शुरू हो सकते हैं, जिसमें कुछ मिलिट्री या सरकारी जगहों को टारगेट किया जाएगा. लेकिन, यह बड़े पैमाने पर हमला नहीं होगा जिससे ईरान की बड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है.
उधर, ईरानी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, अगर अमेरिका अपनी सैन्य धमकियों और हमलों करता है तो अमेरिकी अड्डे, सुविधाएं और संपत्तियां उसकी टारगेट होंगी. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे एक पत्र इसकी जानकारी दीं. इस पत्र में लिखा गया है, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा इस तरह का आक्रामक बयान… सैन्य आक्रामकता के वास्तविक खतरे का संकेत देता है, जिसके परिणाम इस क्षेत्र के लिए विनाशकारी होंगे और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करेंगे.’ उन्होंने सुरक्षा परिषद से आह्वान किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका बल प्रयोग की अपनी गैरकानूनी धमकियों को तुरंत बंद कर दे.
चलिए ईरान और अमेरिका से जुड़ी पांच बड़ी अपडेट को जान लेते हैं-
- वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान को रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन तेहरान के कुछ चुनिंदा सैन्य और सरकारी ठिकानों पर सीमित हवाई हमले करने की योजना पर विचार कर रहा है, जिसे द्वारा यूरेनियम संवर्धन न रोकने की स्थिति में ‘सत्ता परिवर्तन’ के लक्ष्य तक बढ़ाया जा सकता है. इस संभावित खतरे के बीच, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अमेरिका को खुली चेतावनी दी है कि अपनी रक्षा के लिए शत्रु ताकतों के खिलाफ जवाबी हमला करने से पीछे नहीं हटेगा.
- अमेरिका के साथ जारी वार्ता और क्षेत्र में भारी अमेरिकी सैन्य जमावड़े के कारण पैदा हुए तनाव के बीच, ईरान के वरिष्ठ धर्मगुरुओं ने जुमे की नमाज़ के दौरान वाशिंगटन के साथ बातचीत के रुख की तीखी आलोचना करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. तेहरान के अंतरिम जुमे की नमाज़ के नेता मोहम्मद हसन अबूतोरबी फर्ड ने दावा किया कि पिछले साल के “12 दिवसीय युद्ध” के अनुभव के बाद इज़राइल अब ईरान पर हमला करने के प्रति “अनिच्छुक” है, क्योंकि इस प्रकरण ने ईरान की अदम्य शक्ति को प्रदर्शित कर दिया है. फर्ड का तर्क है कि उस संघर्ष के दौरान ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमलों और इज़राइल के अभियान ने क्षेत्रीय संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है, जिसके कारण अब “जायोनी” ईरान के खिलाफ आक्रामकता दिखाने से डर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उनके पास ईरान की ताकत के खिलाफ कोई प्रभावी रक्षा कवच नहीं है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाशिंगटन के साथ मौजूदा दौर की बातचीत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा निर्धारित एक व्यापक रणनीति के तहत ही संचालित की जा रही है.
- अमेरिका में सिलिकॉन वैली के तीन ईरानी मूल के इंजीनियरों समानेह घंडाली (41), मोहम्मदजवाद खोस्रवी (40) और उनकी सौतेली बहन सोरूर घंडाली (32) को गूगल सहित प्रमुख टेक कंपनियों से प्रोसेसर सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी से जुड़े अत्यंत संवेदनशील व्यापारिक रहस्य चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. एफबीआई और कैलिफोर्निया की उत्तरी जिला संघीय अदालत ने बताया कि तीनों पर ट्रेड सीक्रेट चोरी, साजिश रचने और न्याय में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. जांच में पता चला कि समानेह और सोरूर ने गूगल में काम किया था और बाद में एक अन्य कंपनी में चले गए, जबकि खोस्रवी (समानेह के पति) दूसरी कंपनी में थे. आरोप है कि उन्होंने मोबाइल कंप्यूटर प्रोसेसर से जुड़ी गोपनीय तकनीक चुराकर ईरान और अन्य अनधिकृत स्थानों पर भेजी. तीनों संजोजे के निवासी हैं और गुरुवार को कोर्ट में पेश हुए.
- जिनेवा में हुई वार्ता के बाद दोनों देश किसी भी प्रकार के कड़े कदम उठाने से पहले सोच-विचार रहे हैं और दूरगामी परिणाम को देखते हुए बातचीत पर अभी भी जोर दे रहे हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने स्वीकार किया कि चर्चाओं में सीमित प्रगति हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष मुख्य मुद्दों पर अभी भी बहुत दूर हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को ठोस प्रस्तावों के साथ वापस आना होगा. तेहरान के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ एक समझौते पर पहुंचना ही समझदारी होगा.
- पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपने नागरिकों से ईरान को तुरंत छोड़ने का आग्रह किया है, और चेतावनी दी है कि स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है और निकासी के लिए उपलब्ध समय बहुत कम समय में समाप्त हो सकता है. इस बीच, ईरान ने अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है, रूस के साथ नौसैनिक अभ्यास कर रहा है और प्रमुख शिपिंग लेन के पास लाइव-फायर अभ्यास कर रहा है, जबकि अमेरिका ने इस क्षेत्र में एक विमानवाहक पोत और अतिरिक्त लड़ाकू विमान तैनात किए हैं.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें





