भारत का स्मार्टफोन बाजार 2026 में बड़ी चुनौती का सामना कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल स्मार्टफोन की कुल बिक्री (शिपमेंट) में 12 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. यह अनुमान मार्केट रिसर्च कंपनी इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन (IDC) के शुरुआती आंकड़ों पर बेस्ड है.
2025 के बाद अब गिरावट- साल 2025 में स्मार्टफोन बाजार लगभग स्थिर रहा था. उस साल कुल 152 मिलियन यूनिट्स की शिपमेंट हुई, जो 2024 के मुकाबले सिर्फ 0.5% ज्यादा थी. लेकिन अब 2026 में हालात ज्यादा खराब दिख रहे हैं.
इस गिरावट की बड़ी वजह है:
- ग्लोबल चिप की कमी
- रुपये की अस्थिरता
- पार्ट्स और कंपोनेंट की बढ़ती कीमतें
चिप की कमी पिछले साल के आखिर से ही बढ़नी शुरू हो गई थी और अब इसका सीधा असर उत्पादन और सप्लाई पर पड़ रहा है.
‘परफेक्ट स्टॉर्म’ जैसी स्थिति
IDC की सीनियर रिसर्च मैनेजर उपासना जोशी के मुताबिक, भारत का स्मार्टफोन बाजार इस समय ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ का सामना कर रहा है. यानी एक साथ कई समस्याएं आ गई हैं.
- सप्लाई कम है
- कीमतें बढ़ रही हैं
- ग्राहकों की खरीदने की क्षमता कमजोर हो रही है
अनुमान है कि सप्लाई की समस्या 2027 की पहली छमाही तक जारी रह सकती है. हालांकि उसके बाद सुधार की उम्मीद जताई गई है.
सबसे ज्यादा असर किस पर?
रिपोर्ट के अनुसार, एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. वहीं ऐपल के आईफोन की बिक्री अपेक्षाकृत स्थिर रह सकती है और हल्की ग्रोथ भी देखी जा सकती है.
$200 (लगभग ₹16,000-₹17,000) से कम कीमत वाले फोन, जो कुल बिक्री का 55% से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं, इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर झेलेंगे.
प्रीमियम और मिड-प्रीमियम सेगमेंट में ग्रोथ जारी रह सकती है, लेकिन वह भी पहले जितनी तेज नहीं होगी.
कीमतें लगातार बढ़ रहीं
भारत में बड़ी कंपनियां जैसे सैमसंग, ओप्पो, वीवो, रियलमी और शाओमी नवंबर से ही कई मॉडलों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं. फरवरी में भी कई ब्रांड्स ने दाम बढ़ाए हैं और आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है.
कंपोनेंट की बढ़ती कीमत, खासकर मेमोरी और स्टोरेज की लागत, कंपनियों को दाम बढ़ाने पर मजबूर कर रही है. कई कंपनियों ने अपने बिक्री लक्ष्य में 20% तक कटौती भी कर दी है और अब ज्यादा यूनिट बेचने की बजाय ज्यादा मुनाफे पर ध्यान दे रही हैं.
- रिटेल बाजार पर असर
- ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, बाजार इस समय ‘ट्रिपल थ्रेट’ झेल रहा है:
- लगातार कीमतों में बढ़ोतरी
- सप्लाई की कमी
- ग्राहकों की खरीद में देरी
रिटेलर्स को ज्यादा पैसा लगाकर स्टॉक खरीदना पड़ रहा है, जबकि ग्राहकों की दिलचस्पी कम होती जा रही है.
आगे क्या?
हालांकि कंपनियां नो-कॉस्ट EMI और एक्सचेंज ऑफर जैसी स्कीम से बिक्री बढ़ाने की कोशिश करेंगी, लेकिन कमजोर होती खरीद क्षमता के कारण खासकर सस्ते फोन सेगमेंट पर ज्यादा दबाव रहेगा.
अगर हालात ऐसे ही रहे, तो 2026 भारत के स्मार्टफोन बाजार के लिए हाल के सालों का सबसे मुश्किल साल साबित हो सकता है.
(मनीकंट्रोल एक्सक्लूसिव)





