उन्होंने आगे लिखा, “जो कुछ सामने आ रहा है, वह सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि यह लक्षित शत्रुता का एक ऐसा सिलसिला है जो सभी नागरिकों को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करने की राज्य की क्षमता और इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सार्वजनिक धमकियों, भड़काऊ नारों और नफरत से भरी सामग्री के प्रसार ने एक ऐसा माहौल बना दिया है, जहां भारतीय नागरिकों का एक वर्ग देश की राजधानी में ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।”
मोहम्मद जावेद ने अपने पत्र में लिखा, “भारत का संविधान नागरिकता की शर्त के रूप में ‘डर’ को स्वीकार नहीं करता। संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 23 समानता, स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की गारंटी देते हैं, लेकिन ऐसे अधिकार आज उत्तम नगर में खतरे में नजर आ रहे हैं।”





